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संकल्प रैली में जा रहे पायलट के काफिले को सवर्ण समाज ने दिखाए काले झंडे

कार्यालय संवाददाता | हिंडौन सिटी एससी-एसटी एक्ट के विरोध कर रहे सवर्ण समाज के लोगों ने मंगलवार को कांग्रेस...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 03:00 AM IST
कार्यालय संवाददाता | हिंडौन सिटी

एससी-एसटी एक्ट के विरोध कर रहे सवर्ण समाज के लोगों ने मंगलवार को कांग्रेस संकल्प रैली में शामिल होने जा रहे नेताओं के काफिलों को काले झंडे दिखाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। चौपड़ सर्किल पर एकत्र हुए लोगों ने वोट फोर नोटा के नारे लगाए। दोपहर करीब एक बजे जब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट एवं अशोक गहलोत के काफिले ने हिंडौन में प्रवेश किया तो काले झंडे दिखाकर विरोध कर रहे सवर्ण समाज के लोगों को पुलिस एवं पायलट समर्थकों ने दूर किया। इस बीच पुलिस सुरक्षा में सचिन पायलट एवं अशोक गहलोत के काफिले को करौली के लिए आगे निकाला गया। सवर्ण संघर्ष समिति के ललित चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि जब वे शांतिपूर्ण विरोध व्यक्त कर रहे थे तो कुछ कांग्रेस पदाधिकारियों ने उन पर लाठियां भांजी और पथराव कर दूर किया। इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गया।

पुलिस और कांग्रेसियों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे

कांग्रेस की संकल्प रैली में शामिल होने जाने वाले नेताओं को काले झंडे दिखाने के लिए मंगलवार को सुबह 9 बजे ही काफी लोग चौपड़ सर्किल के पास लाइनबद्ध तरीके से एकत्र हो गए। इस दौरान काफी पुलिस के जवान भी तैनात थे। सुबह 9 बजे से ही सवर्ण समाज के लोग नेताओं को काले झंडे दिखाना शुरु हो गए, लेकिन झगड़े की स्थिति उस समय बनी जब पायलट एवं गहलोत के काफिले को काले झंडे दिखाना शुरु किया तो पायलेट समर्थक एवं पुलिसकर्मी सचेत हो गए। पायलट समर्थकों ने काले झंडे दिखा रहे लोगों को दूर किया। जिस पर सवर्ण और ओबीसी वर्ग के लोगों ने पुलिस और कांग्रेसियों के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस घटना के बीच पुलिस सुरक्षा के बीच पायलट एवं गहलोत के काफिले को सुरक्षित आगे निकाला गया।

प्रदर्शनकारियों को हटातेे पुलिस एवं पायलट समर्थक

हिंडौन सिटी. कांग्रेस की संकल्प रैली को काले झंडे दिखाते सवर्ण समाज के लोग।

दो दिन पूर्व बैठक कर लिया था निर्णय

एससीएसटी एक्ट के मामले में किसी भी राजनीतिक पार्टी की ओर से आवाज नहीं उठाने को लेकर सवर्ण आैर ओबीसी समाज आंदोलित हैं। हिंडौन में इन लोगों ने 6 सितंबर को हिंडौन के बाजार बंद रखकर राजनीतिक पार्टियों की अस्थि कलश यात्रा भी निकाली थी और कहा था कि चुनावों में नोटा पर बटन दबाया जाएगा। इसके अलावा 9 सितंबर को ब्राह्मण धर्मशाला में बैठक कर निर्णय लिया था कि 11 सितंबर को कांग्रेस रैली में शामिल होने जाने वाले नेताओं को काले झंडे दिखाए जाएंगे। इसके अलावा 22 को प्रस्तावित अमित शाह के आगमन पर उनका भी विरोध किया जाएगा।