सिलिकोसिस बीमारी से बचाव के लिए बनाया धूल नियंत्रण औजार

4 वर्ष पहले
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करौली | रोजी-रोटी के लिए खानों में धूल फांकने वाले श्रमिकों में खनन कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल से सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी रौद्ररूप ले रही है। खान मजदूरों की इस पीड़ा को दूर करने के लिए डांग विकास संस्थान, करौली के कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार शर्मा ने जुगाड़ कर एक खास औजार बनाया है। यह देशी टूल खान मजदूरों में काम के दौरान उड़ने वाली धूल से बचाव में कारगर साबित हो रहा है। करौली सहित अजमेर व भीलवाड़ा की खानों में हाल ही इस टूल का डेमो किया गया, जो खान श्रमिकों को खासा रास आया है। हालांकि, खान विभाग ने भी सुरक्षित खनन के लिए मास्क व गीली ड्रिल पद्धति अपनाने पर विशेष बल दिया।

गौरतलब है कि खान व अन्य कारखानों में उड़ती धूल श्वसन के साथ फेफड़ों तक पहुंचने से श्रमिकों में सिलिकोसिस जैसी बीमारी निरंतर पैर पसार रही है। हालांकि, सरकार ने सिलिकोसिस रोगियों के स्वास्थ्य जांच के लिए खनन बहुल जिलों में विशेष कैंप तथा न्यूमोकॉनियोसिस बोर्ड भी बनाए हैं। राज्य के प्रमुख चार जिलों करौली, धौलपुर, दौसा व भरतपुर में खनन श्रमिकों, खनन श्रमिक विधवाओं, निर्माण श्रमिकों, क्रेशर पर कार्य करने वाले श्रमिकों के अधिकारों, आजीविका विकास कौशल, अधिकारिता व व्यवसायिक स्वास्थ्य पर उभर रहे खतरे तथा सिलिकोसिस जैसे गंभीर मुद्दों पर डांग विकास संस्थान, करौली (एनजीओ) विशेष रूप से कार्य कर रहा है।



संस्था के प्रयासों से राज्य सरकार द्वारा इन जिलों में करीब 40 करोड़ रुपये की राशि प्रभावित मजदूरों को दिलवायी जा चुकी है। राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को खान कल्याण मंडल गठन के लिए संगठित मांग उठाई जा रही है।

धूल नियंत्रण के लिए तैयार किया टूल

डांग विकास संस्थान के सचिव डॉ.विकास भारद्वाज के मार्गदर्शन में कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार ने खान में काम करने पर उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए धूल नियंत्रण औजार (टूल) तैयार किया है। खान मजदूरों को इस टूल का उपयोग करने का खदानों में पहुंचकर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। करौली,धौलपुर,भरतपुर, अजमेर व भीलवाड़ा जिले के खान मजदूरों को इसका उपयोग करने का प्रशिक्षण का डेमो भी दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि संस्था द्वारा इससे पहले भी श्रमिकों को सुरक्षित खनन प्रविधि का कार्य भी बताया गया, लेकिन अपेक्षित सकारात्मक परिणाम नहीं मिल सके। खान विभाग द्वारा मास्क वितरण तथा संस्था द्वारा निजी स्तर पर सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष कार्यक्रम किए जाते रहे हैं।

इस प्रकार से तैयार किया टूल

राजेश शर्मा ने बताया कि इस टूल के तहत खानों में श्रमिक जो बडी टांकी से खराद का काम करते हैं। उस टांकी में लोहे की एक खास क्लिप लगाई गई है,जिसमें फोम लगाया है। श्रमिक जब खनन कार्य करता है तो इस फोम को गीली कर लेता है,इससे खनन की उड़ने वाली धूल इस फोम पर चिपक जाती है, इससे श्वसन के दौरान श्रमिक इस खतरनाक धूल से बच जाता है। यह टूल विशेषकर मैन्युअल माइनिंग वर्क में उपयोगी है। यहां श्रमिक 4-4 इंची के छेद इस टांकी द्वारा ही करते हैं। हालांकि, गीली छेदन प्रणाली अपनाते हैं तो श्रमिक को पत्थर की चिकनाई से काम करने में दिक्कत होती है। जबकि इस टूल से काम करने में ज्यादा आसानी है। यह टूल देसी तकनीक से बना है,इसकी क्लिप खोलकर फोम बदली या सफाई कर पुन: लगाई जा सकती है। डेमो के दौरान जब इस टूल की फोम को श्रमिक ने 8 घंटे काम करने के दौरान बीच में करीब 6 बार धोया तो साफ बाल्टी के पानी में काफी धूल नीचे जमा हो गई। इससे यह टूल सस्ता,सुलभ व उपयोगिता के हिसाब से वरदान साबित होगा। 30-35 प्रतिशत तक धूल से बचाव होने से सिलिकोसिस जैसी बीमारी से बचाव तथा श्रमिक की स्वास्थ्य जीवनीय शक्ति भी बढ़ेगी।

देसी औजार मजदूरों को आया रास

प्रशिक्षण से पूर्व संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा खानों में जाकर इस औजार का डैमो किया गया तो खान मजदूरों को यह खासा रास आया है। इस टूल की सस्ती विधि और उपयोगिता की सराहना श्रमिकों द्वारा की गई है। राजस्थान के खनन बहुल जिलों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। संस्था के दक्ष प्रशिक्षक डांग विकास संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार ने 24 व 25 अक्टूबर को सॉफ्ट सेंड स्टोन की खदानों में अजमेर व भीलवाड़ा (बिजौलिया) के खान मजदूरों को प्रशिक्षण दिया। इस टूल की उपयोगिता से खनन के दौरान उड़ने वाली धूल से नियंत्रण होता है।

टूल से 35% तक धूल से बचाव संभव

यह देसी टूल इस्तेमाल करने से मजदूरों में सिलिका की 30 से 35 प्रतिशत तक धूल को रोकने में सहायक है। इससे मजदूरों में होने वाली सिलिकोसिस बीमारी के बचाव के साथ स्वास्थ्य लाभ व जीवनीय शक्ति में बढ़ोतरी होगी।



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खनन श्रमिकों में उड़ती धूल से बढ़ती सिलिकोसिस बीमारी से बचाव के लिए डांग विकास संस्थान के कार्यक्रम समन्वयक राजेश कुमार ने कम खर्चे में बनाया धूल नियंत्रण औजार-करौली, धौलपुर, दौसा, भरतपुर, अजमेर व भीलवाड़ा की खानों में श्रमिकों को इस टूल का डेमो आया रास, टूल तैयार करने की विधि भी सीखी

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