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आठों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को मिली बढ़त

अलवर. जीत की खुशी में फूलबाग पैलेस में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह एवं...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 05:35 AM IST

अलवर. जीत की खुशी में फूलबाग पैलेस में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह एवं पूर्व मंत्री दुर्रुमियां। डाॅ. करणसिंह 2009 तक सांसद रहे थे।

अलवर शहर : यहां से उठे विरोध ने िजले में बिगाड़ा भाजपा का गणित

भाजपा को 25457 वोट कांग्रेस से कम मिले

भास्कर संवाददाता | अलवर

अलवर शहर के मतदाताओं ने अपना गुस्सा जाहिर किया और कांग्रेस के डॉ. करण सिंह यादव को 25 हजार 457 वोटों से जीत मिली। करण सिंह को अलवर शहर से 78 हजार 174 वोट मिले जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. जसवंत यादव को 52 हजार 717 वोटों से ही संतोष करना पड़ा। अलवर शहर विधानसभा में कांग्रेस के करण सिंह ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और जीत का यह सिलसिला अंत तक जारी रहा। पहले राउंड में आधे वोटों से बढ़त का चक्र अंत तक नहीं टूटा और जीत के अंतर की दीवार मतगणना समाप्त होते-होते बढ़ती गई और 25 हजार 457 वोटों से भाजपा को करारी हार मिली। किसी भी राउंड में शहर से भाजपा को बढ़त नहीं मिल पाई। शहर से उठा विरोध पूरे जिले से भाजपा का सफाया कर गया। 2014 के आम चुनावों में अलवर शहर से भाजपा प्रत्याशी चांदनाथ को 97 हजार 930 वोट मिले थे, जो इस बार 52 हजार 717 पर सिमट गए।

युवाओं का मतदान के लिए नहीं जाना : उपचुनाव में भाजपा की हार का प्रमुख कारण यह भी रहा कि युवा मतदाताओं ने मतदान में रुचि नहीं दिखाई। उपचुनाव में पंजीकृत आधे युवाओं ने ही मतदान किया। इससे दो बातें साफ हो रही हैं। नोटा काे सबसे ज्यादा वोट जाना युवाओं का रुख मोड़ रहा है और दूसरा निराश होकर वोट देना ही उचित नहीं समझा। अलवर में 18 से 19 वर्ष के 90 हजार 336 युवा मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से वोट डालने के लिए 47 हजार 994 मतदाता ही पहुंचे। इसके अलावा 20 से 29 वर्ष के पंजीकृत 6 लाख 51 हजार मतदाताओं में से करीब ढाई लाख ने ही मतदान किया। इसका सीधा नुकसान भाजपा को हुआ।

प्राइवेट स्कूल संचालकों की अनदेखी : शहर में प्राइवेट स्कूलों के संगठन स्कूल शिक्षा परिवार के प्रदेशाध्यक्ष अनिल शर्मा द्वारा विभिन्न मांगों को लेकर किए गए शक्ति प्रदर्शन को सरकार ने हल्के में लिया। यह विरोध शहर से शुरू होकर पूरे जिले में पहुंचा और लोग संगठित हुए। स्थानीय नेताओं ने संगठन को सही फीडबैक नहीं दिया और नजरअंदाज करते रहे। अंतिम समय में कुछ बात बनी, लेकिन जितनी तैयारी सरकार को हराने की हो चुकी थी, वह समझौते के बाद जिताने में नाकाफी साबित हुई।

क्यों हुई शहर से भाजपा की पराजय

टूटी सड़कें, पानी की समस्या, विधायक के व्यवहार को लेकर व्यक्तिगत रूप से विरोध ईवीएम तक पहुंचा। शहर में सीवरेज के काम के दौरान उड़ती धूल ने भाजपा को नुकसान पहुंचाया। पार्टी के पार्षदों द्वारा क्षेत्र की मांगों को लेकर किए गया प्रदर्शन भी चुनावी हार में देखा गया। व्यापारी वर्ग में भी असंतोष रहा। शहर विधानसभा में हुए ब्राह्मणवाद व कार्यकर्ताओं की अनदेखी का मैसेज जिलेभर में गया और हार का मुंह देखना पड़ा। तमाम रणनीतियों का शहर में बैठकर तय होना, वोटिंग का प्रतिशत कम रहना साफ जाहिर करता है कि लोग मतदान को लेकर उत्साहित नहीं थे। ऐसे में वो वोट डालने ही नहीं गए। लोगों में आक्रोश शहर विधायक की जनसुनवाई का समय भी रहा। क्योंकि 10 बजे बाद लोग किससे मिलें इसका कोई समाधान नहीं था। विधायक की जनसुनवाई 8 से 10 बजे तक रहती थी। नगर परिषद में दखल के बावजूद चेयरमैन की निष्क्रियता, सफाई, कॉलेजों में गुंडागर्दी का माहौल, छात्राओं की असुरक्षा, कॉमर्स कॉलेज को जमीन नहीं मिलना, अलवर अरबन कॉपरेटिव बैंक में लोगों के फंसे पैसे को निकलवाने में विधायक सहित सरकार की निष्क्रियता, शहर में स्थापित प्रारंभिक शिक्षा विभाग की स्कूलों में शिक्षकों का नहीं होना ऐसे बड़े मुद्दे रहे, जिन्होंने हार के अंतर को बड़ा कर दिया। मत्स्य यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग का नहीं बनना, यूनिवर्सिटी में लगातार हुई धांधलियों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना, रिजल्ट सहित ऐसे कई मुद्दे रहे जिन्होंने युवाओं को निराश किया।

