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चुनावी सेमीफाइनल

अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा के नतीजों में 3 भाजपा प्रत्याशियों की ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से 15...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 04:55 AM IST
अलवर, अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा के नतीजों में 3 भाजपा प्रत्याशियों की ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से 15 मंत्रियों (सरकार में कुल 30 मंत्री) और 14 विधायकों की भी हार हुई। उपचुनाव में जीत दिलाने की जिम्मेदारी इन्हीं पर थी। लेकिन विधासभा चुनाव से पहले के इस सेमीफाइनल में कांग्रेस के तीनों प्रत्याशियों ने इन्हें 3-0 से चित कर दिया।

इस सियासी पटखनी ने मंत्रियों के कद और इन विधायकों के टिकट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसका कुछ असर तो आगामी दिनों में दिखाई दे सकता है, बाकी दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में दिखाई देगा। खास बात है कि अजमेर और अलवर लोकसभा क्षेत्र की 8-8 सीटों में से 7-7 सीटें भाजपा के पास हैं।

अजमेर संसदीय क्षेत्र की भाजपा के कब्जे वाली सात सीटों पर चुने गए विधायकों में से सरकार में दो मंत्री व दो संसदीय सचिव हैं। अलवर में खुद श्रम मंत्री डॉ. जसवंत यादव प्रत्याशी थे और उन्हें करीब दो लाख वोटों से हार मिली। यहां भी भाजपा के कब्जे वाली सभी सात सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह यादव को लीड मिली है। इन विधायकों के अलावा राज्य कैबिनेट के 15 मंत्रियों को भी प्रचार के लिए उतारा गया था। मांडलगढ़ में यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी के पास जिम्मेदारी थी। लेकिन वे भी इस सीट को नहीं बचा पाए।

भाजपा के इन मंत्री-विधायकों पर दिखेगा सियासी पटखनी का असर

अलवर लोकसभा सीट

8 विधानसभा सीट हैं यहां

7 भाजपा के कब्जे में हैं इनमें से

ये मंत्री : जल संसाधन मंत्री रामप्रताप, सामान्य प्रशासन मंत्री हेम सिंह भड़ाना, वन मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, खाद्य मंत्री बाबूलाल वर्मा, खान मंत्री सुरेंद्र पाल, पीएचईडी मंत्री सुरेंद्र गोयल, उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत के अलावा दर्जा प्राप्त मंत्री रोहिताश्व पर जिम्मेदारी थी।

6 मंत्री, 1 दर्जा प्राप्त मंत्री

7 विधायकों के पास थी जिम्मेदारी

ये विधायक : रामगढ़ से विधायक ज्ञानदेव आहूजा, अलवर शहर से बनवारी लाल सिंघल, मुंडावर से धर्मपाल चौधरी, किशनगढ़बास से रामहेत यादव, अलवर ग्रामीण से जयराम जाटव, तिजारा से मामन सिंह व खुद प्रत्याशी डॉ. जसवंत बहरोड़ विधायक हैं।

भाजपा के तीन प्रत्याशी ही नहीं, सरकार की आधी कैबिनेट, 14 विधायक भी हारे

अजमेर लोकसभा सीट

8 विधानसभा सीट हैं यहां

7 भाजपा के कब्जे में हैं इनमें से

ये मंत्री : पीडब्ल्यूडी मंत्री यूनुस खान, स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण, पंचायती राज मंत्री राजेंद्र राठौड़, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवा, सहकारिता मंत्री अजय सिंह के अलावा दर्जा प्राप्त मंत्री मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर व उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ को जीत दिलाने का जिम्मा सौंपा गया था।

6 मंत्री, 2 दर्जा प्राप्त मंत्री

7 विधायकों के पास थी जिम्मेदारी

ये विधायक : पुष्कर से सुरेश रावत, केकड़ी से शत्रुघ्न गौतम, किशनगढ़ से भागीरथ चौधरी, मसूदा से सुशीला कंवर, अजमेर दक्षिण से अनीता भदेल, अजमेर उत्तर से वासुदेव देवनानी और दूदू से प्रेमचंद बैरवा के पास चुनाव की जिम्मेदारी थी।

मांडलगढ़

यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी को चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई थी। यह सीट भाजपा के कब्जे में थी, लेकिन कांग्रेस के हाथ में गई। इस सीट पर भाजपा की कीर्तिकुमारी ने तीसरे प्रयास में जीत हासिल की थी। उनकी मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई थी। जो कांग्रेस के खाते में गई।


नतीजों के सियासी मायने

भाजपा के लिए

1 भाजपा के सभी विधायकों के इलाकों में पार्टी हारी। विधानसभा चुनाव पर इसका असर पड़ेगा। मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नए चेहरे उतारे जा सकते हैं। मंत्रिमंडल व संगठन में बदलाव संभव। डॉ. जसवंत की हार के बाद सवाल भी उठेगा कि उनको मंत्री बनाए रखा जाए या नहीं?

2 तीनों सीटों पर कांग्रेस की जीत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए नई चुनौती है। पार्टी में दिल्ली-जयपुर के बीच अंदरूनी संघर्ष बढ़ेगा।

3 अगला चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा, इस पर भी भाजपा को नए सिरे से मंथन करना पड़ सकता है।

जीत का नायक

कांग्रेस के लिए

1 सचिन पायलट के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद अब तक हुए 8 उपचुनावों में से 6 कांग्रेस जीती है। उनके नेतृत्व को नई ताकत मिली है।

2 अगले चुनाव में प्रमुख चेहरे को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत व पायलट के बीच जो खींचतान चल रही थी, अब साफ हो गया है कि अगला नेतृत्व पायलट का ही रहेगा।

3 कांग्रेस में भले ही कार्यकर्ताओं में जीत के कारण नए जोश का संचार होगा लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण नेताओं के बीच आने वाले दिनों मेंं गुटबाजी बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता।

विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे इस उपचुनाव में तीनों सीटें भाजपा के कब्जे में थीं और तीनों कांग्रेस ने छीनी हैं। उपचुनाव प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में लड़ा गया, ऐसे में जीत का नायक भी उन्हें ही बताया जा रहा है। इस सियासी उलटफेर ने न केवल पायलट के कद में बढ़ोतरी की है, बल्कि अजमेर से चुनाव नहीं लड़ने को लेकर उन पर उठे सवालों पर भी लगाम लगी है। पायलट ने अजमेर तो जिताया ही, अलवर और मांडलगढ़ भी जीता।