जोधपुर / 1971 युद्ध में सीमा पर तैनात रहे विंग कमांडर नंदा की स्कूटी टूटी रोड पर फिसली; बस ने कुचला, मौत



सुरेंद्रकुमार नंदा वकील भी थे और रिटायरमेंट के बाद 30 साल से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे। सुरेंद्रकुमार नंदा वकील भी थे और रिटायरमेंट के बाद 30 साल से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे।
हादसे में नंदा के पैर इस कदर कुचल गए कि देखकर चश्मदीदों की भी रूह कांप गई। हादसे में नंदा के पैर इस कदर कुचल गए कि देखकर चश्मदीदों की भी रूह कांप गई।
सड़क आधी से ज्यादा सड़क पर ऐसे ही गिट्‌टी बिखरी पड़ी है। ऊबड़-खाबड़ यह सड़क वाहनों का संतुलन बिगाड़ हादसों का सबब बनती है। सड़क आधी से ज्यादा सड़क पर ऐसे ही गिट्‌टी बिखरी पड़ी है। ऊबड़-खाबड़ यह सड़क वाहनों का संतुलन बिगाड़ हादसों का सबब बनती है।
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सुरेंद्रकुमार नंदा वकील भी थे और रिटायरमेंट के बाद 30 साल से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे।सुरेंद्रकुमार नंदा वकील भी थे और रिटायरमेंट के बाद 30 साल से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे थे।
हादसे में नंदा के पैर इस कदर कुचल गए कि देखकर चश्मदीदों की भी रूह कांप गई।हादसे में नंदा के पैर इस कदर कुचल गए कि देखकर चश्मदीदों की भी रूह कांप गई।
सड़क आधी से ज्यादा सड़क पर ऐसे ही गिट्‌टी बिखरी पड़ी है। ऊबड़-खाबड़ यह सड़क वाहनों का संतुलन बिगाड़ हादसों का सबब बनती है।सड़क आधी से ज्यादा सड़क पर ऐसे ही गिट्‌टी बिखरी पड़ी है। ऊबड़-खाबड़ यह सड़क वाहनों का संतुलन बिगाड़ हादसों का सबब बनती है।

  • निगम बोला- एनएच को पेचवर्क के पैसे दिए, राेड उन्हें बनानी थी
  • एनएच का तर्क: पैसा ट्रांसफर नहीं हुआ, वैसे राेड के टेंडर ताे किए

Dainik Bhaskar

Jun 29, 2019, 02:27 AM IST

जोधपुर. एयरफोर्स गोल्फ कोर्स स्कीम निवासी रिटायर्ड विंग कमांडर सुरेंद्रकुमार नंदा (82)। शुक्रवार शाम संतोषी माता मंदिर दर्शन करने स्कूटी पर निकले थे। लेकिन रातानाडा में गड्ढाें काे भरकर बनाई अधूरी सड़क और बिखरी गिट्‌टी ने उन्हें पहले तो लाचार और लहूलुहान किया। फिर इन जख्मों ने उनकी जान ही ले ली।

 

रातानाडा थाने के सामने बुरी तरह बिखरी सड़क और गिट्टी पर नंदा संतुलन नहीं बना पाए। उनकी स्कूटी ऊबड़-खाबड़ सड़क और बिखरी गिट्‌टी पर स्लिप हुई। वे खुद भी सड़क पर गिरे, पीछे से आ रही बस ने नंदा काे चपेट में ले लिया। पहिए नंदा के पैराें काे कुचलते और मांस के लाेथड़े और खून बिखेरते निकल गए। सड़क पर बिखरे मांस के लाेथड़े, लहूलुहान लेकिन हाेश में राेड पर पड़े नंदा काे देखकर चश्मदीदों और राहगीरों की चीखें निकल गईं। कुछ लोग व पुलिस ने उन्हें टैक्सी में एमडीएम हॉस्पिटल ले गए। वहां उनकी गंभीर स्थिति देखकर एम्स रेफर किया गया। वहां रात 10 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।


नंदा एयरफोर्स में रहते तो देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तनकर अपने पैराें पर खड़े रहे। लेकिन, विभागों की लापरवाही से जानलेवा हुई सड़क पर संतुलन नहीं बना पाए। नंदा ने खुद तो देशसेवा की ही, उन्होंने प्रेरित कर बेटे व पाेते काे भी देशसेवा में ही भेजा। बेटे राकेश नंदा ग्रुप कैप्टन से हाल ही में रिटायर हुए हैं। जबकि उनके पाेते ऋषभ नंदा लेफ्टिनेंट हैं।

 

ठेका फर्म, नगर निगम व एनएच की लापरवाही ने ली जान
रातानाडा से भाटिया चौराहा जाने वाली सड़क पर कई दिनों तक सीवरलाइन बिछाने का काम चला। इसके लिए एक साइड के ट्रैफिक को भी लंबे समय तक बंद रखा गया। सीवर लाइन के काम के तहत सड़क को खोदा गया। गड्‌ढों को तो गिट्‌टी-मिट्‌टी डालकर बंद कर दिया गया। ना ताे इसकी लेवलिंग की अाैर ना ही इस पर सड़क बनाई। आधी क्षतिग्रस्त इस सड़क पर आवागमन खोल दिया गया। यह काम नगर निगम की ओर से ठेका फर्म लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया। 

 

इस बारे में नगर निगम के एक्सईएन आलोक माथुर से पूछने पर वे बोले- रोड कटिंग व पेचवर्क के पेटे नेशनल हाईवे के खाते में हमने तो 14 लाख रु. जमा करवा दिए। अब रोड की मरम्मत तो उन्हें ही करनी थी। इस पर भास्कर ने एनएच के एसई जीआर जीनगर से रोड नहीं बनाने का पूछा। वे बोले- निगम ने पैसे तो दे दिए, लेकिन यह रकम हमें केंद्र सरकार से ट्रांसफर नहीं हुई। अब हमने टेंडर तो कर दिया है।

 

इसी लापरवाही और टालमटोली में सड़क बदहाल रही और इसका खामियाजा नंदा ने भुगता। शहर में ऐसी कई सड़कें हैं, जो आनेवाली बारिश में कहर ढा सकती हैं। जिम्मेदारों ने इन्हें समय पर नहीं ठीक किया तो फिर ऐसा हादसा हो सकता है।

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