शहर विधायक बनवारी लाल सिंघल।

कांग्रेस शहर से क्यों जीती

शहर विधायक से लोगों की नाराजगी, कांग्रेस को लेकर भाजपा द्वारा की गई बयानबाजी ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। इसके अलावा ईएसआईसी हॉस्पिटल का शुरू नहीं होना, लोगों के राशन कार्ड समय पर नहीं बनना, पेंशन बंद हो जाना, पेंशनर्स का दवा के लिए परेशान होना आदि ऐसे कारण रहे जिन्होंने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया।

अलवर. कला कॉलेज में गुरुवार को रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के मतगणना कक्ष में पूर्व जिला प्रमुख सफिया खान मतों की जानकारी लेती हुई।

कला कॉलेज

परिणाम के बाद कला महाविद्यालय में लगे टैंट में मायूस बैठे भाजपा पदाधिकारी।

बहरोड़ : डॉ. जसवंत के बड़े बोल भारी पड़े

भाजपा को 21826 वोट कांग्रेस से कम मिले

भास्कर संवाददाता | अलवर

बहरोड़ विधानसभा से भाजपा को 21 हजार 826 वोटों से शिकस्त मिली है। बहरोड़ में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव को 77 हजार 836 और भाजपा प्रत्याशी को 56 हजार 10 वोट मिले हैं। बहरोड़ स्वयं भाजपा प्रत्याशी डॉ. जसवंत सिंह का निर्वाचन क्षेत्र है, लेकिन यहां से मिली हार के बाद यह साफ हो गया है कि जाति के वोट में जमकर सेंधमारी हुई और कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव ने तमाम चक्रव्यूह को तोड़ते हुए जीत के गणित को बदल डाला। कांग्रेस प्रत्याशी का नाम समय पर घोषित हो जाना, चुनावी सभाओं में डॉ. जसवंत यादव के बड़े बोल, सीवरेज से टूटी सड़कों का आक्रोश बहरोड़ की जनता ने वोट के माध्यम से उतारा। हार के के लिए डॉ. जसवंत यादव के मंत्री बनने के बाद अहंकार बड़ा कारण रहा। पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारना, समर्थकों द्वारा आम लोगों के साथ किए जाने व्यवहार को लेकर भी क्षेत्र में आक्रोश रहा। क्षेत्र में लोगों को 10 लाख के रोजगार का दावा पूरा नहीं होना, मंत्री पद पर चंदा एकत्रित करने की क्षेत्र में बड़ी चर्चा रहना भी हार का कारण रहा। वहीं दूसरी ओर डॉ. करण सिंह को इसका सीधा फायदा मिला। लोगों ने अच्छी छवि के प्रत्याशी का मानस बनाया। डॉ. करण सिंह का टिकट समय से तय होने का फायदा कांग्रेस को मिला

भाजपा में मायूसी

किशनगढ़बास

मेव मतदाताओं ने बदले हार-जीत के समीकरण

नगरपालिका से पट्टे नहीं दिला सके विधायक, न ही 10 किलोमीटर की सड़क पर टोल वसूली रुकी

भास्कर संवाददाता | अलवर

मतगणना के दौरान शुरुआत में बढ़त बनाने वाली भाजपा किशनगढ़बास विधानसभा क्षेत्र में 11154 मतों से चुनाव हार गई। यहां से भाजपा प्रत्याशी डॉ. जसवंत यादव को 66673 व कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव को 77827 वोट मिले। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 14816 मतों से जीत दर्ज की थी। यहां मेव वोट निर्णायक साबित हुआ है।

विधानसभा क्षेत्र में यादव वोट कांग्रेस को 40 फीसदी ही माना जा रहा है, जबकि मेव वोट 85 फीसदी कांग्रेस के पक्ष में गया है। क्षेत्र के मतदाताओं में भाजपा से नाराजगी का मुख्य कारण यह रहा कि यहां के विधायक किशनगढ़बास के नगरपालिका बनने के बावजूद पं. दीनदयाल जनकल्याण शिविर में कृषि भूमि पर बनी कॉलोनियों में लोगों को पट्टे नहीं दिला सके। वहीं खैरथल और किशनगढ़बास के बीच 10 किलोमीटर की सड़क पर टोल वसूली को भी विधायक बंद नहीं करा सके। विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की किशनगढ़बास की सभा में मंच से कॉलेज की घोषणा पर भी अमल नहीं हो सका। मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम में भी कॉलेज का मुद्दा उठा तो आश्वासन का मरहम लगा दिया गया। लाेगों का कहना है कि विधायक ने खैरथल से एक फिजिशियन को एपीओ तो करा दिया, लेकिन चार साल में खैरथल और किशनगढ़बास के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं ला सके। इससे काफी संख्या में लाेग विधायक से खफा हो गए। हॉस्पिटल में सात साल से सोनोग्राफी मशीन कमरे में बंद है और मरीजों को प्राइवेट सेंटरों पर जांच करानी पड़ रही है। प्रदेश में मुख्य खैरथल मंडी के व्यापारियों ने जीएसटी के कारण भी सरकार के खिलाफ रोष रहा है।

कांग्रेस की जीत के कारण : मेव समुदाय को पक्ष में किया

क्षेत्र में कांग्रेस अपने मेव समुदाय के परंपरागत वोट को अपने पक्ष में करने में कामयाब रही है। वहीं क्षेत्र में पट्टे, टोल वसूली और घोषणा के बाद कॉलेज नहीं खुलने की आमजन की नाराजगी को कांग्रेस ने चुनाव में भुनाया है

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