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बच्चे कला के प्रति जागरूक हों इसलिए स्कूलों में बनाते थे पेंटिंग व स्कल्प्चर म्यूरल

एक वर्ष पहले
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पुराने समय में पहले मिट्टी के बर्तन बनाए जाते थे। दीवारों पर अलग-अलग तरह के चित्र बनाने में भी इसका इस्तेमाल हाेता था। क्योंकि पहले घरों काे सजाने के लिए पर्याप्त सामान नहीं होता था, तो गांव की औरतें कच्ची मिट्टी से बनी दीवारों पर गोबर, चाक, मिट्टी आदि के लेप से ही अपनी सभ्यता को, आम जीवन को दीवारों पर बना दिया करती थी। इस कला को म्यूरल पेंटिंग या भित्ति चित्रकला कहा जाता है। मिट्टी से बनाई जाने वाली म्यूरल आज भी छत्तीसगढ़ के कुछ गांव में देखने को मिलती है। यह सब बताया शहर के ही शिल्पकार राजेन्द्र कुमार ने। बोले कि म्यूरल लैटिन शब्द म्यूरस से बना है। म्यूरस का अर्थ ही होता है दीवार और इस कला को दीवारों के जरिए ही समाज तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में 2008 में एडमिनिस्ट्रेशन की पहल से कुछ सरकारी स्कूलों में म्यूरल तैयार किए गए। लेकिन करीब 2012 से इनपर काम नहीं हुआ क्योंकि सरकार की अाेर से अागे कोशिश नहीं की गई। आर्टिस्ट डॉ. विशाल भटनागर, आर्टिस्ट सुभाष शौरी, आर्टिस्ट जगदीप जौली और मैंने मिलकर तीन स्कूलों में म्यूरल बनाए हैं। हम चाहते हैं कि सरकार एक बार फिर से कला को बच्चों तक पहुंचाने के लिए मुहिम चलाए ताकि म्यूरल से स्कूल की दीवारों के साथ बच्चों का दिमाग भी खूबसूरत हो सके। आर्टिस्ट सुभाष शौरी ने कहा कि किसी भी कहानी या संदेश देने का जरिया होते हैं म्यूरल। इतिहास की बात की जाए तो किसी सभ्यता का रहन सहन दीवारों पर इन्हीं के जरिए दर्शाया जाता रहा है। अजंता गुफाओं में तो आज भी म्यूरल के जरिए जातक कथाओं का वर्णन होता है। अगर इनके जरिए बच्चे कला के प्रति जागरूक होते हैं या सर्वशिक्षा अभियान का संदेश उन तक पहुंचता है तो इससे बेहतर ओर क्या हो सकता है। आर्टिस्ट जगदीप जौली ने बताया कि म्यूरल दो तरह के होते हैं- पेंटिंग म्यूरल और स्कल्प्चर म्यूरल। पेंटिंग
म्यूरल में तो दीवार पर पेंट किया जाता है। स्कल्प्चर म्यूरल में मूर्ति बनाई जाती है जिसकी केवल तीन साइड दिखती है। एक साइड दीवार से जुड़ी होती है।

_photocaption_जीएमएसएसएस-53*photocaption*

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_photocaption_गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंड्री स्कूल, सेक्टर-10*photocaption*

_photocaption_गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंड्री स्कूल, सेक्टर-47*photocaption*

कला से रूबरू होने का इंट्रस्टिंग तरीका

आर्टिस्ट डॉ विशाल भटनागर ने बताया कि जब फार्मर यूटी डीपीआई एसके सेतीया ने चंडीगढ़ के बच्चों को कला से जोड़ने के लिए आर्टिस्ट की मीटिंग बुलाकर सुझाव मांगे तो मैंने म्यूरल पेंटिंग का आइडिया दिया। कॉन्सेप्ट पसंद आया तो सबसे पहला म्यूरल गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-47 में बनाया गया। मैंने, सुभाष शौरी और राजेन्द्र कुमार ने मिलकर यह बनाया। दूसरा गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंड्री स्कूल, सेक्टर-10 और तीसरा गवर्नमेंट मॉडल स्मार्ट स्कूल, सेक्टर-53 में जगदीप जौली ने भी साथ मिलकर तैयार किया। इसका ख्याल मुझे इसलिए आया क्योंकि बच्चे जब आते-जाते कुछ रोज देखते हैं तो उसका असर दिमाग पर ज्यादा होता है।

Mural Painting
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