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टांकला में संत बोले- ईश्वर की भक्ति के बिना कल्याण संभव नहीं

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:35 AM IST

Khiwsar News - खींवसर. टांकला धाम पर सत्संग में भजन-कीर्तन करते संत। संत किशनदास महाराज धाम पर हुआ सत्संग का आयोजन भास्कर...

टांकला में संत बोले- ईश्वर की भक्ति के बिना कल्याण संभव नहीं
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खींवसर. टांकला धाम पर सत्संग में भजन-कीर्तन करते संत।

संत किशनदास महाराज धाम पर हुआ सत्संग का आयोजन

भास्कर संवाददाता | खींवसर

ईश्वर भक्ति के बिना मनुष्य जीवन का कल्याण सम्भव नहीं है। ईश्वर भक्ति मार्ग अपनाकर ही मनुष्य सांसारिक जीवन मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। यह विचार बुधवार रात्रि में अखिल भारतीय रामस्नेही संप्रदाय के संत किशनदास महाराज की धाम में सत्संग के दौरान रेण पीठाधीश्वर हरिनारायण शास्त्री ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने धर्म के मार्ग को भूलकर पतन के रास्ते पर जा रहा है। मनुष्य को धर्म की रक्षा करनी चाहिए जिससे मनुष्य को आत्म संतोष मिलेगा। टांकला धाम के संत मोतीराम महाराज ने कहा कि गाय की दुर्दशा के कारण धरती पर पाप का भार बढ़ रहा है। इस मौके पर चाडी रामद्वारा के संत रामभरोस महाराज, डेह धाम के संत आनंदराम महाराज, भोजास धाम के संत रामनिवास महाराज, संत श्रीराम महाराज, सिणोद रामद्वारा के संत आत्माराम महाराज, केरू के संत गंगाराम महाराज, भगवतगिरी गोस्वामी सहित कई साधु संतों भक्ति सरिता का गुणगान किया।

गुरु जसनाथ मंदिर से कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा शुरू

जोधियासी | गुरु जसनाथ मंदिर सेवा समिति गोचरियों की ढाणी मांझवास में गुरु जसनाथ महाराज के नवनिर्मित मंदिर से गुरुवार को कलश यात्रा निकाली गई। इसके साथ ही गोचरियों की ढाणी में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथावाचक भागीरथ शास्त्री ने पहले दिन श्रीमद्भागवत कथा सुनने का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा भगवान तक पहुंचने के लिए सेतु का काम करती है। कलयुग में भगवत प्राप्ति के लिए जाप एवं कथा का श्रवण श्रेष्ठ साधन है। इसका वाचन करने ओर श्रवण करने से कई पापियों का उद्धार हुआ था। इस मौके पर कोषाध्यक्ष राजेश ने बताया कि श्री़मद्भागवत कथा सुनने से मन को शांति मिलती है। समिति सचिव महेंद्र गोरचिया ने बताया कि भक्तों के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस मौके पर पूर्व सरपंच गोपालराम, रामदेव, सुखराम, संत रघुनाथ महाराज, मोहनराम सिद्ध, मोटाराम महाराज, तुलछाराम, मूलाराम, रामचंद, तेजाराम, गोरधन, ओमप्रकाश और मनोज गोरचिया आदि मौजूद थे।

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