जैसलमेर में जश्न का माहौल, जिले से पहली बार मंत्री बनेंगे सालेह मोहम्मद , खत्म हुआ बरसों लम्बा इंतजार

3 वर्ष पहले
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  • 23 साल की उम्र में बने थे प्रधान, 2005 में बने जिला प्रमुख

जैसलमेर. पोकरण में भाजपा के हिंदुत्व कार्ड को फेल कर 872 मतों से जीतकर विधायक बने सालेह मोहम्मद को कांग्रेस ने बड़ा तोहफा दिया है। नवनिर्वाचित कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद को शामिल किया गया है। 66 साल में पहली बार जैसलमेर जिले को मंत्री पद मिलने से जिलेभर में खुशी की लहर दौड़ गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खबर मिलने के साथ ही जश्न मनाया। 


गहलोत सरकार के 23 सदस्यीय पहले मंत्रिमंडल का सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह होगा। इसमें वे बायतु विधायक हरीश चौधरी व अन्य विधायकों के साथ मंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले 14 विधानसभा गठित हुई है और एक बार भी जैसलमेर जिले को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।

 

15वीं विधानसभा में सालेह मोहम्मद ने परचम लहराया है। दूसरी बार विधायक बनने पर उन्हें गहलोत सरकार ने पहले मंत्रिमंडल में शामिल किया है। वर्तमान में उनकी उम्र 41 साल है। इसके अलावा मुस्लिम कोटे से गहलोत सरकार ने शाले मोहम्मद को मंत्री पद के लिए चुना है। 


सालेह मोहम्मद ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मुझ पर भरोसा जताया है और मैं उस पर खरा उतरूंगा। जैसलमेर जिले को पहली बार मंत्री पद मिल रहा है और यह जिले के लिए गौरव की बात है। मेरा प्रयास यही रहेगा कि पूरे जिले का चंहुमुखी विकास कर पिछड़े जिले की श्रेणी से जैसलमेर को आगे ले जाना।  


राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है फकीर परिवार 
सालेह मोहम्मद मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फकीर के पुत्र हैं। जैसलमेर की राजनीति में फकीर परिवार का शुरू से ही दबदबा रहा है। कुछ साल पहले तक फकीर परिवार पंचायती राज में ही प्रधान व प्रमुख का पद ले रहे थे और विधायक का पद आसान नहीं लग रहा था। 2008 में पोकरण विधानसभा अलग होने के साथ फकीर परिवार की ओर से सालेह मोहम्मद ने ही भाग्य आजमाया और विधायक बन गए। 2013 में हार मिली और इस बार फिर से जीत का सेहरा बंध गया। 


एक नजर सालेह मोहम्मद के राजनीतिक कॅरिअर पर 
मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फकीर के बेटे हैं। 
सबसे पहले सालेह मोहम्मद के चाचा फतेह मोहम्मद राजनीति में आए थे, उसके बाद सालेह मोहम्मद आए। 
इनका जन्म 1 फरवरी, 1977 को हुआ। 
23 साल की उम्र में वर्ष 2000 में पंचायत समिति जैसलमेर के प्रधान बने। 
2005 में जैसलमेर के जिला प्रमुख बने। 
2008 में पोकरण विधानसभा अलग होने पर जिला प्रमुख पद से इस्तीफा देकर विधायक का चुनाव लड़े और केवल 339 वोटों से जीत मिली। 
2013 में 35 हजार वोटों से हार गए। 
2018 में फिर से मामूली अंतर 872 से जीत गए और अब मंत्री बन रहे हैं। 


दो बार विधायक बनने के बाद मिला मंत्री पद 
सालेह मोहम्मद 23 साल की उम्र में वर्ष 2000 में राजनीति में आए और पहले ही साल वे पंचायत समिति जैसलमेर के प्रधान बन गए। जैसलमेर की राजनीति में परचम लहराने वाले पहले युवा हैं सालेह मोहम्मद। उनकी कामयाबी यही नहीं रुकी वे आगे चलकर जिला प्रमुख भी बने और बाद में दो बार विधायक बने। 
 

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