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जोधपुर. कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक ईरान सहित अन्य देशों से शीघ्र ही भारत अपने नागरिकों को निकालने की तैयारी में है। वहीं भारतीय सेना ने कोरोना से निपटने के लिएमोर्चा संभालते हुए तैयारियां शुरू कर दी है। वहां से आने वाले भारतीय नागरिकों को जांच के बाद कुछ दिन तक आइसोलेशन में रखा जाएगा। इसके लिए भारतीय सेना ने जोधपुर व जैसलमेर में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की है। आज दोपहर तक करीब 150 लोगों को लेकर विशेष विमान ईरान से सीधे जैसलमेर पहुंचेगा। बाहर से आने वाले लोगों को जैसलमेर में रखा जाएगा। यदि संख्या बढ़ती है तो फिर इन्हें जोधपुर में भी रखने की तैयारी की जा चुकी है।
सेना के प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने बताया कि अगले दो-तीन दिन में बड़ी संख्या में भारतीय स्वदेश लौटेंगे। ऐसे में एहतियात के तौर पर जोधपुर, जैसलमेर, झांसी, गोरखपुर, कोलकाता व चेन्नई में विशेष सुविधाएं विकसित की जा चुकी है।
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इस क्रम में जोधपुर में गुरुवार को सेना व एयरफोर्स के आला अधिकारियों की एक अहम बैठक आयोजित कर पूरी योजना को अंतिम रूप प्रदान किया गया। सबसे पहले आने वाले लोगों को जैसलमेर में रखा जाएगा। इसके पश्चात दूसरे समूह को जोधपुर में रखने की योजना है। दोनों स्थान पर सैन्य क्षेत्र में विशेष आइसोलेशन वार्ड विकसित किए जा चुके है। अभी यह खुलासा नहीं किया गया है कि यहां पर कितने लोगों को रखा जाएगा।
इस कारण किया गया चयन
सैन्य सूत्रों का कहना है कि इन दिनों जैसलमेर व जोधपुर का तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में कोरोना प्रभावित या इसके संदिग्ध लोगों के लिए यहां का मौसम काफी लाभकारी साबित हो सकता है। इस कारण ही इन दोनों स्थान का चयन किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि बढ़े हुए तापमान में कोरोना वायरस निष्क्रिय हो जाता है।
ईरान में 6,000 से ज्यादा भारतीय
ईरान में 6,000 से ज्यादा भारतीय फंसे हुए हैं, जिनमें से अधिकतर छात्र और तीर्थयात्री हैं। कोरोना ने ईरान में काफी कहर मचा रखा है। ईरान में 9,000 से ज्यादा लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है और 354 लोगों की मौत हो चुकी है। केंद्रीय स्वास्थ मंत्री हर्षवर्धन ने आज लोकसभा में कोरोना पर जानकारी देते हुए बताया कि भारत ईरान में एक लैब स्थापित करने के लिए सामान भेज चुका है लेकिन अभी तक कस्टम क्लियरेंस नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ईरान सरकार अगर जल्द सहयोग करे तो वहां जल्दी से लैब बनाया जा सकता है। लेकिन अभी तक भारत को लैब के लिए हरी झंडी नहीं मिली है। हर्षवर्धन ने बताया कि भारत की योजना लैब की स्थापना कर वहीं भारतीयों के सैंपल टेस्ट करने का था। उन्होंने लोकसभा में कहा, 'हम ईरान में फंसे भारतीयों का सैंपल टेस्ट वहीं करना चाहते हैं। इसके लिए हमने टनों वजनी लैब को ईरान भेजा है, ताकि जिनके टेस्ट निगेटिव आए, उन्हें भारत भेजा जा सके।
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