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वन्यजीवों की प्यास बुझाने जंगल के टांकों में टैंकर से डाल रहे पानी, बारिश तक चलेगी मुहिम

भास्कर संवाददाता| भगवानपुरा गर्मी में पीने के पानी के लिए भटककर रहे वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए एक भामाशाह...

Dainik Bhaskar

Apr 30, 2018, 04:45 AM IST
वन्यजीवों की प्यास बुझाने जंगल के टांकों में टैंकर से डाल रहे पानी, बारिश तक चलेगी मुहिम
भास्कर संवाददाता| भगवानपुरा

गर्मी में पीने के पानी के लिए भटककर रहे वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए एक भामाशाह आगे आए हैं। पानी की तलाश में आए दिन वन्य जीव आबादी क्षेत्र के आसपास पहुंच जाते हैं।

इस पर समाजसेवी देवीलाल मेघवंशी ने जंगल में खाली पड़े टांकों में टैंकरों से पानी डालना शुरू कर दिया। मोड़ का निंबाहेड़ा से गागलास गांव के बीच करीब 9 किलोमीटर में सैकड़ों बीघा में फैले जंगल में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए समाजसेवी मेघवंशी ने यह पहल की है।

रूरल अवेयरनेस सोसायटी ने वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए टांकों में पानी की व्यवस्था शुरू की। सोसायटी के निदेशक मंडल के सदस्य देबीलाल मेघवंशी ने बताया कि मोड़ का निंबाहेड़ा से गागलास के बीच स्थित जंगल में वन्य जीवों के लिए टैंकर से पानी डलवाया जा रहा है। चिह्नित स्थानों पर बारिश होने तक पानी डलवाया जाएगा।

पानी की तलाश में आबादी में आते पैंथर, इसलिए जंगल में ही पहुंचा रहे पानी


भास्कर संवाददाता| भगवानपुरा

गर्मी में पीने के पानी के लिए भटककर रहे वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए एक भामाशाह आगे आए हैं। पानी की तलाश में आए दिन वन्य जीव आबादी क्षेत्र के आसपास पहुंच जाते हैं।

इस पर समाजसेवी देवीलाल मेघवंशी ने जंगल में खाली पड़े टांकों में टैंकरों से पानी डालना शुरू कर दिया। मोड़ का निंबाहेड़ा से गागलास गांव के बीच करीब 9 किलोमीटर में सैकड़ों बीघा में फैले जंगल में वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए समाजसेवी मेघवंशी ने यह पहल की है।

रूरल अवेयरनेस सोसायटी ने वन्यजीवों की प्यास बुझाने के लिए टांकों में पानी की व्यवस्था शुरू की। सोसायटी के निदेशक मंडल के सदस्य देबीलाल मेघवंशी ने बताया कि मोड़ का निंबाहेड़ा से गागलास के बीच स्थित जंगल में वन्य जीवों के लिए टैंकर से पानी डलवाया जा रहा है। चिह्नित स्थानों पर बारिश होने तक पानी डलवाया जाएगा।

करेड़ा, आसींद व आसपास के क्षेत्रों में कई बार पानी की तलाश में भटकते हुए पैंथर आबादी क्षेत्र में घुस आए हैं। गत दिनों एक पैंथर आबादी क्षेत्र में दिखा तो ग्रामीणों ने उस पर लाठियों से वार कर घायल कर दिया था। समाजसेवी मेघवंशी ने बताया कि पैंथर व अन्य वन्य जीव पीने के पानी की तलाश में आए दिन गांवों में घुस आते हैं। कई बार लोगों पर हमला कर देते हैं। इस कारण जंगल के टांकों में टैंकरों से पानी डालना शुरू कर दिया है। जंगल में पीने का पानी मिल जाएगा तो वन्य जीव आबादी क्षेत्र में नहीं आएंगे।

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