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प्रेम और पराक्रम का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण करते हैं कंस रूपी बुराइयाें का नाश : हरिदास महाराज

शास्त्रीनगर क्षेत्र में चल रही श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में मंगलवार को श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग पर...

Dainik Bhaskar

May 30, 2018, 04:35 AM IST
प्रेम और पराक्रम का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण करते हैं कंस रूपी बुराइयाें का नाश : हरिदास महाराज
शास्त्रीनगर क्षेत्र में चल रही श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव में मंगलवार को श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह प्रसंग पर श्रद्धालु झूम उठे। तिरुपति मार्बल माइंस की ओर से आयोजित भागवत कथा में श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव... कथा परिसर में गूंज उठा। इस अवसर पर श्रीकृष्ण और रुक्मिणी की झांकी सजाई गई।

इस मौके पर आयाेजक परिवार जानादेवी चाैधरी व उनके पुत्र मनीष चाैधरी, माेहित चाैधरी के साथ परिजन मौजूद रहे। कथा में गोवर्धन लीला में श्रीकृष्ण के पराक्रम और ब्रजवासियाें के प्रति प्रेम व अहंकारी देवराज इंद्र काे सीख देने का प्रसंग आया। कथा वाचक महंत हरिदास महाराज मेहरूकलां वाले ने कहा कि श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गाोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियाें के जीवन की रक्षा की। इस अवसर पर श्रीकृष्ण गिरधारी के रूप में प्रकट नजर आए। वहीं महारास के प्रसंग में स्वयं भगवान शिव गाेपी बनकर प्रकट हाेते हैं। कथा वाचक हरिदास महाराज ने कहा कि महारास परमात्मा के मिलन का एेसा महोत्सव है जहां समस्त अहंकार और विकाराें की धूल धुल जाती है और सिर्फ ईश्वर की आस्था का दीपक अपनी राेशनी में श्रद्धालुओं को रोशन कर देता है। एेसे पतितपावन परमात्मा स्वरूप कृष्ण भगवान अपनी इस अनूठी लीला के जरिए प्रेम का संदेश देते हैं। इस दाैरान राधे नाचे, कृष्ण नाचे, नाचे गाेपीजन, मन बन गयाे री सखी मेराे वृंदावन.. जैसे भजनों की प्रस्तुति दी गई। एेसे मुरली बजाई भाेलेबाबा की खोई सुधबुध रे... आदि भजनाें के बीच उल्लास का वातावरण परवान पर चढ़ गया। इस अवसर पर आयाेजक जानादेवी चाैधरी, मनीष चाैधरी व माेहित चाैधरी तथा अागंतुक श्रद्धालुजनाें ने महाआरती में भाग लिया। आयाेजक परिवार द्वारा श्रद्धालुओं काे प्रसाद का वितरण किया गया।

केकड़ी. तिरुपति मार्बल्स द्वारा आयोजित भागवत कथा में मौजूद आयोजक जाना देवी परिवार के प्रतिनिधि।

विनाश का अंत करने के लिए परमात्मा का प्रकट होना जरूरी

कथावाचक हरिदास महाराज ने कहा कि कंस बुराई का प्रतीक है। अहंकार, ईर्ष्या, द्वेषता, स्वार्थ आदि इसी के स्वरूप है जिनके विनाश के लिए परमात्मा का प्राकट्य हाेना होता है। वह कृष्ण रूपी भगवान ही इन विकाराें से मुक्त करके मनुष्य को निर्मल जीवन प्रदान करता है और परमात्मा बनने का माैका प्रदान करता है। उन्हाेंने कहा कि बुराई के नाश का संकल्प लेकर अपने भीतर जाे कृष्ण रूपी परमात्मा है उसका आह्वान करें।

मित्रता की मिसाल के प्रसंग का वर्णन और हवन आज

कथा महोत्सव में बुधवार काे श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता के भावपूर्ण प्रसंग का जीवंत चित्रण के साथ यहां पर वर्णन किया जाएगा। श्रीकृष्ण के प्रेम और मित्रत्व की पराकाष्ठा का यहां पर वृतांत और वर्णन प्रस्तुत किया जाएगा कि किस तरह से उन्हाेंने अपने अभिन्न मित्र सुदामा काे तीनाें लोकों का स्वामी बना दिया। इस अवसर पर पूर्णाहुति पर हवन में आहुतियां दी जाएगी।

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