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अपणे पैसे लैण जोगी बिजली बी नी महकमे दे कोल...

2 वर्ष पहले
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डेराबस्सी के तहत करोड़ों रुपए का रेवेन्यू जुटाने वाली बिजली विभाग की दोनों सबडिवीजंस के पास बिल जमा करने जितना पावर बैकअप भी नहीं है। बिजली गुल होते ही दोनों सबडिवीजंस के कैश काउंटर्स उनके द्वार तक चलकर आए कस्टमर्स को बिल जमा करने से जबाब दे जाते हैं। टका सा जबाब दिया जाता है कि कंप्यूटर बंद हैं, बिजली आने पर ही बिल जमा होंगे।

ऐसे में गर्मी में दूर दराज से आए सैकड़ों बिजली कस्टमर्स को बिना बिल जमा किए मायूस लौटना होता है। निराश लौटते हुए लोग यही कोसते सुने जाते हैं, अपणे पैसे लैण जोगी बिजली बी नी महकमे दे कोल...। बता दें कि बिजली विभाग की लालडू डिवीजन के तहत डेराबस्सी सबडिवीजन को आगे दो सबडिवीजंस सैदपुरा और मुबारिकपुर में हाल ही में बांटा गया है। इनके दफ्तर भी आबादी से कहीं दूर बरवाला रोड पर हैं। दोनों सबडिवीजंस से करीब 45 हजार बिजली कस्टमर्स जुड़े हैं जिनसे बिजली बिलों के तौर पर करोड़ों रुपए की रेवेन्यू की उगाही होती है। सैदपुरा डेराबस्सी से दो किमी दूर है जबकि मुबारिकपुर कस्बे से मुबारिकपुर दफ्तर पांच किमी दूर है। इनका कार्यक्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों में तो दस से 15 किमी के रेडियस में फैला हुआ है। ऐसे में लोगों को नया कनेक्शन, लोड एक्सटेंशन व बिल भरने आदि जरुरी कार्यों के लिए दूरदराज से सैदपुरा सबस्टेशन पहुंचना पड़ता हैं। हालांकि यहां ऑटो बिल कलेक्शन मशीन भी है जो अक्सर खराब रहती है। ज्यादातर उसे ऑपरेट करने से अंजान हैं या ऑपरेट करने से परहेज करते हैं। दो बिल खिड़कियों पर वे कैश बिल जमा कराने को अधिक प्राथमिकता देते हैं। आठ किमी दूर गांव निंबुआ से आई महिला राजरानी और रामपुर सैनिया से तिलकराज कैश लेकर पैसे जमा कराने आए थे परंतु उन्हें बिजली न होने की वजह से उनका बिल जमा नहीं किया गया। कहा गया कि बिजली आने पर ही जमा होगा। बिजली कब तक आएगी, यह पूछने पर बिल काउंटर पर बैठे कर्मियों ने बेरुखे अंदाज में जबाब दिया कि बिजली महकमे को पूछो, हमें नहीं। ऐसे में लोग इंतजार करने को मजबूर हैं या फिर दोबारा चक्कर काटने को। कई बार घंटो इंतजार के बावजूद भी बिजली नहीं आने से बिल जमा ही नहीं हो पाता और ऐसे हालात आए दिन रहते हैं।

बिजली बैकअप नहीं होने से इमरजेंसी लाइट जलाकर बैठा विभाग का स्टाफ व बिल जमा नहीं होने से वापस जाती महिला।

इन्वर्टर या जेनरेटर के लिए अफसरों से कहा...
मायूस लौट रहे खपतकारों से पूछा तो यह खामी सामने आई। बिल काउंटर पर बिल जमा करने वाले मौजूद महिला और पुरुष कर्मचारी ने बताया कि बिजली न होने पर कंप्यूटर नहीं चलते जिससे बिल जमा नहीं होता। उनसे कहा गया कि बिल काउंटर पावर बैकअप के लिए यूपीएस या इन्वर्टर सुविधा से लैस होने चाहिएं। वैसे भी, महकमा उनके द्वार तक चलकर आए खपतकारों से अपना पैसा लेने के लिए इतनी जहमत तो उठा ही सकता है। जबाब मिला कि अफसरों को कई बार कह दिया, पर कुछ नहीं किया जा रहा। कमरे में पंखा तक बंद है। बिजली आने पर ही बिल जमा होगा। एक्सईएन इंद्रप्रीत सिंह ने कहा कि पावर बैकअप, जेनसेट के प्रबंध करने को सीनियर अफसरों को मांग भेजी जा चुकी है।

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