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निजी स्कूल की बसाें का बाराताें में हाे रहा है इस्तेमाल, प्रशासन माैन

खैरथल | कस्बा सहित अासपास के क्षेत्र में बारात काे लाने ले जाने के उपयाेग में निजी स्कूलाें की बसाें का धड़ल्ले से...

Danik Bhaskar | Feb 18, 2018, 05:40 AM IST
खैरथल | कस्बा सहित अासपास के क्षेत्र में बारात काे लाने ले जाने के उपयाेग में निजी स्कूलाें की बसाें का धड़ल्ले से उपयाेग किया जा रहा है। इसे प्रशासन देखकर भी माैन है। शनिवार काे फुलेरा-दाेज के अबूझ सावे पर अनेक स्थानाें पर बारात के लिए निजी स्कूल बसाें का उपयाेग हाेते हुए देखा गया। विभागीय नियमानुसार स्कूल बसाें का उपयाेग केवल स्कूल के लिए ही किया जाना चाहिए तथा पीले रंग में स्कूली वाहनाें का हाेना जरूरी है। बावजूद इसके अनेक स्कूल संचालक स्कूली नियमाें का पालन नहीं करते हुए अपने स्कूली वाहनाें काे पीले रंग में नहीं करके उनकाे स्कूली उपयाेग के साथ अन्यत्र व्यावसायिक उपयाेग में भी ले रहे हैं।

बारात में क्याें करते है स्कूलाें की बसें : बारात में स्कूलाें की बसें अाैर अन्य बसाें की अपेक्षा काफी कम कीमत में हाे जाती हैं जिससे बारात वालों की पहली पसंद स्कूली बसाें काे करना हाेता है। इधर स्कूल संचालकाें की बसें स्कूल समय के बाद खाली खड़ी रहती है जिसके चलते स्कूल संचालक भी अतिरिक्त कमार्इ के चक्कर में स्कूल बसाें काे बाराताें में भेज देते हैं। उपराेक्त कारणाें के चलते अधिकतर स्कूल संचालकाें की बसें सावाें के समय में बुक रहती हैं।

काॅमर्शियल बस वाले रहते है परेशान : स्कूल बसाें का बारात के रूप में उपयाेग हाेने के कारण काॅमर्शियल बस वाले काफी परेशान है। काॅमर्शियल बस वालों ने बताया कि स्कूल बसाें के बाराताें में जाने के चलन के कारण उनके व्यवसाय पर काफी विपरीत असर पड़ रहा है। उन्हाेंने बताया कि कमार्इ का दाैर केवल सावाें के समय में ही रहता है। एेसे में स्कूल संचालक अपनी बसाें काे कम किराये में विभागीय नियमाें की अवहेलना कर बाराताें में भेज देते है जिसके कारण या ताे ग्राहक उनके पास अाते ही नहीं है अाैर अाते है ताे काफी कम मार्जन मनी में अपनी बसें भेजनी पड़ती हैं।