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निरंकारी सत्संग का आयोजन

खैरथल | साधु-संगत कल्पवृक्ष के समान है जो सदैव जुड़े रहते हैं। वे दुख-दरिद्रता व सभी संकटों से मुक्त होते हैं। ऐसा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 22, 2018, 06:45 PM IST

खैरथल | साधु-संगत कल्पवृक्ष के समान है जो सदैव जुड़े रहते हैं। वे दुख-दरिद्रता व सभी संकटों से मुक्त होते हैं। ऐसा बानसूर के प्रचारक महात्मा संत रमेश ने संत निरंकारी सत्संग भवन पर आयोजित सत्संग कार्यक्रम के दौरान कहे। संत ने कहा कि जिस प्रकार कल्पवृक्ष से जो भी कामना की जाती है वह पूर्ण होती है। उसी प्रकार ब्रह्मज्ञानी संतों से की गई अरदास भी पूर्ण होती है। महात्मा ने सत्संग की महिमा करते हुए बताया कि कोटि-कोटि किए गए यज्ञ का फल साधु संगत में आने से मिलता है। इससे बढ़कर कोई तीर्थ स्थान नहीं है। जो सत्संग में आते हैं सतगुरु की कृपा से सारे सुख उसके पीछे चले आते हैं। जीवन में निखार आता है मान सम्मान मिलता है और सभी कार्य पूर्ण होते चले जाते हैं। इस दाैरान सत्संग में आए हुए महात्मा का गौरव शर्मा ने दुपट्टा डाल कर स्वागत किया। मंच संचालन मुखी कन्हैया लाल ने किया।

संत िनरंकारी सत्संग में मौजूद महिलाएं।

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