खरड़ में बिना सेफ्टी इक्विपमेंट्स के ही काम लिया जा रहा बिजली कर्मचारियों से

Karoli News - खरड़ में गत बुधवार रात बिजली लाइन मैन की करंट लग जाने से हुई मौत के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि संबंधित विभाग से...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:05 AM IST
Kariri News - rajasthan news the power workers are being taken without any safety equipment in kharad
खरड़ में गत बुधवार रात बिजली लाइन मैन की करंट लग जाने से हुई मौत के बाद यह बात स्पष्ट हो गई है कि संबंधित विभाग से इम्प्लॉइज का ठेका लेने वाली कंपनी की ओर से इन इम्प्लाॅइज की ओर से किए जा रहे कामों की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। खरड़ में 40 साल के इंदरजीत सिंह बिजली दफ्तर सिटी-1 खरड़ में पिछले 8 साल से कार्यरत थे। वह एक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी था। जिससे बिजली निगम के अधिकारियों की ओर से दायरे से बाहर होकर काम लिया जा रहा था।

यहीं नहीं इस कर्मचारी की जिस समय मौत हुई उस समय इस इम्प्लॉई ने किसी भी प्रकार की सेफ्टी ड्रैस या इक्विपमेंट का इस्तेमाल नहीं किया हुआ था। पैरों में सिर्फ हवाई चप्पल पहने ही उक्त कर्मचारी क्रेन लिफ्ट के जिरिये से करीब 20 फुट ऊंचे बिजली के पोल पर से गुजर रही लाइन के रिपेयर के लिए चढ़ा। जिस समय हादसा हुआ उस समय उसने न तो हाथों में सेफ्टी ग्लवस पहन रखे थे और न ही उसने सेफ्टी बेल्ट बांधी हुई थी और न ही हेलमेट पहना था। यह लापरवाही उसकी मौत की जिम्मेदार भी बनी। हैरानी की बात तो यह रही कि जिस समय लाइनमैन इंदरजीत पोल पर चढ़ा तो उस समय बिजली निगम का अधिकारी जेई मलकीत सिंह मौके पर ही मौजूद थे। बारिश होकर हटी थी, जिस कारण बिजली की तारें भी गीली थी।

लाइनमैन इंदरजीत सिंह की मौत के बाद ठेकेदार का विरोध करते परिवार वाले।

ठेकेदार नहीं रखता कर्मचारियों का ध्यान... यहीं नहीं खरड़ के बिजली निगम की लेबर का कांट्रैक्ट मनोज इलैक्ट्रिकल्स नामक कंपनी के मालिक मनोज को मिला हुआ है। जिसकी ओर से बिजली निगम के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था की जाती है हर बार कांट्रैक्ट पूरा होने के बाद वह कांट्रैक्ट दोबारा से ले पाने में तो निरंतर सफल हो रहा है। लेकिन कर्मचारियों के काम की ओर उसका ध्यान ही नहीं है न ही कंपनी की ओर से इन कर्मचारियों को लाइफ सेविंग सेफ्टी किटें प्राेवाइड करवाई गई हैं। खरड़ में करीब 12 लाइनमैन काम कर रहे हैं लेिकन किसी के पास भी सेफ्टी इक्विपमेंट नहीं हैं। जिसके प्रति न तो प्रशासन गंभीर है और न ही बिजली निगम के अधिकारी। उक्त हादसे के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी देर शाम तक उक्त ठेकेदार मनोज मौके पर नहीं पहुंचा और न ही अन्य कर्मचारयों से हालातों का जायजा लिया। जो कि ठेकेदार के गैरजिम्मेदाराना रवैया को दर्शाता है। जब इस संबंध में एसडीओ बिजली निगम बचित्तर सिंह को पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उक्त लेबर ठेकेदार को लिखित में हिदायतें जारी की हुई हैं कि वह अपने सभी कर्मचारियों को सेफ्टी किट मुहैया करवाए।

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