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अांचल में पलते शिशु और मां की सेहत के लिए 24 घंटे मिलेगा अमृत कवच

नवजात के जन्म के साथ ही उसे गोल्डन अवर में मां का दूध पिलाने और किन्हीं कारणों से मां के दूध की उपलब्धता नहीं होने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 18, 2018, 04:30 AM IST

अांचल में पलते शिशु और मां की सेहत के लिए 24 घंटे मिलेगा अमृत कवच
नवजात के जन्म के साथ ही उसे गोल्डन अवर में मां का दूध पिलाने और किन्हीं कारणों से मां के दूध की उपलब्धता नहीं होने जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए जिले के दो कस्बों में ‘आंचल अमृत कक्ष’ की स्थापना की जाएगी।

ये कक्ष हर सुविधा से युक्त होंगे तथा एक नर्सिंगकर्मी या यशोदा 24 घंटे यहां उपलब्ध रहेंगे तथा प्रसूता को किसी तरह की कोई परेशानी न हो। बच्चों की मृत्युदर के आंकड़ों को रोकने के लिए यह प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि मरने वाले हर 100 नवजात में से 22 को बचाया जा सके। साथ ही कुपोषण को जड़ मूल से समाप्त करना और जच्चा-बच्चा का संपूर्ण भविष्य सुनिश्चित करना भी इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रहेगा। राज्य में 25 जगह आंचल अमृत कक्ष बनेंगे, जिसमें जिले के किशनगढ़ और केकड़ी के राजकीय अस्पताल में इन्हें बनाया जाएगा। इसके लिए जगह का चयन करते हुए नक्शा स्वीकृत हो गया है।

जुलाई में इसके टेंडर हो जाएंगे तथा दिसंबर तक इसके लोकार्पण प्रस्तावित है। इस पर करीब 16 लाख रुपए खर्च होंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के राज्य स्तरीय सलाहकार योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि यह आंचल कक्ष किसी फाइव स्टार होटल के कमरे से कम नहीं होगा। सभी मेडिकल सुविधाओं के साथ ही प्रसूता की निजता का पूरा ध्यान रखा जाएगा और साथ ही उसे पारिवारिक, आध्यात्मिक और वात्सल्यपूर्ण वातावरण उपलब्ध करवाया जाएगा।

किशनगढ़ और केकड़ी में बनेंगे आंचल अमृत कक्ष, गोल्डन अवर में नवजात को मिल सकेगा मां का दूध और वात्सल्यपूर्ण वातावरण

प्रसव के तुरंत बाद आंचल अमृत कक्ष में पहुंचेगा जच्चा-बच्चा, एक जीएनएम व 4 यशोदा 24 घंटे देंगी ड्यूटी

कटे होंठ, अपरिपक्व शिशु को मिलेगा उपचार

प्रसव के तुरंत बाद लेबर रूम से जननी को आंचल अमृत कक्ष में शिफ्ट किया जाएगा। यहां प्रयास रहेगा कि नवजात के जन्म के एक घंटे के भीतर यानी गोल्डन अवर में उसे मां का दूध पिला दिया जाए। कक्ष में मौजूद यशोदा और अन्य नर्सिंग स्टाफ की ओर से इस बारे में जननी को प्रशिक्षित भी किया जाएगा। साथ ही अपरिपक्व शिशु, कटे होंठ, अविकसित या कटे-फटे निप्पल, नली से दुग्धपान एवं जननी के दूध कम बनने और ज्यादा दुग्ध स्राव सहित अन्य परिस्थितियों में उपचार व सहायता दी जाएगी। अन्य कारणों से भी मां के दूध से वंचित बच्चों को भी आंचल मदर मिल्क बैंक से दूध उपलब्ध करवाया जाएगा।

किशनगढ़ के यज्ञनारायण अस्पताल में आंचल अमृत कक्ष संबंधी जानकारी लेने के दौरान महिला वार्ड का अवलोकन करते योग गुरु अग्रवाल व डॉक्टर्स।

आंचल अमृत कक्ष के लिए जुलाई में होंगे टेंडर।

दिसंबर तक लोकार्पण संभावित, 16 लाख खर्च होंगे।

नवजात को जन्म के एक घंटे के भीतर मिलेगा मां का दूध।

एक जीएनएम और 4 यशोदा 24 घंटे अलग-अलग पारियों में ड्यूटी देंगे।

परामर्श और प्रशिक्षण के लिए जननी को कम से कम एक घंटे का समय देना होगा।

ऐसा होगा आंचल अमृत कक्ष

योग गुरु अग्रवाल के अनुसार आंचल अमृत कक्ष घर के ड्राइंग रूम के समान सुंदर होगा। इसमें 4 आईसीयू बैड एवं सोफा सेट रहेगा। कमरे की दीवारों पर स्तनपान, जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य से संबंधित करने योग्य एवं निषेध योग्य बातें लिखे पोस्टर लगे रहेंगे। आवश्यकतानुसार 3 इलेक्ट्रिकल ब्रेस्ट पंप, मैनुअल ब्रेस्ट पंप मय 20 अतिरिक्त बोतल, मल्टी फंक्शनल स्टरलाइजर, डीप फ्रीजर, होट एंड कोल्ड वाटर डिसपेंसर, टीवी आदि मौजूद रहेंगे।

इस तरह होगा काम

जच्चा-बच्चा को प्रसव के तुरंत बाद आंचल अमृत कक्ष में स्थानांतरित किया जाएगा। एक जीएनएम और 4 यशोदा 24 घंटे अलग-अलग पारियों में ड्यूटी देंगे। परामर्श और प्रशिक्षण के लिए जननी को कम से कम एक घंटे का समय देना होगा। जरूरत के अनुसार रिश्तेदारों को भी परामर्श दिया जाएगा। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ को प्रभारी चिकित्सा अधिकारी के रूप में कक्ष का अतिरिक्त काम सौंपा जाएगा। जीएनएम को नर्सिंग प्रभारी बनाया जाएगा। प्रसूता को लेबर रूम से तुरंत कक्ष तक लाने एवं बाद में पीएनसी वार्ड तक ले जाने की जिम्मेदारी लेबर रूम में कार्यरत कर्मचारी की होगी।

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