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रामहेत यादव-कांग्रेस राज में इसके स्वीकृति के आदेश दिखा दें तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 26, 2018, 05:10 PM IST

दीपचंद खैरिया : इलाके की जनता के साथ विधायक भेदभाव करते हैं। सिर्फ चहेतों के काम होते हैं बाकी जनता परेशान है। किसने वोट दिया और किसने वोट नहीं दिया, इस आधार पर विधायक काम करते हैं।

-रामहेत यादव : अगर वोट के आधार पर काम किया होता तो हरसौली में 17 करोड़ के काम नहीं होते। यहां से मुझे और मेरी पार्टी के प्रत्याशी को कभी बढ़त नहीं मिली। मैंने हरसोली को खैरथल, मुंडावर, बीबीरानी व खैरथल से जोड़ा। इसके अलावा कोल गांव में नेशनल इंस्टीट्यूट खुलवाना, बंबोरा में आईटीआई, ढाई करोड़ की पेयजल योजना, रूप का चौकी से थाना घोड़ा को जोड़ा, ये सब मेरे कार्यकाल में काम हुए हैं। विजय मंदिर से खैरथल, खैरथल से हरसौली, राताखुर्द से जगता बसई, बालन बसई, गंज, हरसोली से मीरका, बास कृपाल नगर, मोठूका, थाना घोड़ा, मुबारिकपुर, अलीपुर से खानपुर, कोल गांव, हींगवा हेडा, तिजारा, कोटकासिम से लाडपुर, मुंडाना, तिजारा तथा कोटकासिम से कतोपुर, बूढ़ी बाबल तक की सड़कें मेरे कार्यकाल में स्वीकृत हुई हैं।

दीपचंद खैरिया : उपचुनाव आए तो मुख्यमंत्री, मंत्री और हमारे विधायक को क्षेत्र की जनता की परेशानियां याद आई। कई घोषणाएं कर दी गई। हरसौली व कोटकासिम के लिए बस चलाने की घोषणा कर दी गई। चुनाव हार गए तो उन घोषणाओं को भूल गए।

-रामहेत यादव : एक अधिकारी की गलती के कारण बसें बंद हो गई। इन्हें जल्द चालू कराया जाएगा। हम जो कहते हैं वो करते हैं।

दीपचंद खैरिया : चार साल में चार किलोमीटर की सड़कें बनी हैं। एनसीआर के तहत बनाई जा रही सड़कों में इनका क्या लेना-देना? ये पैसा तो पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के समय पास हुआ था। इनका श्रेय भी खुद ले रहे हैं। कॉलेज की बात करेंगे तो यह चुनावी के कारण सिर्फ घोषणा ही की है। जब बना जाए तक जानो।

-रामहेत यादव : सड़कों के लिए एनसीआर में पैसा कांग्रेस राज में मंजूर हुआ। इसके आदेश अगर खैरिया जी दिखा दें तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा और वकालत शुरू कर दूंगा। ये काम हमारी सरकार के प्रयास से शुरू हुए। मेरे विधानसभा में साढ़े छह सौ करोड़ की सड़कों का निर्माण हो रहा है। खैरथल, किशनगढ़बास, कोटकासिम और हरसौली चारों नगर पालिकाओं में आज के इतिहास में सबसे अधिक काम हुए हैं। मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री या मैंने आज तक जो भी घोषणा की हैं वे 100 प्रतिशत पूरी की हैं। इसी सत्र में कॉलेज शुरू हो जाएगा। कोटकासिम में 10 करोड़ की जल्द आईटीआई चालू हो जाएगी।

दीपचंद खैरिया : इनके राज में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। नगर पालिका में 76 लाख का ठेका हुआ। विधायक ने ठेके को कैंसिल करा दिया और उसी काम का वापस 1 करोड़ 27 में ठेका दिया। जो भी काम के ठेके छूटते हैं, इनकी ऐसे समाचार पत्र में सूचना देते हैं जिन्हें कोई जानता ही नहीं है। ये भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?

