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प्राकृतिक आहार व देने का विचार ही है असाध्य रोगों का उपचार

असाध्य रोगों के उपचार पर लाखाें रुपए खर्च करने के बावजूद भी क्याें हल नहीं निकल पाता, आखिर क्याें राेग का पूर्ण...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 14, 2018, 04:50 AM IST

प्राकृतिक आहार व देने का विचार ही है असाध्य रोगों का उपचार
असाध्य रोगों के उपचार पर लाखाें रुपए खर्च करने के बावजूद भी क्याें हल नहीं निकल पाता, आखिर क्याें राेग का पूर्ण उपचार और राहत मिल नहीं पाती...इसका सिर्फ एक ही कारण हाेता है वितरण की प्रवृत्ति का नहीं हाेना और तप सेवा व सुमिरन का जीवन में अभाव का होना। यदि यह सध जाए ताे आप स्वयं पाएंगे कि स्वास्थ्य में चमत्कार हाेने लगा है। दरअसल ये राेग जाे प्रकट हाे रहे हैं वे किसी न किसी मानसिक व्याधि के कारण पाेषण पा रहे हैं। इनका उपचार हम दवाओं में लाखों रुपए खर्च करके ढूंढ रहे हैं। यह विचार तप सेवा और सुमिरन समिति द्वारा कटारिया ग्रीन्स में आयाेजित आध्यात्मिक चेतना एवं स्वास्थ्य संवर्धन शिविर में रविवार को प्रमुख वक्ता इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर साइंटिफिक स्प्रिचुअलिज्म मेरठ के डॉ. गोपाल शास्त्री ने व्यक्त किए।

उन्हींने कहा कि यदि तप, सेवा और सुमिरन की साधना काने अपनाकर प्राकृतिक आहार भाेजन पद्धति काे जीवन में शामिल कर लिया जाए ताे देखते ही देखते एेसे गंभीर राेग काफूर हो जाएंगे। एेसे साधकों के कई उदाहरण हैं। क्याेंकि इस साधना काे अपनाकर देने का जाे पवित्र भाव मन में पैदा हाेगा बस इसी भाव के आधार पर भगवत कृपा बरसने लगेगी। लेकिन स्वास्थ्य, द्वेषता और लालचवश व्यक्ति देने में नहीं बल्कि हड़पने और लेने में ही मशगूल हाेना चाहता है। मन की अशांति, नकारात्मक सोच और स्वार्थ की भावना मानसिकता को विकृत बना देती है और रोग को आमंत्रित करती है। फिर व्यक्ति दवाओं के जाल में फंसता है। दवा से कोई निर्णायक समाधान है ही नहीं। शांति, सकारात्मक सोच और परोपकार की भावना न सिर्फ स्वास्थ्य लाभ देती है बल्कि परमकल्याण को उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि रही स्वास्थ्य के लिए भोजन की बात तो भोजन की भूमिका को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां लोगों के मन में हैं। अत्यधिक भोजन इसलिए नहीं करे कि उससे शरीर पुष्ट होगा, बल्कि उपवास शक्तिदायक है। इसलिए उपवास करने का भी नियम नियमित रूप से अपनाना चाहिए। भोजन भी कच्ची सब्जियां, पत्तियों आदि का रस व चटनी आदि को भोजन के रूप में ले तो असल में औषधि का काम हो जाएगा ।

केकड़ी में आध्यात्मिक चेतना और स्वास्थ्य संवर्धन शिविर में कैंसर आदि असाध्य रोगों के उपचार पर चर्चा

केकड़ी. आध्यात्मिक एवं स्वास्थ्य संवर्धन शिविर में सुबह के सत्र में व्यायाम करते साधक।

प्रश्न मंच पर समाधान और अनुभव के चमत्कार

शिविर के दाैरान दाेपहर में प्रश्न मंच आयाेजित किया गया जहां साधकों ने स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न परेशानियाें काे रखा। डॉ. गाेपाल शास्त्री ने एक एक करके साधकाें की परेशानियाें के असल कारण बताए और उनके निवारण की युक्ति बताई। उन्हाेंने रोगों के उपचार के लिए प्राकृतिक औषधी के रूप में संबंधित पेड़ की पत्तियाें का इस्तेमाल करने की बात कही। मीडिया प्रभारी महेंद्र प्रधान ने बताया कि इस अवसर पर भारत विकास परिषद के अध्यक्ष यज्ञनारायण सिंह शक्तावत कैलाश चंद जैन, आनंदी राम सोमानी, शिव कुमार बियाणी, अशोक कुमार पारीक, त्रिलोक मेवाड़ा, डॉ. श्यामा दीदी, नाथू न्याति, गोपाल बियानी, अमित गर्ग, रमाकांत चाैकड़ीवाल ने सेवाएं दी।

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