मूर्ति चोरी के बाद लुप्त हो गई रामजी के मेले की रौनक, मंदिर-धर्मशालाएं खंडहर

Karoli News - रामजी के मेले से कस्बे में आठ दिनों तक चकरी झूला,लोकगीत व सांस्कृतिक कार्यक्रम से आनंद और मौज मस्ती की रौनक मंदिर...

Dec 04, 2019, 10:26 AM IST
रामजी के मेले से कस्बे में आठ दिनों तक चकरी झूला,लोकगीत व सांस्कृतिक कार्यक्रम से आनंद और मौज मस्ती की रौनक मंदिर से चोरी हुई मूर्ति के बाद लुप्त हो गई है और मंदिर परिसर की धरोहर देखरेख के अभाव में मंदिर और धर्मशाला खंडहर में तब्दील होकर ढहने के कगार पर है।

चैत्र माह में राज राजेश्वरी कैला मां के मेले के समापन के बाद दूसरे रोज से ही ग्राम पंचायत की ओर से मेले का शुभारंभ कर दिया जाता और मेला लगने से कई दिन पूर्व से चकरी झूले विभिन्न प्रकार के खिलौने एवं अन्य सामान खरीददारी की दुकाने सजना शुरू हो जाती थी। वही राम रसिया मीणा, सांस्कृतिक गीता, हेला ख्याल की धूम रहती थी मेले में आने वाले सपोटरा,गंगापुर,कैलादेवी व करौली जैसे शहरी क्षेत्रों से लेकर आसपास के गांव के दर्शकगणों की भीड़ उमड़ती थी। जिसनका अतिथि सत्कार ग्राम पंचायत के पंच-पटेल करते थे।

सरपंच सुरेंद्र बैरवा, पूर्व सरपंच सुरेश शर्मा, गिर्राज मीणा व गिर्राज जाट आदि ने बताया कि कस्बे में लगने वाले श्री रामजी के आठ दिवसीय मेले में दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले एवं स्थानीय महिला - पुरुष मेले में होने वाले कार्यक्रमों एवं आकर्षण केंद्रों का लुफ्त उठाते थे। उन्होंने बताया कि कैलादेवी मेले से भी कभी अधिक दर्शकगणों की भीड़ यहां उमड़ती थी। जिससे अलग ही रौनक रहती थी।

स्वयं प्रकट हुई थी रामजी की मूर्ति

उन्होंने बताया कि जहां 17 वर्ष पूर्व मेले का आयोजन होता था। खंडहर राम जी का मंदिर है। वहां भूमि पर अपने पशुओं को चराया करते थे। एक व्यक्ति ने यहां से मिट्टी ले जाने के लिए फावड़े से खुदाई की तो अचानक अंदर से किसी के होने की आवाज सुनाई दी और वह खुदाई करने से रुक गया और ग्रामीणों से यह बात कहीं तो ग्रामीणों ने पहुंचकर खुदाई करना शुरू किया तो मूर्ति दिखाई दी। जिसे निकालकर वही मंदिर बनवाकर स्थापित किया। तभी से यहां मेले का शुभारंभ होना शुरू किया गया। चोरी से पूर्व मंदिर में मूर्ति सायन मुद्रा में स्थापित नीलम की एक क्विंटल से अधिक वजनी स्वयं प्रकट हुई। इससे 40 वर्ष पूर्व श्री राम जी की प्रतिमा को चोर चुरा कर ले गए। उसके बाद मंदिर में पूजा करने वाली पुजारी को कटकड गांव के पास होने का आभास हुआ और ग्रामीण वहां पहुंचे तो उन्हें मूर्ति मिल गई। लेकिन 16 वर्ष पूर्व दोबारा चोरी होने के बाद प्रशासन व ग्रामीणों की लाख कोशिशों के बाद भी कोई सुराग नहीं लग पाया। वहीं मंदिर में दूसरी मूर्ति अपने स्तर पर स्थापना भी नहीं करवाई गई।

रिश्ते होते थे तय

आठ दिवसीय लगने वाले इस मेले में रिश्तेदार, सगे - संबंधी मेले का लुफ्त उठाने आते थे और स्थानीय रिश्तेदारी में कई दिनों तक रिश्तेदारों के यहां रुक कर लुफ्त उठाते और मेला स्थल पर ही अपने बच्चों की सगाई एवं गोद भराई की रस्म व आपस में रिश्ते संबंध तय होते थे। वहीं राम जी के मंदिर से मूर्ति चोरी के के बाद यहां सदियों पूर्व रियासत कालीन आकर्षक मंदिर और दर्जनों से ज्यादा धर्मशालाएं खंडहर में तब्दील होकर ढ़हने के कगार पर पहुंच गई है। जिससे कभी भी कोई हादसा हो सकता है।

चारदीवारी निर्माण करवा दिया


कुडगांव | चोरी के बाद खंडहर होता मंदिर।

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