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अब उपद्रव के विरोध में प्रदर्शन-बंद, हिंडौन में भीड़ ने विधायक व पूर्व मंत्री के घरों में आग लगाई, कर्फ्यू लगा

हिंडौन में विधायक राजकुमारी के घर में आगजनी। महेंद्र चाैधरी भारत बंद के दौरान जोधपुर में सुरक्षा में तैनात...

Danik Bhaskar | Apr 04, 2018, 05:00 AM IST
हिंडौन में विधायक राजकुमारी के घर में आगजनी।

महेंद्र चाैधरी

भारत बंद के दौरान जोधपुर में सुरक्षा में तैनात एसआई ने दम तोड़ा, देशभर में मौतों का आंकड़ा 17 हुआ

जोधपुर में भारत बंद के दौरान हंगामे के बीच मूर्छित हुए उदय मंदिर थाने के एसआई महेंद्र चौधरी का निधन हो गया। उन्हें अहमदाबाद रैफर करने के दौरान कई जगह ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया गया। अहमदाबाद में जांच के बाद चौधरी को मृत घोषित कर दिया गया। उधर, मप्र के भिंड में एक व यूपी में दो घायलों की मौत हुई। देशभर में कुल मौतों का आंकड़ा 17 तक पहुंच गया है।

फैसले पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

केंद्र की मांग - दंगे हो रहे हैं, फैसले पर स्टे लगा दें

नई दिल्ली | एससी-एसटी एक्ट के तहत तत्काल गिरफ्तारी पर रोक सहित अन्य गाइडलाइंस पर रोक लगाने से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। केंद्र सरकार ने दंगों का हवाला देकर कोर्ट से अपने आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हमारा आदेश पढ़ा भी नहीं है। हमें जेलों में बंद निर्दोष लोगों की चिंता है। मामला संवैधानिक है। हमें इससे कोई लेना-देना नहीं कि कोर्ट के बाहर क्या हो रहा है।’ कोर्ट ने सभी पक्षकारों से तीन दिन में लिखित दलीलें मांगी हैं। 10 दिन में दाेबारा सुनवाई होगी। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में सिर्फ केंद्र की पुुनर्विचार याचिका पर सुनवाई होगी, कोई नया पक्षकार शामिल नहीं करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट लाइव : केंद्र की दलीलें और कोर्ट का कड़ा रुख - पढ़ें पेज 4





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--- सुप्रीम कोर्ट लाइव ---


जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने दोपहर बाद 2 बजे सुनवाई शुरू की। पहले केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दलीलें रखीं। पढ़िए सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही लाइव...

केके वेणुगोपाल: कोर्ट के फैसले से देशभर के दलित नाराज हैं। दंगों में 10 से ज्यादा लोग मर चुके हैं। कोर्ट अपने फैसले पर अंतरिम रोक लगाए।

जस्टिस आदर्श गोयल: हम एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं। पर यह देखना होगा कि बेगुनाह को सजा न मिले। सरकार क्यों चाहती है कि जांच के बिना लोग गिरफ्तार किए जाएं। अगर सरकारी कर्मचारी पर कोई आरोप लगाएगा तो वह काम कैसे करेगा? हमने एससी-एसटी एक्ट नहीं बदला, बल्कि सीआरपीसी की व्याख्या की है।

वेणुगोपाल: लेकिन एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में किसी गाइडलाइन की जरूरत ही नहीं है।

जस्टिस गोयल: इस कानून में आरोपों की पुष्टि मुश्किल है। इसलिए गाइडलाइन जारी कीं।

वेणुगोपाल: पीड़ितों को मुआवजा भी एफआईआर दर्ज होने पर ही मिलता है। एफआईआर नहीं होगी तो मुआवजा नहीं दे पाएंगे।

जस्टिस गोयल: पीड़ित बेहद जरूरतमंद है तो एफआईआर के बिना भी जिला मजिस्ट्रेट उसे मुआवजा दे सकता है।

वेणुगोपाल: कोर्ट ने जो सात दिन का वक्त रखा है, उस दौरान पीड़ित को डराया-धमकाया भी जा सकता है।

