Hindi News »Rajasthan »Jodhpur »News» Water Crisis In Rajasthan

रात 11 बजे से सुनसान रास्ते पर शुरू होता है पानी तलाशने का सफर, अंत्येष्टि के बाद भी नहाने के लिए नहीं मिलता पानी

47.7 डिग्री तापमान में भास्कर रिपोर्टर पहुंचा चैनपुरिया... चौंकाने वाले मिले हालात

Bhaskar News | Last Modified - May 01, 2018, 07:06 AM IST

  • रात 11 बजे से सुनसान रास्ते पर शुरू होता है पानी तलाशने का सफर, अंत्येष्टि के बाद भी नहाने के लिए नहीं मिलता पानी
    +2और स्लाइड देखें
    गांव में पानी के टैंकर के इंतजार में खड़े ग्रामीण। यहां एक टैंकर आता है, वह भी पूरा नहीं पड़ता।

    बूंदी/सूरतगढ़ (कोटा).पानी की यह कहानी बरड़ इलाके के बंजाराें के गांव चैनपुरिया के हर घर की है। जो शहर से महज 35 किमी दूर है। 450-500 जनों की आबादी वाले इस गांव के बंजारा परिवार की अपनी दास्तां हैं, जिनके लिए पानी का बंदोबस्त गढ़ जीतने से कम नहीं। पथरीले इलाके वाले इस गांव में पहाड़ भट्‌टी की तरह तपते हैं, 47 डिग्री तापमान में भी लोगों ने नहाना छोड़ दिया है। गांव में कोई मर जाए तो दाग के बाद नहाने के लिए पानी नहीं मिलता।

    पीपे लेकर दौड़ते हैं सभी


    कहने को सरकार ने गांव में एक टैंकर लगा रखा है। टैंकर आता है तो बच्चे-बूढ़े-जवान और औरतें मटकी-बाल्टी, पीपे लेकर दौड़ते हैं। दो मटकेभर पानी के लिए गांव उलट पड़ता है, झगड़े शुरू हो जाते हैं। टैंकर से पीने के पानी की जरूरत ही पूरी नहीं होती, अपने मवेशियों के लिए पानी कहां से लाएं? यही वजह है कि मवेशियों को जिंदा रखने के लिए ये परिवार रात-रातभर सफर कर 100-50 लीटर पानी का बंदोबस्त कर पाते हैं। चैनपुरिया के लोग पानी के लिए तीन किमी दूर लक्ष्मीपुरा या भरताबावड़ी जाते हैं। पर वहां के लोग दिन में दूसरे गांववालों को पानी भरने नहीं देते। डांट-डपट कर भगा देते हैं।

    ऐसे में रात 10-11 बजे बाद पानी की तलाश में निकलते हैं। जिनके पास मोटर साइकिलें हैं, वे उन पर, बाकी सिर पर या कांधे पर पानी ढोते हैं। भरता बावड़ी में देव महाराज के स्थान से या लक्ष्मीपुरा में सरकारी मोटर से पानी भरकर लाते हैं। गांव में हर घर में दस-पांच मवेशी है। इसके अलावा भेड़-बकरियां, बेसहारा गायों के झुंड, कुत्ते, बिल्लियां हैं। पानी नहीं मिलने पर प्यासे जानवर तिंवाळे (चक्कर) खाकर गिर जाते हैं, प्राण त्याग देते हैं। गांव के राजू बंजारा के मुताबिक कई परिवार पानी की समस्या के चलते गांव से पलायन कर चुके हैं। अब तक 13 गायों और 7 बछड़ों की प्यास से मौत हो चुकी है। सरपंच से लेकर ग्राम सचिव को पीड़ा पहुंचा दी, पर पानी का बंदोबस्त नहीं हुआ है।

