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नियमों की बाध्यता के कारण खरीदारों के न आने से शिवरात्रि पशु मेले में घटी रौनक

एक ओर जहां सरकार में किसानों व पशुपालकों को रियायत देने की कई घोषणाएं की है वहीं नियमों की बाध्यता के कारण जिला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 02:35 AM IST

एक ओर जहां सरकार में किसानों व पशुपालकों को रियायत देने की कई घोषणाएं की है वहीं नियमों की बाध्यता के कारण जिला मुख्यालय पर रियासतकालीन पशु मेले में इस बार पशुओं की आवक में आई कमी और खरीददारी के लिए व्यापारियों के नहीं आने से पशु पालक परेशान है। इधर न्यायालय के आदेशों के कारण व्यापारी भी पशु मेले में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।

पशु पालकों ने बताया कि वे सात-आठ दिन से अपने पशुओं को लेकर आए हैं लेकिन पशुओं की बिक्री नहीं हुई। राज्य स्तरीय शिवरात्रि पशु मेले में लगातार पशुओं की आवक में कमी आती जा रही है। इसका मुख्य कारण उच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए आदेश है। जिसमें साफ तौर पर पशु मेले में पशु खरीदने आने वाले व्यापारी से दस्तावेज मांगे जाते हैं। उन दस्तावेजों की पूर्ति व्यापारी नहीं कर पा रहा है एवं व्यापारी द्वारा छोटी उम्र के पशुओं की मांग अधिक है जबकि 3 साल या उससे कम उम्र के गोवंश की खरीद फरोख्त पर न्यायालय ने पाबंदी भी लगा रखी है।

करौली. शिवरात्रि पशु मेले का ड्रोन कैमरे से लिया गया दृश्य। (फोटो : अंशज गुप्ता)

वर्षवार मेले में आने वाले पशुओं का आंकड़ा

वर्ष गोवंश भैंस ऊंट अश्व बकरा/बकरी भेड़ कुल

2016 4501 11 1501 76 37 0 6126

2017 3433 58 966 139 63 3 4689

2018 3060 58 364 02 5 0 3432

इन नियमों का पालन जरूरी

संयुक्त निदेशक डॉ. भागीरथ लाल मीना ने बताया कि उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार जो पशु पालक मेले में पशु खरीदेगा उसे मेला अधिकारी अथवा उसके द्वारा मनोनीत अधिकारी को क्रेता को स्वयं के नाम जमाबंदी की नकल कृषि भूमि होने बाबत दस्तावेज, क्रेता द्वारा क्रय किए गए पशुओं को कृषि कार्य या दूध उत्पादन में उपयोग में लेने का शपथ पत्र देना, क्रेता को क्रय किए गए पशु की ईयर टैग लगवाना एवं पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करवाना आवश्यक है। इसी के साथ पशु परिवहन के उपयोग में आने वाले बड़े ट्रक में 6 बड़े पशु से अधिक नहीं होने चाहिए और वाहन में पशुओं के पैरों के नीचे कुशन एवं साइडों में बोरी या टाट लटकाने होगे ताकि पशुओं की खाल नहीं छिले। पशु परिवहन के समय वाहन के साथ पशुओं की देखभाल चारा पानी के लिए श्रमिक सहायक के रूप में चलना होगा, पशुओं का लदान एवं उतार ढलान वाले रैम्प पर करना होगा, पशु परिवहन के दौरान परिवहन नियमों का पालन पशुपालकों एवं परिवहन कर्ताआें को करना होगा।

बाध्यता : राज्य से बाहर के लोग नहीं खरीद सकते ऊंट

मेले में ऊंट खरीदने आए तहसील वाह जिला आगरा निवासी छोटे खां, फिरोजाबाद जिले निवासी श्रीकिशन, मध्यप्रदेश के सीताराम वरोठा, फिरोजाबाद के सुरेश चन्द आदि ने बताया कि वह पशु मेले में ऊंट खरीदने के लिए आए हैं लेकिन पशु पालन विभाग द्वारा राजस्थान के बहार ऊंट को बेचने पर पाबंदी लगा रखी है।

हताशा : गलैंडर रोग के कारण घोड़ों को लाने पर रोक

पशु पालन विभाग ने पशु मेले में राज्य के बाहर के अश्व एवं राजस्थान के धौलपुर, अजमेर, राजसमंद एवं उदयपुर के आने वाले अश्व को करौली पशु मेले में नहीं आने के लिए पाबंद किया है। इसका मुख्य कारण यहां के अश्वों में गलैंडर रोग का होना है। अगर इन जिलों के अलावा भी किसी अन्य जिले का अश्व मेले में आता है तो उसकी जांच कर सिरम लैब में जांचने के लिए भेजा जाएगा। इसके चलते इस बार मेले में अश्व पालक नहीं आए है। जिसके चलते अश्व प्रेमी भी निराश लौट रहे हैं।

कोर्ट के निर्देशानुसार खरीदने में मुश्किलें

उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पशु खरीदना मुश्किल है। वहीं ऊंट राजस्थान के बाहर नहीं जा सकता वह राजकीय पशु है। साथ ही राज्य के बाहर के घोड़ों तथा राजस्थान के चिन्हित जिलों के घोड़ों के मेले में आने पर प्रतिबंध लगाया गया है। जिसका मुख्य कारण वहां के घोड़ों में गैलेंडर नामक रोग का होना है। डॉ. सुशील कुमार रस्तोगी, अतिरिक्त निदेशक, क्षेत्र भरतपुर

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