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आंगनबाड़ी सहायिका की फरवरी 2013 में हुई थी नियुक्ति, 7 साल में ही कर दिया सेवानिवृत्त
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही का एक और मामला सामने आया है।आंगनबाड़ी सहायिका रेशम बाई मीना को उसके विभाग ने 43 साल की उम्र में ही 17 साल की और शेष बची नौकरी पूरी होने से पहले ही 60 साल की होने का हवाला देकर सेवानिवृत्ति करने के आदेश जारी कर दिया। आदेश पढ़ते ही सहायिका की पैरो तले की जमीन खिसक गई और अपने दस्तावेजों को लेकर चक्कर लगा रही है। वह बोली कि मैं तो अभी 43 साल की हुई हूं। मेरे पिता की भी 60 साल की उम्र नहीं हुई।
करणपुर मंे 29 फरवरी को महिला पर्यवेक्षक ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की बैठक ली। उसमें जब कानरदा निवासी सहायिका रेशम बाई मीना की कार्यकर्ता द्वारा अपनी उपस्थिति रिपोर्ट बैठक में दी गई तो उन्होंने रिपोर्ट लेने से इंकार कर दिया और उन्हें विभाग से सेवानिवृत्ति होने का हवाला दिया।
आंगनबाड़ी सहायिका रेशम बाई मीना ने मंडरायल कार्यवाहक सीडीपीओ कन्हैया लाल वर्मा को आवेदन सौंप कर जन्म तिथि सही करने की मांग की। उन्होंने मामले की जांच करने के आदेश दिए हैं।
रेशम बाई मीना की जन्मतिथि 1 जनवरी 1978,
विभाग ने 17 साल पहले ही बता दी 60 साल की
महाराजपुरा ग्राम पंचायत अन्तर्गत कानरदा गांव निवासी रेशम बाई मीना ने 13 फरवरी 2013 को सहायिका के पद पर उसके गांव मे ही नियुक्ति मिली थी और वह अब तक अपनी 43 साल की उम्र मे करीब 7 साल की नौकरी कर चुकी है, लेकिन महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी ने उसकी 60 साल की नौकरी पूरी होने से 17 साल पहले ही सहायिका को सेवानिवृत्ति होने के आदेश जारी कर दिए जबकि रेशम बाई मीना की जन्मतिथि 1 जनवरी 1978 है।
नियुक्ति के समय दिए दस्तावेजों की जांच करेंगे
विभाग का रिकाॅर्ड की जांच करके ही पता चलेगा कि सहायिका ने ड्यूटी जॉइनिंग के समय अपनी उम्र के क्या दस्तावेज लगाए थे। विभाग के आदेश अनुसार सेवानिवृत्ति हो चुकी हैं।
रंजना देवी, महिला पर्यवेक्षक, करणपुर