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कलेक्टर के आदेश पर जांच कमेटी ने लिये बयान, आठ में से तीन महिलाएं ही पहुंचीं

भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़ राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में नसबंदी के लिए महिलाआें को एनेस्थिसिया देने के बाद...

Dainik Bhaskar

Jun 27, 2018, 04:35 AM IST
कलेक्टर के आदेश पर जांच कमेटी ने लिये बयान, आठ में से तीन महिलाएं ही पहुंचीं
भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में नसबंदी के लिए महिलाआें को एनेस्थिसिया देने के बाद बिना ऑपरेशन किए छोड़कर चले जाने के मामले में जिला कलेक्टर के आदेश पर मंगलवार को दो सदस्यीय जांच कमेटी ने संबंधित महिला डॉक्टर, स्टाफ व तीन पीड़ित महिलाओं के बयान लिये और पीएमओ को रिपोर्ट साैंप दी जिसे सीएमएचओ, जॉइंट डायरेक्टर को भिजवा दिया गया। जांच के दौरान अस्पताल स्टाफ रिकॉर्ड में होने के बावजूद महिलाओं को बेहोश किए जाने से इनकार करता रहा और मरीजों से भी यही कहलवाने की कोशिश करता रहा।

उल्लेखनीय है कि गत सोमवार को यज्ञनारायण अस्पताल में आठ महिलाआें काे नसबंदी ऑपरेशन के लिए एनेस्थीशिया दिया गया उसके बाद जानकारी मिली कि आॅपरेशन के लिए जिस मशीन की जरूरत है वह खराब है। इस पर डॉ. अंजना गुप्ता अरांई में पूर्व निर्धारित परिवार कल्याण शिविर में चली गईं। उधर, अस्पताल में महिलाएं अर्द्धचेतन महिलाओंं को उनके परिजन संभालते रहे मगर स्टाफ ने संवेदनहीनता दिखाते हुए सुध नहीं ली। मंगलवार को अजमेर जिला कलेक्टर आरती डोगरा ने जांच के आदेश दिए। सीएमचओ ने पीएमओ को जांच कराकर तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए है। इस पर पीएमओ ने दो डॉक्टरों की जांच कमेटी बनाकर जांच शुरू की। जांच कमेटी ने आठ लोगों के बयान दर्ज किए गए जिनमें संबंधित डॉक्टर भी शामिल हैं। जांच रिपोर्ट पीएमओ को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।

बेहोशी के बाद बिना नसबंदी किए डाॅक्टर के चले जाने का मामला, रिकाॅर्ड में होने के बावजूद मरीजों ने कहा, एनेस्थिसिया के इंजेक्शन नहीं लगाए, संयुक्त निदेशक को सौंपी रिपोर्ट

गलती पर पर्दा डालने की कोशिश

मरीजों ने बयान में किसी तरह का इंजेक्शन नहीं लगने, एनेस्थिसिया नहीं लगने की बात बयानों में कही। जबकि अस्पताल के रिकॉर्ड में अर्द्धचेतन, सुन्न करने वाले इंजेक्शन दर्ज है। मरीजों को इस रिकॉर्ड के बारे में बताया तब मरीज कूल्हे पर इंजेक्शन लगने की बात भी स्वीकार करने लगे। मरीज ने इंजेक्शन लगने के बाद किसी तरह की परेशानी नहीं होने की बात कही, वहीं एक मरीज ने इंजेक्शन के बाद चक्कर आना, जी घबराने की बात कही। बाद में बिल्कुल ठीक होने की बात है। साथ ही मरीजों ने ऑपरेशन नहीं होने से किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने की बात भी कही।

तीन मरीजों के लिए बयान, बाकी नहीं आए

मामले की जांच के लिए डिप्टी कंट्रोलर डॉ. पीसी पाटनी और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन शर्मा की जांच कमेटी का गठन किया। दोनों डॉक्टरों ने सुबह से ही मरीजों को बुलाना शुरू कर दिया। करीब तीन मरीज और उनके परिजन अस्पताल पहुंचे जिनके बयान दर्ज किए गए। जबकि अन्य मरीज नहीं आए।

स्टाफ के भी दर्ज किए बयान

जांच कमेटी ने स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजना गुप्ता, ऑपरेशन थियेटर में कार्यरत भाटी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, वार्ड लेडी के बयान दर्ज हुए। जिसमें गुप्ता से अरांई कैम्प में डयूटी होने के बावजूद अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने और देरी से कैम्प में पहुंचने के बारे में भी जानकारी ली गई। डॉ. गुप्ता ने इमरजेंसी केस होने और मरीजाें के हित को देखते हुए ऑपरेशन करने का निर्णय लेने की बात कही। साथ ही बताया कि ऑपरेशन से पहले लेप्रोस्कॉप मशीन खराब थी। इस कारण ऑपरेशन नहीं हो सके। सभी से अलग-अलग बयान दर्ज किए। कुल मिलाकर आठ लोगाें के बयान दर्ज कर रिपोर्ट पीएमओ को सौंप दी गई। पीएमओ ने रिपोर्ट को सीएमएचओ, ज्वाइंट डायरेक्टर को भेज दी है।

इनका कहना है


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