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चुनाव से पहले अंतिम बजट में अलवर जिले को मिल सकती हैं कई बड़ी सौगातें

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करेंगी। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का...

Danik Bhaskar | Feb 12, 2018, 05:05 AM IST
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करेंगी। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का यह अंतिम बजट है। बीते चार साल के शासन में मेडिकल कॉलेज की घोषणा को छोड़ दें तो अलवर जिले को कुछ खास नहीं मिला। लोकसभा उपचुनाव में हार के बाद अब संभावना है कि इस बजट में जिले के लिए कई बड़ी घोषणाएं की जा सकती हैं। लोकसभा उपचुनाव से पहले भी मुख्यमंत्री ने जिले की लोकसभा की आठ विधानसभाओं में जनसंवाद कार्यक्रम रखे थे। लोगों से वे सीधे रूबरू हुई थीं। राजे ने जनसंवाद कार्यक्रम में जरिए लोगों से उनके क्षेत्र की मांग को पूछा था। उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री ने मुंडावर में एडीजे कोर्ट एवं सरकार की कॉलेज खोलने, सड़क, आरओबी सहित कई घोषणा भी कर दी। इसके अलावा लोकसभा क्षेत्र में सड़कों एवं सीवरेज का काम तेजी से हुआ। सरकार के इन कामों का जनता पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि लोकसभा उपचुनाव में भाजपा करीब दो लाख मतों से हार गई। विधानसभा चुनाव में अब करीब नौ महीने बचे हैं। ऐसे में सरकार अलवर जिले के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकती है। अलवर में दो जिले बनाने की मांग लंबे समय चली आ रही है।

किस विधायक की अपने क्षेत्र में क्या है मांग

रामगढ़ : विधायक ज्ञानदेव आहूजा। नौगांवा कृषि अनुसंधान केन्द्र बंद करने के आदेश पर रोक के साथ वहां कृषि महाविद्यालय खोला जाए। रामगढ़ में कृषि उपज मंडी शुरू की जाए। बड़ौदामेव में कृषि विभाग का सहायक निदेशक कार्यालय खोला जाए। गोविंदगढ़ में पंचायत समिति कार्यालय खोला जाए।

किशनगढ़बास : विधायक रामहेत सिंह यादव। विधानसभा में सरकारी कॉलेज खोला जाए। मुख्यमंत्री जनसंवाद में खैरथल में बाईपास एवं आरओबी की घोषणा हो चुकी है। विधानसभा अलवर ग्रामीण: जयराम जाटव। विधानसभा में पेयजल के लिए बजट। विश्वविद्यालय के भवन की बिल्डिंग तैयार हो। मालाखेड़ा में कन्या महाविद्यालय खोला जाए।

थानागाजी : विधायक एवं मंत्री हेमसिंह भडाना। थानागाजी विधानसभा में 50 करोड़ से अधिक की सड़कों का शिलान्यास किया जा चुका है। जरूरत के हिसाब से समय-समय पर सरकार के पास मांगे भेजी गई। इन्हें पूरा किया गया है।

बानसूर: विधायक शकुंतला रावत। बानसूर में सरकारी कॉलेज एवं नारायणपुर बालिका महाविद्यालय खोला जाए। बानसूर को नगर पालिका का दर्जा दिया जाए।

कठूमर : विधायक मंगलराम कोली। विधानसभा क्षेत्र में सरकारी महाविद्यालय खोला जाए। खेडली में उपतहसील खोली जाए। पेयजल समस्या के निदान के लिए कठूमर विधानसभा को अलग से बजट दिया जाए।

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़: विधायक गोलमा देवी। राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ एवं रैणी में कन्या महाविद्यालय खोले जाएं। पिनान को तहसील बनाया जाए।

14 जुलाई 2014 को पहले बजट में घोषित मेडिकल कॉलेज 4 साल में फाइलों से नहीं निकला बाहर

