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डांग क्षेत्र में भगवान भरोसे हो रही है बच्चों की पढ़ाई

सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर सरकार के दावे भले ही बड़े-बड़े हो लेकिन सच्चाई यह है कि खुद...

Danik Bhaskar | Sep 11, 2018, 04:50 AM IST
सरकारी स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर सरकार के दावे भले ही बड़े-बड़े हो लेकिन सच्चाई यह है कि खुद सरकार की अनदेखी के चलते स्कूली शिक्षा का ढांचा चरमराता दिख रहा है। इसका कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।

करणपुर कस्बे के राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई तो भगवान भरोसे चल रही है। स्कूल में यूं तो शिक्षकों के 20 पद स्वीकृत है लेकिन मात्र 4 शिक्षक के भरोसे ही विद्यालय संचालित है। करणपुर डांग क्षेत्र में ऐसे कई माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं जहां कहीं एक तो कहीं तीन शिक्षकों के भरोसे विद्यालय चल रहे हैं। वाणिज्य, राजनैतिक विज्ञान व हिन्दी व्याख्याता के अलावा किसी भी विषय का अध्यापक नहीं है। यहां तक कि शारीरिक शिक्षक का पद भी डेढ़ माह से रिक्त चल रहा है। प्रधानाचार्य घनश्याम सैनी का तबादला मंगलवार को करौली डाइट में कर दिया एेसे में यहां अब प्रधानाचार्य का पद भी रिक्त हो गया है।

पंचायत सहायक के भरोसे 170 बच्चे

कक्षा 1 से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए तृतीय श्रेणी का एक भी अध्यापक नहीं है। एेसे में अकेले पंचायत सहायक अशोक गुप्ता के जिम्मे ही बच्चे पढ़ते हैं। इतना ही नहीं पोषाहार का जिम्मा भी गुप्ता के ही पास है। जिन्हें करीब डेढ़ साल से भुगतान भी नहीं मिला है।

शिक्षकों के पद नहीं भरे तो प्रदर्शन

शिवचरण दीक्षित, भैरो लाल पहाड़िया, रमेश बैरवा, राजू गुप्ता आदि ने बताया कि बिना शिक्षकों के बच्चे पढ़ाई में पिछड़ रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार व शिक्षा विभाग से स्कूल में जल्द रिक्त पड़े हुए पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है और साथ ही चेतावनी भी दी है कि यदि सात दिनों मे शिक्षकों के रिक्त पद नहीं भरे गए तो आंदोलन को मजबूर होंगे।

कौनसा पद कब से रिक्त

गणित विषय का 2 माह से, विज्ञान का 1 माह से, अंग्रेजी का 1 साल से, संस्कृत का 1 साल से, 1 माह से पद से रिक्त चल रहे हैं।

मेरा तो अब तबादला हो चुका


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