Hindi News »Rajasthan »Khairthal» 202 साल पुराना है जिले का एकमात्र चित्रगुप्त धर्मराज का मंदिर

202 साल पुराना है जिले का एकमात्र चित्रगुप्त धर्मराज का मंदिर

शहर के हलवाई पाड़ा मोहल्ला में स्थित भगवान चित्रगुप्त धर्मराज महाराज मंदिर जिले के प्राचीन मंदिरों में से एक है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 17, 2018, 05:05 AM IST

शहर के हलवाई पाड़ा मोहल्ला में स्थित भगवान चित्रगुप्त धर्मराज महाराज मंदिर जिले के प्राचीन मंदिरों में से एक है। चित्रगुप्त धर्मराज का जिले में यह एकमात्र मंदिर 202 साल पुराना है। उत्तरमुखी इस मंदिर का निर्माण तत्कालीन अलवर महाराजा के दीवान बिहारीलाल सक्सेना ने कराया था। मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते ही सामने गर्भगृह में भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा के दर्शन होते हैं। चित्रगुप्त की प्रतिमा के एक हाथ में कलम व दूसरे हाथ में बही है। बही में लोगों के जीवन के कर्मों का लेखा-जोखा लिखते हुए प्रतिमा है। मंदिर में स्थापित भगवान चित्रगुप्त की यह प्रतिमा दक्षिण भारत शैली की है, जो काले पाषाण की बनी है। यह प्रतिमा करीब 4 फुट ऊंची है, जो मथुरा से मंगाई गई थी। मंदिर में दाहिनी व बायीं ओर एक-एक बरामदा और बीच में खुला प्रांगण है। इस प्रागंण में कीर्तन, कथा व उत्सव होते हैं। कार्तिक मास की त्रियोदशी को भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने और पत्तल चढ़ाने का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा धर्मराज के निमित पत्तल चढ़ाई जाती और कथा सुनी जाती है। पूरे दिन मंदिर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहता है। इस दिन अलवर जिले के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालु आते हैं।

हाथ में कलम-दवात और बही लिए है भगवान चित्रगुप्त की प्रतिमा, कार्तिक मास त्रियोदशी को चढ़ती है 12-13 हजार पत्तलें

अलवर. हाथ में कलम दवात व बही लिए भगवान चित्रगुप्त।

ये उत्सव भी मनाए जाते हैं मंदिर में

मंदिर में जन्माष्टमी, अन्नकूट महोत्सव, वामन द्वादशी, नरसिंह चतुर्दशी, शरद पूर्णिमा, निर्जला एकादशी, अक्षय तृतीया, रामनवमी पर्व भी मनाया जाता है।

कार्तिक त्रियोदशी को चढ़ती हैं 12-13 हजार पत्तल

मंदिर के पुजारी का कहना है कि शास्त्रानुसार भगवान चित्रगुप्त ब्रह्मा के मानस पुत्र थे। वे धर्मराज के रीडर थे, जो पाप पुण्य का लेखा-जोखा रखते थे। कार्तिक मास की त्रियोदशी (धनतेरस) के दिन पत्तल चढ़ाने का महत्व है। तीन-तीन पाव की 13 पत्तल दान दी जाती हैं। इनमें से एक पत्तल चित्रगुप्त के चढ़ाई जाती है। पत्तल में मिठाई होती है। इसके अलावा वस्त्र, चप्पल, चाकू, छाता, पैन, कॉपी, स्वर्ण के नाम की चने की दाल, मृत्यु के उपरांत भगवान रास्ता दिखाए इसलिए टॉर्च, दैनिक जीवन में काम आने वाली वस्तु चित्रगुप्त को अर्पित की जाती हैं। इस दिन मंदिर में आने श्रद्धालुओं की संख्या का पता इस बात से ही लग जाता है कि प्रतिवर्ष इस दिन 12 से 13 हजार पत्तल चढ़ाई जाती हैं।

पुजारी परिवार वहन करता है खर्चा

मंदिर के पुजारी रामदत्त शर्मा ने बताया कि मंदिर की देखभाल के लिए ट्रस्ट है। यह ट्रस्ट देवस्थान विभाग में पंजीकृत है। मंदिर का संपूर्ण खर्चा मंदिर में आने वाले चढ़ावे व पुजारी परिवार की ओर से वहन किया जाता है।

किशोरी. भागवत कथा के अंतिम दिन गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु व कथा वाचन करते आचार्य।

राम नाम से ही मुक्ति का मार्ग संभव : आचार्य

किशोरी | गांव अजबगढ़ के नरसिंह महाराज के स्थान पर चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन कथा वाचन करते हुए आचार्य साईंराम महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि भागवत सुनने से भगवान की प्राप्ति संभव होती है भागवत सुनने से मनुष्य के ज्ञान की पूर्ति होती है व मनुष्य के विचारों में भी सुखद बदलाव होता है। उन्होंने कहा कि राम नाम से ही मुक्ति का मार्ग संभव है। इस अवसर पर कालिया वध, भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन, गोकुल से भगवान का मथुरा आगमन, कंस का वध, कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के बारे में कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को विस्तार से बताया व कृष्ण-रुक्मणि विवाह की कथा सुनाई व गोवर्धन महाराज की पूजा अर्चना की गई। बुधवार को सुबह 11 बजे पूर्णाहुति के बाद नरसिंह महाराज व दरवाजे वाले हनुमान मंदिर परिसर पर ग्रामीणों के सहयोग से भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पंडित रामबाबू शर्मा, रिंकू शर्मा, लालाराम शर्मा, हरि प्रसाद कालोत, लादूराम, आशीष, विकास मीना, लीलाराम , विपिन शर्मा, लक्ष्मण मीना, गोवर्धन शर्मा आदि मौजूद थे।

भागवत कथा का अायाेजन 19 से

खैरथल | कस्बे में 19 जनवरी से गोसेवार्थ भागवत कथा का अायाेजन किया जाएगा। व्यवस्थापक चंदू आचार्य ने बताया कि कस्बे के भूडावाली में काली माता मंदिर के सामने महंत संजना बाई गोशाला में भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का अायाेजन 19 से 26 जनवरी तक रोजाना दाेपहर 1 से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। कथा का वाचन हेमंत कृष्ण ठाकुर की अाेर से किया जाएगा। कथा शुभारंभ पर 19 जनवरी काे सुबह 10 बजे पुरानी अनाज मंडी स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर से महिलाओं की अाेर से कलशयात्रा निकाली जाएगी।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Khairthal

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×