जस्टिस यूयू ललित: सात दिन का समय अधिकतम है। यह नहीं कहा कि जांच सात दिन में ही पूरी करनी है। यह 15 मिनट, आधा घंटा या एक दिन में भी पूरी हो सकती है। आरोपों की पुष्टि के लिए ही प्रारंभिक जांच का विकल्प रखा है।

वेणुगोपाल: यह एक्ट पहले से ही सशक्त है। इसमें बदलाव की जरूरत नहीं है।

जस्टिस गोयल: सबसे बड़ी खामी यह है कि इस एक्ट में अग्रिम जमानत का विकल्प ही नहीं है। जमानत हर आरोपी का अधिकार है। अगर किसी को जेल भेजते हैं और बाद में वह निर्दोष साबित होता है तो उसके नुकसान की भरपाई नहीं कर सकते। आपके आंकड़े बताते हैं कि कानून का अक्सर दुरुपयोग होता है।

वेणुगोपाल: कई मामलों में दुरुपयोग का पता चला है, मगर उस आधार पर कानून में बदलाव जरूरी नहीं है।

जस्टिस ललित: क्या किसी निर्दोष को पक्ष सुने बिना जेल भेजना उचित है? अगर किसी सरकारी कर्मचारी के साथ ऐसा होता है तो वह काम कैसे करेगा? कानून सजा की बात करता है। गिरफ्तारी जरूरी नहीं।

जस्टिस गोयल: यह अकेला ऐसा कानून है, जिसमें किसी को कानूनी उपचार नहीं मिलता। केस दर्ज होते ही व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज देते हैं। झूठे आरोप लगाकर किसी की स्वतंत्रता छीनने का हक किसी को नहीं दे सकते।

अमरेंद्र शरण (एमिकस क्यूरी): सीअारपीसी भी कहती है कि गिरफ्तारी से पहले जांच करनी चाहिए। प्रावधान भले ही एक्ट के हों, लेकिन प्रक्रिया सीआरपीसी की ही होती है। कोर्ट के गाइडलाइंस से एससी-एसटी एक्ट के केस की जांच, ट्रायल और अन्य न्यायिक प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

जस्टिस गोयल: आरोपी को गिरफ्तार करने की शक्ति सीआरपीसी देती है, एससी-एसटी कानून नहीं। हमने सिर्फ इस प्रक्रियात्मक कानून की व्याख्या की है, एससी-एसटी एक्ट की नहीं। हम हंगामा नहीं चाहते। कोर्ट ने 20 मार्च के आदेश में सिर्फ एससी-एसटी एक्ट के तहत मिली शिकायत की वेरिफिकेशन को कहा था। हत्या या अन्य अपराधों के मामले में यह लागू नहीं हैं।

देश में हिंसा बढ़ा रही भाजपा: पायलट


सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हमें जेलों में बंद निर्दोषों की चिंता

एसआई की मौत की जांच होगी : कटारिया


वायरल सच

सोशल मीडिया का हर झूठ भास्कर ने पकड़ा

सोशल मीडिया में कई फोटो, मैसेज और वीडियो ऐसे वायरल हुए, जिन्होंने हिंसा की आग भड़काई। अब फिर इन्हीं के जरिये इस आग को हवा दी जा रही है। जानिए, इनका सच...

मैसेज : दलितों का आरक्षण छीना जा रहा है।

सच : सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने तो यह कहा है कि एससी-एसटी एक्ट में दर्ज होने वाले केसों में तत्काल गिरफ्तारी करने के बजाय जांच की जाए।

फोटो : पथराव में बच्ची का सिर फूटा।

सच : यह फोटो बिहार के मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर का है। लेकिन कभी हापुड़ तो कभी बांसवाड़ा और कभी कालवाड़ का बताकर वायरल हुआ।

वीडियो : हनुमानजी की फोटो का अपमान।

सच : यह वीडियो दक्षिण भारत में 27 मई 2017 को हुए एक प्रदर्शन के दौरान का है। इसका भारत बंद से कोई लेना-देना नहीं था।

...और फिर फेक मैसेज वायरल

अब 10 अप्रैल को आंदोलन की खबर

सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को आंदोलन का मैसेज चल रहा है। कहा जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट पर कोर्ट के फैसले के समर्थन में यह आंदोलन होगा। हालांकि, किसी भी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।