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मृदुला काे दुल्हन बनाने स्पेन से आए लुइस ईसाजा, यज्ञाेपवीत संस्कार में जनेऊ धारण किया

9 महीने पहले
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  • शुक्रवार को दोनों हिंदू रीति-रिवाज से विवाह बंधन में बंधेंगे, दोनों की मुलाकात ऑस्ट्रिया के वियाना शहर में हुई थी
  • लुईस फैशन एसेसरिज का बिजनेस चलाते हैं, मृदुला ऑस्ट्रिया में सिमंस कंपनी में इंजीनियर थीं
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जाेधपुर (रमेश कुमार प्रजापत). शुक्रवार काे जोधपुर में प्रेम का रिश्ता विवाह की मंजिल पर पहुंचेगा। दुल्हन हाेंगी सरस्वती नगर की मृदुला शर्मा एवं घाेड़ी पर बैठकर आएंगे स्पेन के लुइस कार्लोस ईसाजा। तीन साल पहले दोनों को पहली मुलाकात कॉमन फ्रेंड्स के जरिए यहां से हजारों मील दूर ऑस्ट्रिया के वियना में हुई। लुइस जहां फैशन एसेसरिज का बिजनेस चलाते, वहीं मृदुला ऑस्ट्रिया में सिमंस कंपनी में इंजीनियर थीं।
 

शादी के प्रस्ताव पर असमंजस में पड़ गईं थी मृदुला
मुलाकातों का सिलसिला पहले आकर्षण और फिर प्यार में बदल गया। लुइस ने जब शादी का प्रस्ताव रखा तो मृदुला असमंजस में पड़ गई। सोचा- परदेस और पराए धर्म के लड़के से शादी के लिए घरवालों को कैसे मनाऊंगी। लुइस ने हौसला बढ़ाया तो मृदुला ने जोधपुर में अपने पिता शांतिप्रकाश शर्मा व मम्मी से बात की। उन्हें बताया कि लुइस बेहद नेक, केयरिंग और सभी का सम्मान करने वाला युवक है। शर्मा दंपती एक बार तो झिझके लेकिन बेटी की खुशी और विश्वास के लिए लुइस व उसके माता-पिता को मिलने बुलाया।
 

शर्मा दंपती की इच्छा, बेटी रीति-रिवाज से दुल्हन बने
लुइस पिता मोंटो लिवेनो व मां रोजा के साथ जोधपुर आए। इनसे मिलकर बात लगभग बन ही गई। शर्मा दंपती की इच्छा थी कि बेटी पूरे धार्मिक रीति रिवाज से दुल्हन बने। लुइस ने भी इस बात को सम्मानपूर्वक स्वीकारा। मृदुला के माध्यम से लुइस रीति-रिवाजों से परिचित तो थे ही। शादी 8 नवंबर को होना तय हुआ। परंपराओं के सिलसिले में पंडित ऋषि महाराज ने गुरुवार को लुइस को यज्ञोपवित संस्कार में जनेऊ धारण करवाया। शुक्रवार को लुइस घोड़ी पर दूल्हा बनकर आएंगे। एक होटल में हिंदू रीति रिवाज से वे मृदुला के साथ अग्नि के 7 फेरे लेंगे।
 

शादी कार्ड फेंका जाता है इसलिए कोई धार्मिक चिह्न नहीं 
मृदुला के पिता शांतिप्रकाश शर्मा फूड प्रोडक्ट्स के व्यवसायी व माता गृहिणी हैं। जबकि लुइस के पिता डेंटिस्ट व मां चित्रकार हैं। शादी के कार्ड पर कोई भी धार्मिक चिह्न अथवा देवी-देवता के नाम नहीं हैं। शर्मा का कहना है कि अमूमन शादी के कार्ड बाद में फेंके जाते हैं। धर्म एवं देवताओं का अपमान ना हो इसलिए ऐसा किया है।

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