-रामहेत यादव :ठेके के टेंडर ऑनलाइन होते हैं। किसी जनप्रतिनिधि का इसमें कोई रोल नहीं है। पहले किशनगढ़बास का कचरा बाइपास पर खाली प्लाट में डाला जाता था। विरोध होने पर अब कचरे को खैरथल में डाला जा रहा है। खैरथल की दूरी ज्यादा है। इस कारण ठेके की लागत बढ़ गई होगी। अगर ये भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहे हैं तो शिकायत करें। जांच हो जाएगी। जो भी अधिकारी दोषी होगा कार्रवाई होगी।

दीपचंद खैरिया : बढ़ते अपराध के लिए ये हमें बदनाम करते थे। अब दिनदहाड़े कत्ल और लूटपाट की वारदातें हो रही हैं। व्यापारी, आमजन कोई भी सुरक्षित नहीं। लोग भय में जी रहे हैं। खैरथल में व्यापारी की हत्या कर दी गई। हत्यारे आज तक नहीं पकड़े गए।

-रामहेत यादव : कांग्रेस राज के मुकाबले अपराध घटे हैं। इनके राज में दो मर्डर हुए, जो आज तक नहीं खुले। मैं विधायक था और धरने पर बैठा। विधानसभा में मामला उठाया। खैरथल में दुखद घटना हुई है। हमारा राज होते हुए भी मैंने व्यापारियों के बंद का समर्थन किया। विधायक ज्ञानदेव आहूजा और बनवारीलाल सिंघल के साथ मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से मिला। प्रदेश में पहला मामला होगा, जहां एसपी खुद रोजाना सुबह से लेकर देर रात थाने में बैठकर मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दी, उनमें से कुछ को हटा भी दिया गया है। हमने बॉर्डर पर नफरी बढ़ाने, जिले मे दो एसपी लगाने, पुलिस चौकी पर गाड़ी सहित अन्य सामान देने की मांग की है। खैरथल में जल्द ही वाई-फाई सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरे पहले भी लगाए गए, लेकिन इन्हे अवैध खनन के डंपरों ने तोड़ दिया।

दीपचंद खैरिया

दीपचंद खैरिया : 1981 में सरपंच बने। उसी समय निर्विरोध प्रधान चुने गए। उसके बाद उपजिला प्रमुख बने। 1985 में जिला प्रमुख चुने गए। 1989 में सूर्यदेव बारेठ को हरा कर प्रधान चुने गए। 2008 और 2013 में किशनगढ़बास से कांग्रेस टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े। दोनों बार भाजपा के रामहेत यादव से चुनाव हार गए।

रामहेत यादव

रामहेत यादव : विद्यार्थी परिषद से सफर शुरू किया। संघ में काम किया। इसके बाद युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने। भाजपा में लंबे समय तक जिला मंत्री व जिला महामंत्री के पद पर रहे। पहला चुनाव तिजारा विस से लड़े लेकिन हार गए। परिसीमन के बाद किशनगढ़बास विधानसभा बनी। 2008 में यहां से पहली बार विधायक चुने गए। दूसरी बार भी इसी विधानसभा विधायक बने। दोनों बार दीपचंद खैरिया को चुनाव में हराया।

रामहेत ने पूछा-अपने राज में अपराध क्यों नहीं रोके?

दीपचंद-अपराध भाजपा के राज में बढ़े कोई सुरक्षित नहीं, लोग भय में जी रहे हैं

दीपचंद खैरिया: इलाके में चार सीएचसी हैं। चारों डंप पड़ी हैं। अपने स्वार्थ के कारण जो अच्छे डॉक्टर थे उन्हें रुकने नहीं दिया गया। इनके स्वार्थ जुड़े हुए हैं। एक जाति विशेष को तरजीह दी जाती है। मैंने सभी जातियों की निस्वार्थ भाव से सेवा की है। जिस दिन में जिला प्रमुख बना, उसी दिन मैंने काले कोट को खूंटी पर टांग दिया था। वकालत का धंधा छोड़कर जनता की सेवा की। मेरे ऊपर कोई अंगुली नहीं उठा सकता।

