मी लॉर्ड! करौली पुलिस ने ही दुष्कर्म पीड़ित परिवार का नाम उजागर किया

Karoli News - कानून की पालना कराने का जिम्मा निभाने वाली पुलिस की करौली में बड़ी चूक हुई है। पोक्सो एक्ट में दर्ज एक प्रकरण में...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 09:10 AM IST
Karauli News - rajasthan news i39m lord karauli police exposed the name of the victim39s family
कानून की पालना कराने का जिम्मा निभाने वाली पुलिस की करौली में बड़ी चूक हुई है। पोक्सो एक्ट में दर्ज एक प्रकरण में दुष्कर्म पीडित बच्ची एवं नाबालिग आरोपी के नाम व पता उजागर करने का मामला सामने आया है। दरअसल, करौली पुलिस ने अपने फेसबुक पर अधिकृत करौली पुलिस एकाउंट पर डेढ़ माह पहले एक पोस्ट डाली है, जो सीधे तौर पर पोक्सो रूल्स के खिलाफ व कानून का उल्लंघन करने वाली है। करीब डेढ़ माह पूर्व तत्कालीन एसपी के हवाले से पुलिस टीम की उपलब्धि के साथ सार्वजनिक की गई एफआईआर अब कानूनन गलफांस बन सकती है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं पॉक्सो एक्ट के अनुसार दुष्कर्म पीड़िता व नाबालिग आरोपी की पहचान उजागर करना कानूनन गलत है। यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों की पहचान उजागर करने वाले शख्स/संस्थान के खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पॉक्सो) एक्ट 2012 की धारा 23 के तहत आपराधिक केस भी दर्ज किया जाता है। बच्चों समेत यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की पहचान गुप्त रखने वाले कानूनी प्रावधानों के बावजूद यहां स्थानीय पुलिस ने दुष्कर्म पीड़िता की पहचान उजागर कर किशोर न्याय अधिनियम का उल्लंघन किया है।

29 मई को यह पोस्ट की सार्वजनिक

करौली पुलिस ने अपने फेसबुक पेज करौली पुलिस पर 29 मई, 2019 को अपराह्न 12.44 बजे ‘9 माह की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 12 घंटे के अन्दर किया दस्तयाब’ शीर्षक वाली सूचना सार्वजनिक रूप से पोस्ट की। जिसमें पुलिस ने प्रकरण का 24 घंटे के अन्दर अनुसंधान पूर्ण कर न्यायालय में चालान पेश करने की विशेष जानकारी दी। फेसबुक पेज पर पोस्ट के अनुसार तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रीति चन्द्रा के हवाले से मामले का विस्तृत खुलासा भी किया। जिसके अनुसार थाना सूरौठ के गांव जटनंगला की सनसनीखेज घटना के मुताबिक 9 माह की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले 15 वर्षीय आरोपी दोनों की नामजद, जाति व पिता के नाम सहित जानकारी दी गई। पुलिस की यह सार्वजनिक पोस्ट अभी भी पेज पर प्रदर्शित है। जिस पर कई लोगों ने लाइक व कमेंट्स भी दिए हैं।

क्या था मामला

दरअसल, 27 मई 2019 को गांव जटनंगला के एक 22 वर्षीय पिता ने थाना सूरौठ में एक रिपोर्ट पेश की थी। जिसमें बताया कि 26 मई को सायं करीब 7.30 बजे उसकी प|ी की गोद से 10 माह की पुत्री को खिलाने व उपहार दिलाने का बहाना कर पडोस का ही एक 15 वर्षीय किशोर अपने घर ले गया था। काफी देर होने पर बच्ची को लेकर घर नहीं आया तो उसकी प|ी (बच्ची की मां) ने जाकर देखा कि वह बच्ची के साथ में जबरदस्ती बुरा काम कर रहा था और बच्ची चिल्ला रही थी। इतने में ही वह आरोपित किशोर भाग निकला। बच्ची को गंभीर हालत में उपचार के लिए हिंडौन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह प्रकरण पोक्सो एक्ट थाना सूरौठ पर दर्ज कर अनुसंधान रूपसिंह, पुलिस निरीक्षक थानाधिकारी, हिंडौनसिटी को सुपुर्द किया।

करौली | करौली पुलिस का फेसबुक पेज। जिस पर दुष्कर्म पीड़ित एवं नाबालिग के नाम उजागर किए गए हैं।

यूनिसेफ की गाइड लाइन में भी नाम गुप्त रखने पर जोर

यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेंस फंड यानी यूनिसेफ ने भी बच्चों पर मीडिया रिपोर्टिंग से संबंधित गाइड लाइन जारी कर रखी है। यूनिसेफ के दिशा निर्देशों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि, यौन शोषण और उत्पीड़न के शिकार बच्चों के नाम गुप्त रखे जाएं। यहां तक कि अगर पहचाने जाने की आशंका हो तो पीड़ित बच्चे से संबंधित तस्वीरों और अन्य सामग्री को भी अस्पष्ट या गुप्त रखा जाए।

पुलिस के फेसबुक पेज पर एक नजर

फेसबुक पर करौली पुलिस के नाम से अधिकृत पेज है। जिसको अभी तक 3.4 हजार लोगों ने लाइक किया है। 29 मई, 2019 को अपराह्न 12.44 बजे ‘9 माह की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 12 घंटे के अन्दर दस्तयाब करने की जानकारी साझा की गई। इस पोस्ट को 102 लाइक, 10 कमेंट्स व दो ने शेयर भी किया है। करीब डेढ़ माह बाद भी यह पोस्ट अभी भी सार्वजनिक है। पुलिस की विभिन्न गतिविधियां, उपलब्धियां सचित्र भी प्रदर्शित हैं।

रेप पीडितों की पहचान गुप्त रखना जरूरी

रेप पीड़ितों की पहचान गुप्त रखने की वजह निजता (गोपनीयता) का अधिकार और यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की समाज में होने वाली बदनामी को रोकना है। यौन शोषण के शिकार लोगों की पहचान उजागर न करने की नीति से पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा होती है। साथ ही यौन शोषण के आरोपी के अधिकार भी सुरक्षित रहते हैं। क्योंकि,इस नीति से आरोपी न सिर्फ मीडिया ट्रायल से बचे रहते हैं, बल्कि निर्दोष साबित होने पर उन्हें समाज में बेवजह की शर्मिंदगी का सामना भी नहीं करना पड़ता है।

नाम उजागर होने से शादी तय होने में अड़चन भी होती है।

संज्ञान ले सकते हैं


छह माह का कारावास


मैंने पेज नहीं देखा


केस दर्ज हो सकता है


X
Karauli News - rajasthan news i39m lord karauli police exposed the name of the victim39s family
COMMENT