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पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने 4 बेटियों ने दिया कंधा, मुखाग्नि भी दी

समाज में मौजूद रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ते हुए लालाप गांव में चार बेटियों ने न केवल अपने पिता के निधन के बाद उनकी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 12, 2018, 05:15 AM IST

पिता की अंतिम इच्छा पूरी करने 4 बेटियों ने दिया कंधा, मुखाग्नि भी दी
समाज में मौजूद रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ते हुए लालाप गांव में चार बेटियों ने न केवल अपने पिता के निधन के बाद उनकी अंतिम यात्रा में उन्हें कंधा दिया। बल्कि उनके अंतिम संस्कार के समय उन्हें मुखाग्नि भी दी। लालाप गांव के मुकनाराम बावरी व उनकी प|ी के बेटे नहीं होने के कारण उनकी सेवा के लिए उनकी ही दो बेटियां आगे आई और दोनों बेटियों ने अपने पिता की 13 वर्ष तक सेवा कर उन्हें बेटे की कमी महसूस नहीं होने दी। जब उन्होंने अपनी बेटियों के कंधे पर अंतिम संस्कार व मुखाग्नि की इच्छा बेटियों के समक्ष जताई थी। उनके निधन के बाद उनकी चारों बेटियों ने मुकनाराम की अंतिम इच्छा को पूरी करने के लिए समाज की परवाह किए बिना उनकी अंतिम यात्रा के लिए चारों बेटियों ने पिता को न केवल कंधा दिया बल्कि उन्हें मुखाग्नि भी दी। लालाप निवासी मुकनाराम व उनकी प|ी के वृद्ध होने पर भदाेरा गांव में रहने वाली अपनी दो बेटियां सीपुदेवी व मीरा के साथ रहने के लिए वहां चले गए। वहीं 13 वर्षों तक उनकी दोनों बेटियों ने सेवा की एवं उनके अंतिम समय में मुकनाराम ने बेटियों के समक्ष उनके जन्म स्थल गांव लालाप में बेटियों के हाथों अंतिम संस्कार की इच्छा जताई। मुकनाराम के निधन के बाद गांव भदाेरा से उनके जन्म स्थल गांव लालाप में शव को लाया गया। वहीं चारों बेटियों ने पिता को अंतिम यात्रा में कंधा देकर उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।

रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़कर मुकनाराम की 4 बेटियां सीपु देवी, मीरा, शांति देवी व सुखमन ने समाज में नई मिसाल पेश की है। मुकनाराम की चारों बेटियां भले ही पढ़ी-लिखी नहीं है। लेकिन उन्होंने समाज में बेटियों को आगे बढ़ने के लिए एक नई मिसाल दी है। ताकि समाज में बेटी को भी बेटे से कम नहीं माना जा सके।

खींवसर. लालाप में पिता की अर्थी को कंधा देती बेटियां।

सेवा के लिए गोद लिए बेटे ने छोड़ दिया था पिता का साथ

लालाप के मुकनाराम ने चारों बेटियों की वर्षों पहले शादी करवाकर उनको ससुराल भेज दिया था। बेटियों के ससुराल जाने के बाद उन्होंने अपने बुढ़ापे के सहारे के लिए अपने भाई के बेटे को गोद लिया। लेकिन कुछ ही समय बाद गोद लिए बेटे ने मुकनाराम का साथ छोड़ दिया था। लेकिन मुकनाराम ने अपना फर्ज पूरा करते हुए गोद लिए बेटे को अपनी जमीन के आधे हिस्से में 20 बीघा जमीन उसे दे दी। वहीं उसके बाद भी गोद लिए बेटे द्वारा मुकनाराम की देखभाल करनी बंद कर देने पर वह अपनी दो बड़ी बेटियों के पास भदाेरा गांव चले गए। वहीं बेटियों ने 13 वर्षों तक उनकी सेवा की। इतना ही नहीं मुकनाराम ने अपने हिस्से की 10 बीघा जमीन भी छोटी बेटी सुखमन के मायरे में दे दी थी।

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