-रामहेत यादव : मैंने पहले भी कहा कि मैं जाति व्यवस्था की राजनीति नहीं करता और न किसी से रंजिश रखता हूं। खैरिया जी के परिवार वाले भी तो नौकरी कर रहे हैं। आज तक किसी को परेशान नहीं किया। मैं 36 कौम को साथ लेकर चलता हूं। कांग्रेस के राज में जाति व्यवस्था थी।

दीपचंद खैरिया से सवाल

सवाल : आपको कांग्रेस ने दो बार किशनगढ़बास विधानसभा से टिकट दिया। आप दोनों बार चुनाव हार गए।

-दीपचंद खैरिया : पहले चुनाव में बसपा से शेर मोहम्मद 18500 से अधिक वोट ले गया। यह कांग्रेस का परंपरागत वोट था, जो बसपा में चला गया। इस कारण मैं चुनाव हार गया। दूसरे चुनाव में नरेंद्र मोदी ने लोगों के सपने दिखाए, इससे युवा भ्रमित हो गया। दो करोड़ को नौकरी देंगे। हर आदमी के खाते में 15-15 लाख रुपए आएंगे। काला धन वापस आएगा। इनकी जुमलेबाजी में लोग फंस गए। हालांकि पहले चुनाव के मुकाबले मुझे ज्यादा वोट मिले। अब स्थिति बदल गई है। भाजपाइयों की बातों में अब लोग आने वाले नहीं हैं।

सवाल : किशनगढ़बास में कांग्रेस दो धड़ों में बंटी है। दोनों चुनावों में दूसरे धड़े ने खुलकर विरोध किया।

-दीपचंद खैरिया : यह सही है कि मेरे दोनों चुनावों में कांग्रेस के दो नेताओं में मेरी खिलाफत की। मैं उनका नाम लेना नहीं चाहता लेकिन जनता को पता है। अब ऐसा नहीं है। परिस्थितियां बदल गई हैं। कांग्रेस एकजुट है। जो भी चुनाव लड़ेगा, हम सब एक साथ होंगे।

सवाल : आपको दोनों चुनाव में यादव जाति का वोट कम मिला। ऐसे कई गांव जाटों के हैं जहां से आप चुनाव हार गए। इसका मतलब कि जाटों ने भी आपको वोट नहीं दिया।

-दीपचंद खैरिया : जाटों में मेरे प्रति कोई रोष नहीं है। मैं यह मानता हूं कि चुनाव में मुझे जाटों का साढ़े आठ हजार वोट कम मिला। अगर यह वोट मिल जाता तो मैं चुनाव जीत जाता। वहीं कांग्रेस के एक जाट नेता ने ही मेरे वोट कटवाए।

रामहेत यादव से सवाल

सवाल : लोकसभा उपचुनाव में आपको अपने क्षेत्र में जनता का विरोध सहना पड़ा।

-रामहेत यादव : मेरा क्षेत्र में कहीं कोई विरोध नहीं है। हर कौम मेरे साथ है। उपचुनाव में दौरान एक गांव में प्रायोजित कार्यक्रम था। जिन लोगों ने विरोध किया, उन्हीं लोगों ने मेरा व प्रभारी मंत्री का स्वागत किया था।

सवाल : लोकसभा उपचुनाव में हार के कारण क्या रहे? यह सरकार की हार थी या प्रत्याशी की हार थी?

-रामहेत यादव : लोकसभा उपचुनाव में न तो सरकार की हार थी और नहीं पार्टी और प्रत्याशी की। तात्कालिक ऐसे कारण बन गए जिससे हम चुनाव हार गए। कर्मचारी वर्ग हमसे नाराज हो गया। सहजपुर में मूर्ति नहीं लगने के कारण दलित वर्ग नाराज हो गया। इसका कांग्रेस को फायदा मिल गया। हमने काम इतने किए हैं कि जनता सरकार से नाराज हो ही नहीं सकती।

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