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जातिगत समीकरणों ने बदला 4 विधानसभा क्षेत्रों का चुनावी मिजाज

लोकसभा उप चुनाव की रिपोर्ट-सीधे मैदान से

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 26, 2018, 05:40 AM IST


लोकसभा उप चुनाव की रिपोर्ट-सीधे मैदान से

भाजपा में सीएम खुद संभाल रही हैं चुनाव प्रचार की कमान

विजय यादव | अलवर

लोकसभा सीट के 4 विधानसभा इलाकों अलवर शहर, ग्रामीण, रामगढ़ एवं राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में जातिगत समीकरणों ने चुनाव का मिजाज बदल दिया है। 36 बिरादरी को साथ लेकर चलने की बात करने वाली पार्टियों ने उपचुनाव में जातियों के हिसाब से नेताआें को प्रचार में उतारा है। इस बार प्रचार का तरीका भी बदला हुआ है। नेताओं की बड़ी जनसभाएं कम देखने को मिल रही हैं। दोनों पार्टियों के नेता डोर-डू-डोर कैंपेन और रोड शो के जरिए ताकत दिखाने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद उपचुनाव की कमान संभाले हुए है।

राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों और संगठन के प्रांतीय व केंद्रीय पदाधिकारी अलवर में डेरा डाले हुए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने ताकत झोंकी हुई है। अलवर शहर, ग्रामीण एवं राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में राजघराने का प्रभाव रहा है। ऐसे में इस चुनाव में असल परीक्षा भाजपा विधायकों के साथ जितेंद्र सिंह की भी होगी। इन 4 विधानसभा क्षेत्रों में बड़ा वोट बैंक मेव, एससी, मीणा, माली, जाट, पुरुषार्थी, वैश्य समाज व गुर्जरों का है। 4 विधानसभा क्षेत्रों से 3 में भाजपा के विधायक हैं। राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में राजपा की गोलमा देवी विधायक है।

बनवारीलाल सिंघल

ज्ञानदेव आहूजा

खैरथल. भाजपा प्रत्याशी डॉ. जसवंत यादव के समर्थन में बाइक रैली निकालते भाजपा के कार्यकर्ता।

अलवर शहरसे चली हवा लोकसभा क्षेत्र पर डालती है असर

2018 में मतदाता 2 लाख 47 हजार 708

2014 में मतदाता 2 लाख 28 हजार 764

चुनावों में शहर से उठी हवा अलवर लोकसभा क्षेत्र की 7 अन्य विधानसभा सीटों पर असर डालती है। इसी कारण भाजपा व कांग्रेस ने सबसे अधिक ताकत शहर में लगाई हुई है। मुख्यमंत्री ने 3 जनसंवाद और 1 रोड शो किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट भी एक सभा कर चुके हैं। गहलोत का डोर-डू-डोर कैंपेन का भी कार्यक्रम है। शहर में सबसे अधिक मतदाता वैश्य, ब्राह्मण, माली, पुरुषार्थी व एससी के हैं। जितेंद्र सिंह को छोड़ दें तो दोनों ही पार्टियां भी जाति के हिसाब से टिकट देती रही हैं। अलवर में राजघराने का प्रभाव रहा है। जितेंद्र सिंह के केंद्र में जाने के बाद बनवारीलाल सिंघल यहां से 2 बार लगातार विधायक चुने गए। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में जितेंद्र सिंह करीब 50 हजार वोट से शहर से चुनाव हारे थे। इस बार चुनावी गणित कुछ अलग है। माना जाता रहा है कि शहर का वोटर भाजपा के साथ होता है, लेकिन इस बार जीएसटी व नोट बंदी के अलावा शहर में पानी, सड़क व सीवरेज का मुद्दा भी रहा है। दोनों पार्टियों ने शहर में प्रचार के लिए जातियों के हिसाब से नेता उतारे हैं। ब्राह्मण वोटों में सेंध लगाने के लिए दोनेा पार्टियों ने बाहरी नेताओं को भी बुलाया है। कांग्रेस में राष्ट्रीय महासचिव मोहनप्रकाश, भंवरलाल शर्मा व पूर्व मंत्री राजकुमार शर्मा आदि प्रचार कर रहे हैं। भाजपा से पं. धर्मवीर शर्मा, भजनलाल शर्मा व अन्य ब्राह्मण नेता जुटे हैं। वैश्य मतदाताओं के लिए कांग्रेस से पूर्व गृहमंत्री शांति धारीवाल व भाजपा से गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया प्रचार कर रहे हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी डटे हुए हैं। वे पुरुषार्थी समाज की बैठकें भी ले रहे हैं। लगातार दो बार विधायक चुने गए बनवारी सिंघल की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव से जुड़ी है। सिंघल पिछले चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीते थे।

