Hindi News »Rajasthan »Jodhpur »News» The AICTE Has No Right To Declare No Admission

‘नो एडमिशन’ घोषित करने का एआईसीटीई को अधिकार ही नहीं

सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2013 में एक आदेश जारी कर एआईसीटीई को इस अधिकार से वंचित कर चुका है।

मनोजकुमार पुरोहित | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:41 AM IST

  • ‘नो एडमिशन’ घोषित करने का एआईसीटीई को अधिकार ही नहीं
    +1और स्लाइड देखें
    नो एडमिशन के खिलाफ इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स का विरोध

    जोधपुर. ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने 10 अप्रैल को आदेश जारी कर एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में वर्ष 2018-19 में नो एडमिशन तो जारी कर दिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2013 में एक आदेश जारी कर एआईसीटीई को इस अधिकार से वंचित कर चुका है। इस आदेश के अनुसार इस तरह की कार्रवाई का अधिकार केवल यूजीसी काे ही है।

    - सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सिविल अपील संख्या 1145/2004 के तहत 25 अप्रेल 2013 को जारी किया था। इसमें यूनिवर्सिटी के संबद्ध, संगठक, संकाय व विभाग को एआईसीटीई से कोई भी पूर्व स्वीकृति नहीं लेने की छूट दी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एआईसीटीई को इन कॉलेजों पर प्रतिबंध लगाने का भी अधिकार नहीं है।

    - 11 न्यायाधीशों की संवैधानिक बैंच के फैसले का हवाला देते हुए कहा था कि विश्वविद्यालय को टेक्निकल संस्थान जैसा कि एआईसीटीई एक्ट की धारा-2एच में परिभाषित किया गया है, से अलग माना गया है और यूजीसी को स्पष्ट रूप से ऐसे विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करने की शक्ति प्रदान की गई है। यानी प्रतिबंध लगाने, सहमति प्रदान करने में और शैक्षणिक स्तर को व्यवस्थित रखने तथा विश्वविद्यालय द्वारा संचालित कॉलेजों में स्टूडेंट्स के कोर्स में प्रवेश इत्यादि में हस्तक्षेप का अधिकार केवल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी को ही होगा।

    - आदेश के अनुसार इस प्रकार उपरोक्त सभी शर्तें जो घोषित की गई वे केवल यूजीसी एक्ट में ही निहित रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट ऑफ प्राइवेट कॉलेजेज वर्सेज एआईसीटीई एवं अन्य की याचिका में दिए थे।

    यूजीसी ने भी रेगुलेशन में बदलाव किया
    सुप्रीम कोर्ट के उक्त आदेश के बाद यूजीसी ने 28 फरवरी 2014 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर रेगुलेशन में बदलाव किया। इसके तहत सिविल अपील संख्या 1145/2004 व 5736-5745 के तहत दिए आदेश की अक्षरशः पालना कर ली गई।

    प्रदेश के विवि को भी यूजीसी ने जानकारी दी
    तत्कालीन यूजीसी सचिव डॉ. अखिलेश गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान के सिंघानिया विवि को पत्र भेजा था। उन्होंने लिखा था कि विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज जो तकनीकी शिक्षा प्रदान करते हैं, वे एआईसीटीई एक्ट 1987 के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं।

    शिक्षामंत्री ने बैठक ली, कमियां 3 दिन में पूरी करने को कहा

    एमबीएम मामले को लेकर सोमवार को उच्च शिक्षामंत्री किरण माहेश्वरी के निवास पर बैठक हुई। वीसी प्रो. आरपी सिंह, उच्चशिक्षा के अफसर, इंजीनियरिंग संकाय के डीन प्रो. एसएस मेहता व सभी एचओडी मौजूद थे। माहेश्वरी ने अधिकांश कमियों को 3 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने हायर एजुकेशन जॉइंट सेक्रेटरी से कहा कि वे खुद 18-19 अप्रेल को जोधपुर रहेंगी और एआईसीटीई को भेजने के लिए जवाब बनवाएंगी। उन्होंने रूसा योजना में विवि को मिले 10 करोड़ में से 4 करोड़ एमबीएम को देने को कहा। बैठक में हायर एजुकेशन के अति. मुख्य सचिव खेमराज, पूर्व सीएस अशोक जैन, कुलसचिव प्रो. पीके शर्मा, एलुमिनी एसो.अध्यक्ष पीसी पुरोहित, गुंजन सक्सेना, आरपी शर्मा व गिरधारी शेखावत व मनीष लोढ़ा काे ही बुलाया गया। सभी विभागाध्यक्षों से माहेश्वरी ने बैठक के बाद मुलाकात की।

    हर कमी को सुधारने के निर्देश

    1. सेफ्टी इक्यूपमेंट:फायर सेफ्टी का निगम से प्रमाण पत्र दिलवाने का निर्णय। खेमराज को आयुक्त से बात करने के निर्देश।
    2. भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र: पीडब्ल्यूडी से प्रमाण पत्र लेने तथा संबंधित अधिकारी से अतिरिक्त मुख्य सचिव को बात के निर्देश दिए।
    3. भवन मरम्मत: इसमें जो कार्य हुए हैं, फोटो सहित एआईसीटीई को भेजने के निर्देश।
    4. प्रयोगशालाएं:काफी उपकरण खरीद लिए हैं, बाकी उपकरण और खरीदने के लिए फंड उपलब्ध करवाने की घोषणा।
    5. पुस्तकालय:कमी पूरी करने के लिए रूसा योजना से फंड उपयोग करने के निर्देश।
    6. शिक्षक: शीघ्र भर्ती प्रक्रिया आरंभ करने का आश्वासन दिया।
    7. तकनीकी स्टाफ:इस संबंध में विज्ञापन जारी हुआ। प्रक्रिया एआईसीटीई को बताने के निर्देश दिए गए।
    8. फूड सेफ्टी एक्ट:हॉस्टल्स की भोजनशालाओं को फूड सेफ्टी का सर्टिफिकेट मिल चुका है, जिससे एआईसीटीई संतुष्ट है।
    9. विदेशी जनरल: ये बहुत महंगे होते हैं, इसीलिए इनकी खरीद के लिए रूसा के फंड से अतिरिक्त फंड की घोषणा।
    10. लैंड यूज सर्टिफिकेट: लैंड यूज सर्टिफिकेट उपलब्ध हुआ, एआईसीटीई को देंगे।

    बैठक में वीसी, डीन सहित विभाग के आला अफसरों को दिए निर्देश

    विवि की ओर से अधिकांश कमियां तो पूर्ण कर ली गई हैं। जिन कमियों पर सवाल उठाए गए हैं उन्हें तीन दिनों में पूर्ण कर लिया जाएगा। इस संबंध में डीन की ओर से दिए जवाब में कुछ कमियां रह गईं। 20 को फिर से जवाब प्रस्तुत किया जाएगा। एमबीएम नो एडमिशन से बाहर आ जाएगा।
    - प्रो. आरपी सिंह, कुलपति जेएनवीयू

  • ‘नो एडमिशन’ घोषित करने का एआईसीटीई को अधिकार ही नहीं
    +1और स्लाइड देखें

    एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में नो एडमिशन घोषित होने का स्टूडेंट्स को भी धक्का लगा। सोमवार को बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने एकत्र होकर एमबीएम कॉलेज के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। काफी संख्या में छात्र-छात्राएं कॉलेज में सड़क पर ही बैठ गए और कॉलेज को नो एडमिशन से निकालने की मांग की।

आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×