टिड्‌डी / 4 हजार किमी दूर पैदा हो रहा खतरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 60 दिन में नियंत्रण नहीं हुआ तो फिर बड़ा हमला हो सकता है

इस नक्शे के आधार पर समझा जा सकता है कि टिड्‌डी के बड़े समूह कहां पर है। इस नक्शे के आधार पर समझा जा सकता है कि टिड्‌डी के बड़े समूह कहां पर है।
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इस नक्शे के आधार पर समझा जा सकता है कि टिड्‌डी के बड़े समूह कहां पर है।इस नक्शे के आधार पर समझा जा सकता है कि टिड्‌डी के बड़े समूह कहां पर है।

  • ईरान, सऊदी अरेबिया, सुडान, अफ्रीका, लाल सागर में टिड्डियों की ब्रीडिंग हो रही

दैनिक भास्कर

Feb 14, 2020, 11:33 AM IST

बाड़मेर (महेश गौड़). भारत पर एक बार फिर टिड्‌डी का बड़ा हमला मंडरा रहा है। यह हमला अब तक हुए टिडि्डयों में सबसे बड़ा हो सकता है। ‘टिडि्डयों का अभी प्रजनन काल चल रहा है। इसका मुख्य प्रजनन केंद्र ईरान, सुडान, इथोपिया, सऊदी अरेबिया, ओमान, लाल सागर है। यहां से प्रजनन के 20 दिन बाद फाका बनकर जमीन से बाहर आएगा और इसके पांच से छह सप्ताह बाद वयस्क होकर उड़ना शुरू हो जाएगी।

इसके बाद यह झुंड में उड़कर दूरी तय करेगी। ईरान से 2830 , इथोपिया से 4317 व सऊदी अरब से 3504 किलोमीटर की दूरी तय कर भारत में फिर टिड्‌डी प्रवेश कर सकती है। इस बार यह खतरा और बढ़ रहा है। 
टिड्‌डी के प्रजनन स्थान वाले देशों में अभी से नियंत्रण के प्रयास नहीं हुए तो मई और जून में दुबारा टिड्डी का इससे भी बड़ा हमला हो सकता है। भारत यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाकर जिन देशों में फाका पैदा हो रहा है वहां पर ही नष्ट कर दे तो ही इस बड़े खतरे से बचा जा सकता है। विश्व में तीस से अधिक देश टिड्डी के कहर से प्रभावित है। यहां की फसलें सहित वनस्पति टिड्डियां चट कर रही है। भारत-पाक बॉर्डर से देश में प्रवेश कर रहे टिड्डी दलों ने किसानों के खेतों पर कहर बरपाया है। बचाव के प्रयास अब तक नाकाफी साबित हो रहे हैं। हजारों किलोमीटर दूर से टिड्डियां पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश कर रही है।


इस बार हमला हुआ तो संभल नहीं पाएंगे किसान
टिड्डी नियंत्रण के लिए यूएनओ के अंतर्गत एफएओ संगठन बना हुआ है। जो इस तरह की आपदा पर नजर रखता है। इसमें भारत का प्रतिनिधित्व जेपी सिंह कर रहे हैं। लगातार आ रहे झुंड को नष्ट करने के लिए केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास नहीं किए तो आने वाले समय में वर्तमान में कई गुणा बड़े टिड्डी दल भारत में प्रवेश कर किसानों की कमर तोड़ देंगे।


फाका से टिड़्डी बनने तक कई बार बदलती है रंग
अभी ईरान में बारिश हो रही है तथा लाल सागर का नमी युक्त तट टिड्डियों की ब्रिडिंग के लिए उपयुक्त है। इस समय टिड्डियां की लाल सागर, ईरान, अफ्रीका, सुडान, इजिप्ट, ओमान, सऊदी अरेबिया सहित आसपास के नम भागों में ब्रीडिंग शुरू हो गई है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन देशों के साथ मिलकर केंद्र ने टिड्डी नियंत्रण का ठोस कदम नहीं उठाया तो दुबारा भारत पर आक्रमण हो सकता है। मादा टिड्डी रेत के अंदर सैल बनाकर 10 से 100 अंडे देती है। जो गर्म जलवायु होने पर 20 दिन के अंदर फूट जाते हैं। लेकिन शीतकाल के अंदर अंडे सुप्त बने रहते हैं। टिड्डियों की ब्रीडिंग के लिए नमी युक्त वातावरण उपयुक्त होता है। मादा टिड्डी के पंख नहीं होते हैं। बस वह अन्य बातों के अंदर अन्य टिड्डी के समान होती है। यह 5-6 सप्ताह के अंदर वयस्क हो जाती है। इस अवधि के अंदर टिड्डी की त्वचा कई बार बदलती है। वह 20 से 30 दिन के अंदर पूरी प्रौढ़ हो जाती है। 


टिड्‌डी हमले का खतरा टला नहीं
राजस्व मंत्री हरीश चौधरी का कहना है कि टिडि्डयों ने हमारे किसानों की कमर तोड़ दी है। इसको लेकर राज्य सरकार ने नियंत्रण का प्रयास किया। टिड्डी नियंत्रण विभाग भी इसमें कुछ खास नहीं कर पाया। किसानों ने अपने स्तर पर टिड्डियों को मारने का कार्य किया लेकिन अब भी छोटे छोटे दल फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाकर वहां से टिड्डी को नष्ट नहीं किया तो आने वाले कुछ ही महिनों में इससे भी बड़े टिड्डी दल भारत में प्रवेश करेंगे। इस संबंध की जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठन को भी है। 


वापस दो माह बाद हो सकता है हमला
टिड्डी चेतावनी संगठन के उप निदेशक केएल गुर्जर का कहना है कि वर्तमान में पूर्वी अफ्रीका, ओमान, यमन, ईरान, लाल सागर के पास टिड्डी की ब्रीडिंग हो रही है। इस संबंध में एफएओ से समय समय पर अपडेट आता है,लेकिन यहां पर संबंधित देश ही इसका नियंत्रण कर सकता है। पाकिस्तान को छोड़कर अन्य देशों से केंद्र सरकार संपर्क में है और इसके नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास जारी है। वर्तमान में हमारे यहां टिड्डी पर पूर्णत: नियंत्रण पा लिया है। अब मई-जून तक खतरा टला हुआ है। इसके बाद दुबारा टिड्डियों का हमला हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। 

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