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पहली बार ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल, मतदाताओं में अपनी पर्ची देखने की रही जिज्ञासा

Karoli News - कार्यालय संवाददाता| करौली/सपोटरा राज्य विधानसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल हुआ। इसके...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:46 AM IST
Karauli News - vvpat for the first time with evm the curiosity to see its slip in voters
कार्यालय संवाददाता| करौली/सपोटरा

राज्य विधानसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल हुआ। इसके प्रति निर्वाचन विभाग ने भी चुनाव से पहले जागरुकता के कई कार्यक्रम भी आयोजित किए। वहीं मतदान के दौरान मतदाता को अपनी पसंद के उम्मीदवार के पक्ष में डलने वाले वोट को वीवीपैट में पर्ची पर देखने की पारदर्शी व्यवस्था को लेकर उत्साह भी नजर आया।

निर्वाचन विभाग की चुनावी व्यवस्था तथा उम्मीदवारों का चुनाव मैनेजमेंट भी अलग-अलग तरीकों का रहा। कई जगह जातिगत वोटर्स में सेंध मारने की कोशिश तो कई सीटों पर निर्दलीय व अन्य प्रत्याशियों के सहारे खुद की नैया पार करने की जुगत भी बैठाई गई। हालांकि, अब मतदान के बाद सभी 44 उम्मीदवारों का भाग्य अब ईवीएम में बंद है, जां 11 दिसंबर को मतगणना के दिन ही सामने आ पाएगा।

2013 के प्रबंधन में बदलाव

वर्ष 2018 के चुनाव में ईवीएम के विपरीत ईवीएम वीवी पैट मशीन के प्रयोग के साथ निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को मतदान के लिए प्रचार प्रसार कर जागरूक किया गया। दूसरी ओर क्षेत्र में प्रत्याशियों के रुपए व शराब बांटने की शंका पर आधा दर्जन जनप्रतिनिधियों के घरों पर दबिश दी गई। लेकिन टीम को कुछ भी नही मिलने पर एक प्रत्याशी द्वारा जिला प्रशासन पर पक्षपात तथा भय का वातावरण बनाने का आरोप लगाया गया। जिसकी क्षेत्र में खासी चर्चा रही।

क्षेत्र के प्रमुख मुद्दे रहे गौण

विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चुनावी भाषण के दौरान क्षेत्र के विभिन्न प्रमुख मुद्दे गौण रहे। करौली विधानसभा क्षेत्र में विकास के मुद्दों से हटकर प्रत्याशियों का जातिगत व क्षेत्रीयता का आधार प्रमुख रहा। हालांकि, प्रत्याशियों ने चुनाव के दौरान जनसंपर्क व रैलियों में आमजन को अपना विजन भी बताया, मगर चुनाव जीतने के बाद वे कितने वादों को पूरा कर दावों पर खरा उतर पाते हैं, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। विधानसभा क्षेत्र सपोटरा आजादी के 70 साल बाद भी विकास के नाम अभी भी पिछड़ा हुआ है। चुनावों के दौरान राजनीतिक पार्टियों के नुमाईंदों द्वारा जनता के बीच विकास के हसीन मुंगेरीलाल के सपने दिखाये जाते है। लेकिन क्षेत्र में औद्योगिक विकास नही होने से लोग कृषि व पशुपालन पर ही निर्भर है।

सिंचाई के साथ काश्तकारों को आधुनिक तकनीकि की खेती, उपज का सही दाम नही मिलने तथा खाद की निरंतर किल्लत की मार झेलनी पड़ रही है। क्षेत्र में दोहरी व खोह लघु सिंचाई परियोजना का कार्य लंबित होने, सपोटरा कस्बे में पानी निकासी व्यवस्था नही होने, क्षतिग्रस्त पाईप लाईनों को बदलने, सपोटरा का नगरपालिका दर्जा, कस्बों में उच्च जलाशयों का अभाव, अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा सुविधा व स्टाफ की कमी, कृषि उपज मंडी, आयुर्वेदिक औषधालय खोलने, यातायात साधनों का अभाव, भूमेन्द्रसागर व वैरूंडा बांध से सिंचाई का पानी नही मिलना, सपोटरा से कैलादेवी व दौलतपुरा के साथ डांग क्षेत्र के तीन दर्जन गांवों में आज तक बिजली नही पहुंचना क्षेत्र का प्रमुख मुद्दा रहा है। हालांकि कुछ प्रत्याशियों द्वारा डांग क्षेत्र के विकास कराने का बखान किया गया। इधर, चुनावी भाषणों में प्रत्याशियों ने एक दूसरे पर असामाजिक तत्वों के संरक्षण, भय व विकास में पक्षपात का जमकर आरोप लगाया।

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