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जोशी गुट के उपाध्यक्ष इकबाल : ललित मोदी के इशारे पर चल रही है सरकार

जिसका डर था वही हुआ। आखिर राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) पर ताले लग ही गए। जिस दिन से सी.पी. जोशी सत्ता में आए और पहली ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 15, 2018, 04:45 AM IST

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    जिसका डर था वही हुआ। आखिर राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) पर ताले लग ही गए। जिस दिन से सी.पी. जोशी सत्ता में आए और पहली ही कार्यकारिणी की मीटिंग में सचिव आर.एस. नांदू के सस्पेंशन का जो विवाद हुआ तब से लेकर आजतक आरसीए विवादों का अड्डा बनी हुई है। सी.पी. जोशी की एक ही उपलब्धि इस दौरान मानी जा सकती है कि वे आईपीएल जयपुर में कराने में सफल रहे। हालांकि इसके लिए भी राजस्थान सरकार के खेलमंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने उन्हें क्रेडिट नहीं दिया।

    स्पोर्ट्स काउंसिल के अधिकारियोंं ने आरसीए में ताले लगा दिए। इस बारे में पूछने पर आरसीए में जोशी गुट से जीत कर आए मोहम्मद इकबाल ने कहा, ‘सरकार ने यह अच्छा नहीं किया। सरकार पूरी तरह से ललित मोदी के इशारे पर चल रही है। अब यह लड़ाई पूरी तरह से कांग्रेस-भाजपा के बीच की हो गई है। और कुछ समय इंतजार करो। चुनाव के बाद सब ठीक हो जाएगा।’

    ताला लगाने के बाद नोटिस चस्पा करते स्पोर्ट्स काउंसिल के पदाधिकारी।

    मोदी गुट से जीत कर आए आरसीए सचिव आर.एस. नांदू ने कहा, ‘सी.पी. जोशी क्रिकेट नहीं चलाना चाहते। उनका मकसद तो आरसीए की सत्ता में कांग्रेसियों को बिठाना है। सरकार की ओर से एमओयू को लेकर पत्र आने के बाद मैंने उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो मैंने सरकार को उस पत्र का जवाब दिया। इसके बाद सरकार ने ताले लगाने का फैसला किया। मैंने जवाब में लिखा था कि पहली कार्यकारिणी की मीटिंग में उपजे विवाद के बाद से क्रिकेट को लेकर कुछ भी नहीं हुआ है। डोमेस्टिक क्रिकेट की तो एक भी गेंद जोशी के इस राज में अभी तक नहीं फेंकी गई है।’

    मोदी गुट के सचिव आरएस नांदू : आरसीए पर कांग्रेसी सत्ता चाहते हैं सीपी जोशी

    बीसीसीआई से सस्पेंशन खत्म होने का पत्र तक नहीं मिला

    चुनाव जीत कर आने के बाद सी.पी. जोशी ने सिर्फ और सिर्फ एक ही बात कही थी कि उनका सबसे पहला काम होगा बीसीसीआई से आरसीए का सस्पेंशन खत्म कराना। कोशिश हुई, हाईकोर्ट के माध्यम से। लेकिन सस्पेंशन खत्म होने का पत्र बीसीसीआई की तरफ से आज तक नहीं आया। मामला अभी भी कोर्ट में है। विवाद लगातार बढ़ते गए। नांदू को लेकर विवाद थमा भी नहीं था कि कोषाध्यक्ष पिंकेश जैन को भी हटाने की कोशिश हुई और आर्बिट्रेटर के आर्डर पर आजाद सिंह को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इतना ही नहीं प्लेयर्स एसोसिएशन तक भी दोनों गुटों की अलग-अलग बन गईं।

    डोमेस्टिक क्रिकेट को लेकर नहीं हुई कोई पहल

    डोमेस्टिक क्रिकेट को लेकर भी आपसी विवाद सामने आते रहे। एक कैंलेडर जारी भी किया गया लेकिन इसकी शुरुआत नहीं हो सकी। एक कारण बीसीसीआई से पैसा नहीं मिलना भी है। वैसे आरसीए के खाते में जो पैसा है उसका उपयोग इसलिए संभव नहीं हो सकता क्योंकि इसके लिए चेक पर साइन कौन करता। अभी तक आईपीएल के लिए जो रिनोवेशन स्टेडियम में किए गए उन तक का भुगतान नहीं हुआ है।

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