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जैसलमेर. जिले में डोडा पोस्त की अवैध खेती के दो मामले सामने आए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए डोडा पोस्त की अवैध खेती बरामद कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नोख क्षेत्र के मदासर में एक बीघा जमीन पर 8730 पौधे और मोहनगढ़ नहरी क्षेत्र में 260 पौधों की अवैध खेती मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर डोडा पोस्त के पौधे जब्त कर दोनों जगहों से आरोपियों को गिरफ्तार कर एनडीपीएस के तहत मामले दर्ज किए।
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नोख क्षेत्र में उपनिरीक्षक हनुमान विश्नोई के नेतृत्व में टीम ने मुखबिर की सूचना के आधार पर डोडा पोस्त के पौधे बरामद किए। पुलिस को सूचना मिली कि हजारीराम विश्नोई निवासी मदासर ने अपने खेत में एक बीघा जमीन पर डोडा पोस्त की खेती कर रखी है। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर 8730 डोडा पोस्त के पौधे जब्त कर आरोपी हजारीराम विश्नोई को गिरफ्तार कर लिया।
काश्तकार ने लगाए थे 260 डोडा पोस्त के पौधे
मोहनगढ़ क्षेत्र के 8 जेजेडब्ल्यू में एक काश्तकार द्वारा की गई अवैध खेती को मोहनगढ़ पुलिस ने जब्त किया। मोहनगढ़ थानाधिकारी माणकराम के नेतृत्व में टीम ने नहरी क्षेत्र में दबिश देकर डोडा पोस्त के 260 पौधे जब्त कर आरोपी गणेशाराम पुत्र केशराराम नायक को गिरफ्तार किया गया। यहां 147 पौधों पर डोडा व फूल लगे हुए थे जिनका वजन 7 किलो 980 ग्राम तथा 113 पौधे छोटे थे जिनका वजन 4 किलो 610 ग्राम था। पुलिस टीम में हैड कांस्टेबल दीपसिंह, भरमलराम, कैलाश, सुरेन्द्रसिंह, सत्यवीरसिंह व नारायणदान शामिल थे।
नहरी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में डोडा पोस्त की खेती का अनुमान
नोख व मोहनगढ़ क्षेत्र में अवैध खेती मिलने के बाद आशंका जताई जा रही है कि जिले के दूर दराज के नहरी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में डोडा पोस्त की अवैध खेती हो सकती है। विशाल भू भाग पर फैले नहरी क्षेत्र में अवैध खेती तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती है। नोख में मिली अवैध खेती सरसों व अरंडी की खेती के बीच डोडा पोस्त के पौधे लगाए हुए थे वहीं मोहनगढ़ में आरोपी ने अपनी झोंपड़ी के आगे क्यारी में पौधे उगा रखे थे। नहरी क्षेत्र में अवैध डोडा पोस्त की खेती के ओर भी कई मामले सामने आ सकते हैं।
डोडा पोस्त बंद होने के बाद अवैध खेती बढ़ी
प्रदेश में डोडा पोस्त बंद होने के बाद डोडा पोस्त की तस्करी व अवैध खेती बढ़ी है। इसी सिलसिले में जैसलमेर में भी बड़ी संख्या में अवैध पौधे मिले हैं। गौरतलब है कि डोडा पोस्त बंद होने के बाद सरकार ने नशा मुक्ति शिविर भी चलाए थे लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। जिसके चलते डोडा पोस्त का सेवन करने वाले अभी भी सेवन कर रहे हैं और उन्हें अवैध रूप से डोडा पोस्त मिल भी रहा है।
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