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14 साल पहले झूठा मुकदमा कराने का मामला, केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह ने जमानत कराई

पुलिस इंस्पेक्टर के बेटे पर तेजाब डालने की धमकी देने का आरोप लगाया था, पुलिस ने झूठा मान एफआर लगाई थी

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 08:00 AM IST
Union Minister Gajendra Singh got bail in one case

मामला: पुलिस इंस्पेक्टर के बेटे पर तेजाब डालने की धमकी देने का आरोप लगाया था, पुलिस ने झूठा मान एफआर लगाई थी
हुआ क्या : कोर्ट सालों से समन जारी करती रही, तामील ही नहीं हुए इसलिए पेश नहीं हुए। वकील ने अंडरटेकिंग दी तो पेश होना पड़ा
आगे क्या : 10 हजार रुपए का जमानती मुचलका भरा, 30 जून को फिर पेश होना होगा, एफआईआर झूठी साबित हुई तो हो सकती है 6 माह की सजा

जोधपुर. करीब चौदह साल पहले एक पुलिस इंस्पेक्टर के बेटे के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत सोमवार को कोर्ट में पेश हुए और अपनी जमानत कराई। दरअसल यह मामला तत्कालीन इंस्पेक्टर सत्यमणि तिवारी के बेटे समर्थ तिवारी और एक लड़की के बीच हस्तक्षेप करने का है। शेखावत की समर्थ तिवारी से बहस हुई फिर शेखावत ने उसके खिलाफ शराब के लिए पैसे मांगने व तेजाब डालने की धमकी देने का मुकदमा शास्त्रीनगर थाने में दर्ज कराया था। शेखावत के आरोपों को पुलिस ने झूठा मान कर एफआर लगा दी थी। कोर्ट ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने के लिए शेखावत के खिलाफ आईपीसी की धारा 182 में दर्ज इस्तगासे पर प्रसंज्ञान ले लिया और उन्हें कई सालों से तलब करता रहा, लेकिन समन तामील ही नहीं होते थे इसलिए वे पेश ही नहीं हुए। पिछली पेशी पर उनके वकील ने अंडरटेकिंग दी तो इस मामले में पहली बार उनको महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 8 में पेश होना पड़ा और 10 हजार रुपए का जमानत मुचलका पेश किया। कोर्ट ने मुचलका स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 30 जून को मुकर्रर की और उस तारीख पर उन्हें हाजिर रहने के भी निर्देश दिए हैं।

क्या है मामला
- केंद्रीय राज्य मंत्री शेखावत ने 12 फरवरी 2004 को एक नागरिक की हैसियत से शास्त्रीनगर थाने में रिपोर्ट दी कि शास्त्रीनगर के सी सेक्टर में मैसर्स ड्रीम टीम नेटवर्क साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड स्थित है। यहां कंप्यूटर सॉफ्वेयर से संबंधित कार्य होता है।

- शेखावत ने रिपोर्ट में बताया कि समर्थ तिवारी पुत्र सत्यमणि तिवारी जो सरदार क्लब स्कीम में रहता है, उसने उनसे शराब के लिए पांच हजार रुपए मांगे। पैसे नहीं देने पर तेजाब डालने की धमकी दी। इस पर पुलिस ने तिवारी के खिलाफ आईपीसी की धारा 384 व 327 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।


जांच में शेखावत के आरोप झूठे माने
- मुकदमा दर्ज कर जांच तत्कालीन सब इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश को दी। जांच अधिकारी ने गवाहों से तफ्तीश की तो जांच में मामला पूरी तरह से झूठा पाया गया। पुलिस जांच के अनुसार एक युवती जो ड्रीम टीम नेटवर्क के यहां काम करती थी। उसकी समर्थ तिवारी से जान-पहचान थी। युवती दिल्ली से पढ़ाई करके वापस जोधपुर आई तो उसने ड्रीम टीम नेटवर्क जॉइन कर लिया।

- पुलिस के अनुसार दोनों पूर्व में भी बातचीत करते थे। युवती के परिजन उसे समर्थ से बात करने से मना कर चुके थे। इस संबंध में प्रतापनगर थाने में युवती की मां ने मामला भी दर्ज करवाया था। इसके बाद भी जब समर्थ ने युवती से बात करने की कोशिश की तो इस दरम्यान शेखावत से समर्थ की बहस हो गई।

- शेखावत ने समर्थ के खिलाफ शराब के लिए पैसे मांगने व धमकियां देने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करवा दी। झूठी रिपोर्ट लिखवाकर पुलिस का समय जाया करने पर पुलिस ने इस मामले में 20 मार्च 2004 को एफआर लगा दी। साथ ही सीजेएम में कोर्ट में शेखावत के विरुद्ध आईपीसी की धारा 182 के तहत झूठी रिपोर्ट लिखवाने का इस्तगासा दायर किया और कोर्ट ने इस्तगासे पर प्रसंज्ञान ले लिया।

समन तामील नहीं हुआ तो वारंट से बुलाया
- कई साल तक कोर्ट समन से उन्हें तलब करती रही, लेकिन समन तामील ही नहीं हुआ, इसलिए वे पेश नहीं हुए। 6 मार्च 2018 को शेखावत के अधिवक्ता नाथूसिंह राठौड़ ने अंडरटेकिंग दी कि वे अगली सुनवाई पर पेश हो जाएंगे। कोर्ट ने पेश नहीं होने की स्थिति में जमानती वारंट से तलब किया। सोमवार सुबह शेखावत राठौड़ के साथ कोर्ट में पेश हुए।


यह मुश्किल हो सकती है शेखावत को
- आईपीसी की धारा 182, एक जमानती व संज्ञेय अपराध है। किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है। इसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 6 माह का कारावास या 1000 रु. अर्थदंड या दोनों हो सकते हैं। कोर्ट अब इस मामले में शेखावत को आरोप सुना उनका पक्ष जानेगा। अगर शेखावत आरोपों को नकारते हैं व अन्वीक्षा चाहते हैं तो अभियोजन पक्ष एफआईआर को झूठी साबित करने के लिए गवाह पेश कर अपना पक्ष रखेगा। अगर अभियोजन पक्ष एफआईआर झूठी साबित करने पर सफल हो जाता है तो शेखावत के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती है। इस धारा में अधिकतम छह महीने की सजा हो सकती है, हालांकि यह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करेगा।


कानूनी प्रक्रिया थी, उसे पूरी करने कोर्ट में पेश हुआ था। इतना ही कहना है।
- गजेंद्रसिंह शेखावत , केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री ​

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