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मेव मतदाताओं ने बदल दिए किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र में हार-जीत के समीकरण

मतगणना के दौरान शुरुआत में बढ़त बनाने वाली भाजपा किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र में 11154 मतों से चुनाव हार गई। यहां से...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 04:50 AM IST
मतगणना के दौरान शुरुआत में बढ़त बनाने वाली भाजपा किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र में 11154 मतों से चुनाव हार गई। यहां से भाजपा प्रत्याशी डॉ. जसवंत यादव को 66673 व कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव को 77827 वोट मिले। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 14816 मतों से जीत दर्ज की थी। यहां मेव वोट निर्णायक साबित हुआ है। विधानसभा क्षेत्र में यादव वोट कांग्रेस को 40 फीसदी ही माना जा रहा है, जबकि मेव वोट 85 फीसदी कांग्रेस के पक्ष में गया है। क्षेत्र के मतदाताओं में भाजपा से नाराजगी का मुख्य कारण यह रहा कि यहां के विधायक किशनगढ़बास के नगरपालिका बनने के बावजूद पं. दीनदयाल जनकल्याण शिविर में कृषि भूमि पर बनी कॉलोनियों में लोगों को पट्टे नहीं दिला सके। वहीं खैरथल और किशनगढ़बास के बीच 10 किलोमीटर की सड़क पर टोल वसूली को भी विधायक बंद नहीं करा सके। विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की किशनगढ़बास की सभा में मंच से कॉलेज की घोषणा पर भी अमल नहीं हो सका। मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में भी कॉलेज का मुद्दा उठा तो आश्वासन का मरहम लगा दिया गया। लाेगों का कहना है कि विधायक ने खैरथल से एक फिजिशियन को एपीओ तो करा दिया, लेकिन चार साल में खैरथल और किशनगढ़बास के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं ला सके। इससे काफी संख्या में लाेग विधायक से खफा हो गए। हॉस्पिटल में सात साल से सोनोग्राफी मशीन कमरे में बंद है और मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है। प्रदेश में मुख्य खैरथल मंडी के व्यापारियों ने जीएसटी के कारण भी सरकार के खिलाफ रोष रहा है।

कांग्रेस की जीत के कारण

क्षेत्र में कांग्रेस अपने मेव समुदाय के परंपरागत वोट को अपने पक्ष में करने में कामयाब रही है। वहीं क्षेत्र में पट्टे, टोल वसूली और घोषणा के बाद कॉलेज नहीं खुलने की आमजन की नाराजगी को कांग्रेस ने चुनाव में भुनाया है