अलवर ग्रामीण :एससी वोटरों पर है दोनों पार्टियों की नजर

2018 में मतदाता 2 लाख 27 हजार 283

2014 में मतदाता 1 लाख 95 हजार 512

अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दलों की नजर एससी वोटरों पर है। सहजपुर में पिछले दिनों अंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा ने भले ही इस मुद्दे को हैंडल कर लिया हो, लेकिन चुनावी समय में वह कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं को भाजपा ने अपने पाले में भी कर लिया है। विधानसभा की यह सीट एससी वर्ग के लिए रिजर्व है। मौजूदा समय में भाजपा से जयराम जाटव यहां से विधायक हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में एससी के अलावा मेव, माली, गुर्जर, जाट, ब्राह्मण व मीणा वोटरों की संख्या अधिक है। पिछले चुनाव में कांग्रेस से मेव मतदाता छिटक गया था। इसका नतीजा रहा कि विधानसभा और लोकसभा दोनों चुनाव में कांग्रेस की हार हुई। गत लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यहां से करीब 14 हजार वोट की बढ़त ली थी। इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से विधायक जयराम जाटव व कांग्रेस से टीकाराम जूली ने प्रचार की कमान संभाली हुई है। जूली यहां से विधायक भी रहे हैं। जितेंद्र सिंह भी कई सभाएं कर चुके हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में सैनिक स्कूल, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग नहीं बनने का भी मुद्दा है।

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ :मीणा व मेव वोटर जिधर जाएंगे, परिणाम उसी के पक्ष में

राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में जहां मोदी लहर में अलवर लोकसभा क्षेत्र की 7 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था, वहीं एकमात्र यही विधानसभा सीट ऐसी थी, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी ने लीड ली थी। मीणा बहुल क्षेत्र होने के कारण इसे मीणा वाटी के नाम से भी जाना जाता है। विधानसभा चुनाव में यह सीट एसटी के लिए रिजर्व है। इस विधानसभा क्षेत्र में मीणाें के अलावा मेव, एससी, ब्राह्मण, माली, जाट, गुर्जर आदि जातियों का बड़ा वोट बैंक है। मौजूदा समय में इस विधानसभा से राजपा की गोलमा देवी विधायक है। इस विधानसभा क्षेत्र में मीणा वोट ही हार-जीत तय करते हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस से पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह व जौहरीलाल मीणा ने कमान संभाली हुई है, वहीं भाजपा से खुद डॉ.जसवंत यादव व बन्नाराम मीणा इलाके में सक्रिय हैं। इस उपचुनाव में कांग्रेस के लिए इस गढ़ को फिर हासिल करने की चुनौती है, जबकि भाजपा यहां से बढ़त लेने का प्रयास करेगी। उपचुनाव में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। मीणा और मेव वोटर जिस तरफ मूव करेगा, परिणाम उसी प्रत्याशी के पक्ष में रहेंगे।

2018 में मतदाता 2 लाख 39 हजार 664

2014 में मतदाता 2 लाख 13 हजार 974

माजरीकलां. कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव के समर्थन में ग्रामीणों को संबोधित करते पूर्व केंद्रीय मंत्री।

रामगढ़ :सांप्रदायिकता से सद्भाव की ओर मुड़ा चुनाव

2018 में मतदाता 2 लाख 32 हजार 271

2014 में मतदाता 2 लाख 04 हजार 787

रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में इस बार मुकाबला कांटे का होता नजर आ रहा है। इस विधानसभा क्षेत्र में मेव, जाट, पुरुषार्थी, माली, ओड राजपूत, गुर्जर, वैश्य व ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या अधिक है। यहां से ज्ञानदेव आहूजा दूसरी बार लगातार विधायक हैं। पिछले कुछ चुनावों पर नजर डालें तो यहां सांप्रदायिकता हावी रही है। इस बार लोकसभा उपचुनाव में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा। भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता भी सोच समझकर बोल रहे हैं। चुनाव के लिए भाजपा ने विधायक ज्ञानदेव आहूजा के साथ मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर तथा संगठन से पिंकेश पोरवाल को लगाया हुआ है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी भी दौरे कर चुके हैं। दूसरी ओर कांग्रेस से पूर्व विधायक जुबेर खान ने इस विधानसभा क्षेत्र में कमान संभाली हुई है। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की भी सभा हो चुकी है। इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा व कांग्रेस का पलड़ा बराबर झूलता दिखाई दे रहा है। भाजपा प्रत्याशी डॉ.जसवंत यादव व कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.करण सिंह यादव भी इलाके के दौरे कर चुके हैं।
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