    पानी के 2 किस्से

    - रात 10-11 बजे का वक्त, सुनसान रास्ता, जहरीले, जंगली जानवरों का डर...। जयसिंह बंजारा पत्नी राधाबाई, 12 साल की बेटी पूजा, 8 साल के बेटे बलवीर के साथ लकड़ी से कांधे पर लटकाए तेल के पीपे लेकर और सिर पर चरी धरकर खेतों से पैदल पानी की तलाश में निकलते हैं। ढाई-तीन किलोमीटर चलकर यह परिवार लक्ष्मीपुरा या बरदा बावड़ी पहुंचता है, पानी के लिए अपनी बारी का इंतजार करता है। बच्चे सो जाते हैं, मां-बाप केरोसिन की लाइन की तरह पानी की लाइन में लगे बारी का इंतजार करते हैं। बारी आती है तो बच्चों को जगाते हैं। लौटते-लौटते रात के 2-3 बज जाते हैं। रातभर में यह परिवार 80-100 लीटर पानी के लिए 6 किमी सफर करता है। यह इतना पानी है, जितना कि शहर में एक आदमी शौचालय में बहा देता है। अगली रात यह परिवार फिर पानी की तलाश में निकलता है। पानी के जुगाड़ में मजदूरी छूट चुकी है। राधाबाई दहेज में दो गायें लाई थीं, जो बढ़कर 10 हो गई, जिनमें अब दो बची हैं, बाकी प्यासे मर गईं।


    - राजू बंजारा बताते हैं कि महीनेभर पहले 60 साल की मतरीबाई गांव में आए टैंकर से पानी भरते वक्त फिसलकर जान गंवा चुकी है। गांव में कोई आदमी शांत हो जाता है तो दाग देने के बाद लोगों को नहाने के लिए भी पानी नहीं मिल पाता। शादी हो तो बारातियों के नहाने के लिए पानी नहीं मिल पाता। गांव में 300 से ज्यादा पालतू मवेशी हैं, इसके अलावा बेसहारा गायों के झुंड और दूसरे जानवर हैं। हम तो चोरी कर भी पानी पी लें, मवेशियों को कहां से लाकर पिलाएं?

  • रात 11 बजे से सुनसान रास्ते पर शुरू होता है पानी तलाशने का सफर, अंत्येष्टि के बाद भी नहाने के लिए नहीं मिलता पानी
    +2और स्लाइड देखें
    अगली बार पानी का दुरुपयोग करें तो यह फोटो जरूर देख लें

    रोज 4 किमी. चल खेतों से पानी ला रही महिलाएं

    यह तस्वीर सूरतगढ़ की ग्राम पंचायत पदमपुरा की है। जहां 10 दिन से जल संकट बना हुआ है। संकट भी ऐसा कि गांव की तमाम पेयजल डिग्गियां सूख चुकी हैं। लिहाजा गांव की महिलाओं को अब करीब 46 डिग्री तापमान में रोज चार किमी. खेतों में जाकर पानी लाना पड़ता है। वहां भी किसानों ने अपने खेतों में लगा रखे ट्यूबवैल से पानी ले जाने की छूट दे रखी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी संकट पिछले साल भी था। लेकिन तब पेयजल विभाग ने टैंकरों से पानी आपूर्ति करवाई थी, लेकिन इस बार तो जलदाय विभाग का कोई अधिकारी ही नहीं पहुंचा। भास्कर ने अधिकारियों से बात की तो उनका कहना था कि नहरबंदी के चलते यह परेशानी बनी हुई है।

  • रात 11 बजे से सुनसान रास्ते पर शुरू होता है पानी तलाशने का सफर, अंत्येष्टि के बाद भी नहाने के लिए नहीं मिलता पानी
    +2और स्लाइड देखें
    थर्मल में तो महज 15 मिनट सप्लाई

    सूरतगढ़ के गांवों के साथ-साथ पानी संकट थर्मल तक पहुंच गया है। हालात यह हो गए हैं कि पहले पानी 1 से 2 घंटे के लिए आता था, जो अब 15 मिनट हो गया है। दिक्कत यह भी है कि 15 मिनट का कोई समय भी निर्धारित नहीं है। इस संकट के बीच सबसे बड़ी परेशानी पशुओं को झेलनी पड़ रही हैं। उन्हें पिलाने के लिए भी गांवों में अब पानी नहीं बचा है।

Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Jodhpur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Water Crisis In Rajasthan
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×