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शाम होते ही पुलिस के गायब होने से पटियाला चौक पर लग रहा लंबा जाम
एमसी और ट्रैफिक पुलिस को मिलकर करना होगा काम...
जीरकपुर मंे रात 8 बजे के बाद ट्रैफिक पुलिस नहीं होती है। न ही ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए थाने की पुलिस यहां तैनात रहती है। इसका असर यहां पटियाला और पंचकूला के चौराहे पर पड़ता है। ट्रैफिक पुलिस के जाते ही सड़क पर गाड़ियां आपस में उलझी हाेती हैं। लेागों को जीरकपुर के इस िहस्से से निकलने में ही एक घंटा लग जाता है। अक्सर रात को यहां रात 9 बजे ट्रैफिक जैसे हालत बन जाते हैं। लोगों ने जब ट्रैफिक पुलिस को संपर्क किया तो जबाव िमला कि अब उनकी ड्यूटी समाप्त हो गई है।
अब थाने की पुलिस यहां ट्रैफिक संभालेगी। यह एक दिन का काम नहीं है। रोजाना यही हाल हो रहा है। रात को दोनों चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट्स अगर बंद हो जाएं तो यहां हालत और भी बिगड़ जाती है। पटियाला चौक पर चारों ओर से ट्रैफिस आामने-सामने आ जाता है। काफी दूर तक गाड़ियांे की लाइन लग जाती है। लोगांे की मांग है कि रात के समय जीरकपुर में इन दो चौराहों पर जीरकपुर थाने की पुलिस की जीप तैनात रहनी चािहए। इनमें करीब तीन पुलिस कर्मी भी मौजूद होने चाहिए। इसके अलावा इन दोनों चौराहों पर लगी ट्रैिफक लाइट्स भी बंद नहीं होनी चाहिए। ट्रैफिक लाइट्स के िलए यहां पावर बैकअप का भी इंतजाम होना चाहिए। स्थानीय निवासी मनोहर शर्मा ने कहा कि रात को यहां आकर पुलिस को पहले इस जगह का ट्रैिफक सुचारु करना चाहिए। उसके बाद यहां सड़क पर ट्रैफिक की हालत क्या होती है, यह देखी जा सकती है। रविवार रात यहां काफी देर तक ट्रैफिक प्रभावित रहा। करीब एक घंटे तक सर्विस लेन पर गािड़यों की लंबी लाइन लगी रही। न तो यहां उस समय ट्रैिफक पुलिस थी और न थाने की ही पुलिस यहां आई। लोग गाड़ियांे में परेशान रहे। किसी ने जल्दी जाना होता है तो यहां आकर उसकी सारी प्लानिंग खराब हो जाती है। यहां रात को इन दोनों चौराहों पर पुलिस की
ड्यूटी चाहिए। इधर, विनोद कुमार का कहना है रात 10 बजे तक ट्रैिफक का पीक ऑवर्स होते हैं। जीरकपुर में दोपहर बाद 5 बजे से लेकर रात 10 बजे तक ट्रैिफक का दबाव बढ़ जाता है। यहां तीन जगहों से ट्रैिफक आता है। रात को यहां ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए पुलिस का होना जरूरी है।
यहां ट्रैफिक जाम का एक बड़ा कारण यह है कि रात को पुलिस और एमसी का डर नहीं होता है। सड़क का आधा हिस्सा अवैध तरीके से काबिज हो जाता है। एक लेन पर ट्रैिफक की जगह रेहड़ियां होती है। इससे भी यहां ट्रैफिक जाम हो जाता है। थाने की पुलिस को यहां चौराहों पर तो तैनात रहना ही चाहिए। इसके अलावा इस तरह की अवैध एन्क्रोचमेंट करने वालों को भी यहां रोकना चाहिए। पुलिस अगर कुछ दिन इस तरह सख्ती दिखाएगी तो इससे सड़क पर चलने वाले ट्रैफिक को जगह मिलेगी। पुिलस और एमसी इस मामले में एक जुट होकर भी कार्रवाई कर सकती है। सड़क पर जगह मिलेगी तो ट्रैफिक जाम होने के आसार कम होंगे। अमित कुमार, स्थानीय निवासी
लोगांे को यहां रात के समय ट्रैफिक जाम की समस्या से गुजरना होता है। इसका कोई हल िनकाला जाना चाहिए। िदन में ट्रैफिक पुलिस होती है। रात को कोई भी मुलाजिम यहां हाईवे पर नजर नहीं आता है।
अशोक कुमार, स्थानीय निवासी
लोगों ने कहा, जीरकपुर एमसी, ट्रैफिक पुलिस और जीरकपुर थाने की पुलिस को यहां एक ज्वाइंट वेंचर कर यहां ट्रैफिक के िलए मुश्किल पैदा कर रहे कारणाें को खत्म कर देना चाहिए। पुलिस की यहां पक्की ड्यूटी चाहिए। रात के समय यहां किसी प्रकार की भी घटना हो सकती है। जाम लगने के बाद यहां खुलवाने के लिए तुरंत पुलिस बल की आवश्यकता होती है। अगर सड़क पर उस समय कोई पुिलसकर्मी तैनात ही नहीं होगा तो यहां लोग जाम में फसंगे ही। ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी भी बढ़ानी चाहिए। जीरकपुर में दोनों चौराहों पर ट्रैिफक निकलने के लिए सड़क पर भी सिस्टम ठीक नहीं है। यहां आमने-सामने सड़कें नहीं हैं। पटियाला चौक, के-एरिया चौक व पंचकूला चौक तीनों ही जगहों पर ट्रैफिक के हिसाब से प्लािनंग नहीं है। इसमें बदलाव की जरूरत है। इसके साथ ही यहां रात के समय पुलिस का होना जरूरी है। लोगों को ट्रैफिक जाम होने से ज्यादा नुकसान होता है। दुकानदारों की दुकानदारी प्रभावित होती है। ट्रैफिक जाम का समाधान होना चाहिए।