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सच जानिए : कलेक्टर रविवार को निजी लाइफ जीते हैं, एसपी धौलपुर थे, व्यवस्था कौन देखता?

एक इंसान की मौत और लाखों रुपए की चल-अचल संपत्ति का नुकसान। इसके बाद भी किसी जन प्रतिनिधि ने अधिकारियों से यह नहीं...

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2018, 06:40 AM IST
सच जानिए : कलेक्टर रविवार को निजी लाइफ जीते हैं, एसपी धौलपुर थे, व्यवस्था कौन देखता?
एक इंसान की मौत और लाखों रुपए की चल-अचल संपत्ति का नुकसान। इसके बाद भी किसी जन प्रतिनिधि ने अधिकारियों से यह नहीं पूछा कि आखिर आपकी जिम्मेदारी क्या थी? सरकार पूछती, उससे पहले कलेक्टर ने एसपी को एक पत्र देकर कह दिया कि पुलिस की लापरवाही थी। पत्र से ऐसे लगा जैसे बंद को लेकर प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होती। जिले की व्यवस्था किस कदर खराब है, इसके कारणों की तह पर जाने के लिए आपको दो बातें बताता हूं। कलेक्टर राजन विशाल की जिले की जनता ही नहीं मीडिया से भी भरपूर दूरी है। साफ कह रखा है कि रात 8 बजे बाद मेरी निजी जिंदगी होती है, इसलिए बात नहीं करें। रविवार को भी वे मीडिया से बात लगभग नहीं करते हैं। सवाल है कि क्या कोई प्रशासनिक अधिकारी ऐसा निर्णय ले सकता है? क्या बड़ी घटनाएं जिनमें बड़े अधिकारी से बातचीत की आवश्यकता पड़ती है, वे रात 8 बजे बाद या रविवार को नहीं होती। बंद से एक दिन पहले रविवार था। उस दिन कलेक्टर से बात करने के लिए कितने ही फोन किए, पर कोई जवाब नहीं मिला। आश्चर्य की दूसरी बात यह है कि पूरे शहर को इस बात की चिंता थी कि 2 अप्रैल को क्या होगा, पर एसपी साहब को फोन किया तो बोले-छुट्टी पर धौलपुर आया हुआ हूं।

जिस जिले के कलेक्टर-एसपी की यह स्थिति हो। जन प्रतिनिधि उनसे बात नहीं कर सकते हों, उसका क्या होगा। एक माह में 4 हत्याएं, लूट की अनगिनत वारदात, प्रशासन में खुला भ्रष्टाचार। कोई नहीं रोक सकता। मैं आपको बता दूं, जिले के कई विधायक ऐसे हैं जिनके फोन ये अधिकारी नहीं उठाते हैं। कलेक्टर की बैठकों में शहर में पानी-बिजली की बातें की जाती हैं पर कोई नहीं सुनता। दो अप्रैल के बंद में प्रशासन व पुलिस के बड़े अधिकारियों के पास कोई सूचना नहीं थी कि इस दिन क्या हो सकता है तो फिर इनका सूचना तंत्र क्या है? अलवर के एनईबी और खैरथल में ही दंगे क्यों हुए? इस पर खोज करोगे तो कई सच सामने आ सकते हैं। आखिर पुलिस एकतरफा कार्रवाई क्यों करना चाहती थी। पुलिस थाना जलने के बाद ही सक्रियता क्यों दिखाई गई? उससे पहले कुछ भी होता रहा, कहीं प्रशासन नजर आया क्या? विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने विधानसभा में सरकार को बताया कि किस तरह से अलवर में भ्रष्टाचार चरम पर है पर किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। फोन पर रिश्वत की बात करते हुए स्टिंग किया गया पर कार्रवाई के नाम पर उस पुलिसवाले को वहां से हटा दिया गया। भ्रष्टाचार का खुला खेल अभी भी जारी है।

भास्कर हस्तक्षेप

राजेश रवि

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