अलवर | वसुंधरा राजे सरकार के 14 जुलाई 2014 को पहले बजट में जिले के लिए घोषित मेडिकल कॉलेज की एकमात्र बड़ी सौगात 4 साल में धरातल पर नहीं आ सकी है। चार साल में सरकार ने दो जगह जमीन आवंटित तो की, लेकिन मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए अभी तक 189 करोड़ रुपए का बजट आवंटित नहीं किया गया है, जबकि जिला अस्पताल को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन कर ओपीडी समय एक पारी का कर दिया गया है। हालात ये है कि अस्पताल में रोजाना ढाई-तीन हजार मरीज ओपीडी में चिकित्सा परामर्श ले रहे हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज की कमी के कारण उन्हें सुपर स्पेशियलिटी इलाज के लिए जयपुर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं एसएमएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल पर मरीजों का भार बढ़ रहा है। वसुंधरा सरकार ने अपने 2014-15 के पहले बजट में मेडिकल कॉलेज मंजूर कर रामगढ़ के ढाढोली में 8.5 हेक्टेयर भूमि आवंटित की, लेकिन जब सरकार को एमसीआई नियमों की याद आई तो आवंटित भूमि से जिला अस्पताल की भूमि की दूरी नपवाई गई, वह नियमों के मापदंड पर खरी नहीं उतरी। एक किलोमीटर के फेर के कारण इस जमीन का आवंटन रद्द करना पड़ा। इसके बाद दूसरी जमीन की तलाश शुरू हुई और गृह विभाग की एनओसी लेकर जून 2016 में जिला जेल की जमीन में से 4.5 हैक्टेयर भूमि आवंटित कर दी गई। अगस्त 2016 में इस भूमि की चिकित्सा शिक्षा विभाग के नाम लीजडीड भी करा दी गई, लेकिन सरकार अभी तक इस जमीन की चारदीवारी भी नहीं करा सकी है। जब सरकार ने जेल की जमीन पर मेडिकल कॉलेज नहीं बनाया तो एमआईए स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज भवन को लेकर उसे जिला अस्पताल से जोड़कर शुरू करने की योजना बनाई गई, लेकिन यह योजना भी एमसीआई नियमों में 12 किलोमीटर दूरी होने के कारण फेल हो गई, क्योंकि मानक 10 किलोमीटर दूरी के हैं। इनके अलावा ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का पूरा भवन लेकर उसे चलाने के लिए कई बार केंद्र सरकार से बात हुई, लेकिन राज्य सरकार की मेडिकल कॉलेज के बड़े खर्चे और ईएसआईसी कर्मचारियों को कैशलेस इलाज नहीं देने के कारण बात नहीं बन सकी। अब इस 36 एकड़ में बने 800 करोड़ की लागत के ईएसआईसी मेडिकल काॅलेज में केंद्र सरकार की ओर से 50 बैड का हॉस्पिटल शुरू करना प्रस्तावित है। केंद्र सरकार ने भी ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज को अनदेखा कर दिया है। वहीं प्रदेश का मेडिकल कॉलेज सरकार की फाइलों से बाहर नहीं आ सका, जबकि जिले की जनता 4 साल से मेडिकल कॉलेज का इंतजार कर रही है।

अब सरकार ने बजट की घोषणा नहीं की तो अटक जाएगा मेडिकल कॉलेज : प्रदेश सरकार का यह अंतिम बजट है। सरकार ने इस बजट में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए राशि स्वीकृत करने की घोषणा नहीं की तो जिले का यह मेडिकल कॉलेज अटक जाएगा, क्योंकि इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चार साल में हालात ये रहे हैं कि अलवर के मेडिकल कॉलेज को लेकर कोई भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि सरकार के समक्ष मजबूती से वकालत नहीं कर पाए, जबकि प्रदेश में घोषित 7 मेडिकल कॉलेजों में से 6 जिलों भरतपुर, चूरू, डूंगरपुर, बाड़मेर, पाली और भीलवाड़ा में मेडिकल कॉलेज भवन लगभग बन चुके हैं।