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ग्रह दशा

भास्कर न्यूज | मदनगंज-किशनगढ़ शहर में पूर्ण चंद्रग्रहण बुधवार को शाम 5.21 से रात 8.45 बजे तक रहा। शहर में इसका प्रभाव 3...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:35 PM IST
भास्कर न्यूज | मदनगंज-किशनगढ़

शहर में पूर्ण चंद्रग्रहण बुधवार को शाम 5.21 से रात 8.45 बजे तक रहा। शहर में इसका प्रभाव 3 घंटे 24 मिनट तक रहा। चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहे। मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भजन कीर्तन चलते रहे। इससे पूर्व सुबह 8:21 बजे सूतक लग गया। लोगों ने मंदिरों के कपाट बंद कर दिए। धार्मिक मान्यता वाले लोगों ने चंद्रमा नहीं देखा। उन्होंने रात 8.30 बजे बाद कपाट खुलने पर स्नान कर मंदिरों में भगवान के दर्शन किए। वहीं धार्मिक मान्यताओं पर विश्वास नहीं करने वाले लोगों ने ब्लड मून को देखा और मोबाइलों से उसकी तस्वीरें खींची।

ज्योतिषविद रविकांत शास्त्री और पंडित राजेश कुमार दाधीच के अनुसार ग्रहण का सूतक सुबह 8.21 से शुरू हो गया। सूतक लगने से पहले ही मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों के कपाट बंद हो गए। पूजा अर्चना बंद कर दी गई। लोग घरों में भगवान के भजन कीर्तन करते रहे। धार्मिक मान्यता के अनुसार सुबह 8.21 के बाद भगवान ने विभिन्न मंदिरों के शयन कक्षों में विश्राम किया। इधर पूर्ण चंद्रग्रहण पर चांद नारंगी रंग का नजर आया लेकिन खगोलीय भाषा में इसे ब्लड मून कहा गया। यह चंद्रमा सुपरमून की श्रेणी में भी शामिल है जो सामान्य दिनों की तुलना में 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत ज्यादा चमकता हुआ दिखाई दिया। 35 साल के लंबे अंतराल के बाद पूर्ण चंद्रग्रहण और ब्लड मून एक साथ नजर आया जिसे देखने के लिए लोगों की छतों पर भीड़ रही। इससे पहले यह खगोलीय घटना 30 दिसंबर 1982 को घटी थी। इसके बाद ब्लड मून 31 दिसंबर 2028 अौर फिर 31 जनवरी 2037 को दिखेगा।

मंदिर में भगवान ने किया शयन

सूतक के बाद से रात 8.45 बजे तक भगवान शयन कक्ष में विश्राम किया। इस दौरान पूजा अर्चना, प्रतिमा स्पर्श आदि वर्जित रहा। मोक्षकाल के बाद मंदिर को धोकर पवित्र किया गया। मंदिर के पुजारियों के अनुसार भगवान को पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद रात 9 बजे शृंगार आरती की गई। भोग आरती रात 11.45 बजे की गई। भजन-कीर्तन दिनभर चलते रहे।

35 साल बाद एक साथ नजर आए पूर्ण चंद्रग्रहण व ब्लड मून

मदनगंज किशनगढ़. चंद्र ग्रहण के कारण बुधवार को बंद रहे मंदिर के कपाट।

यह रहा स्पर्श और मोक्षकाल






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