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सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र बड़ों को दूध, छोटे ताक रहे हैं मुंह

विकास टिंकर |मदनगंज-किशनगढ़ राज्य सरकार ने बच्चों को तंदरुस्त बनाने के लिए सरकारी स्कूलों में अन्नपूर्णा दुग्ध...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 08, 2018, 04:45 AM IST

सरकारी स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र बड़ों को दूध, छोटे ताक रहे हैं मुंह
विकास टिंकर |मदनगंज-किशनगढ़

राज्य सरकार ने बच्चों को तंदरुस्त बनाने के लिए सरकारी स्कूलों में अन्नपूर्णा दुग्ध योजना को तो लागू कर दिया, लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई करने वाले नौनिहालों को इस योजना में शामिल नहीं किया है। सरकारी स्कूलों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ाई करने वाले बच्चे अपने बड़े भाइयों को दूध पीते टकटकी लगाए देखते रहे हैं कि आखिर उन्हें दूध क्यों नहीं पिलाया जा रहा है। जबकि शुरूआत में तीन साल से छह साल तक के बच्चों को सबसे ज्यादा दूध की जरूरत होती है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों में दूध की शुरुआत होनी चाहिए। थी। उसके बाद सरकारी स्कूलों में इसे शुरू किया जाता तो बेहतर होता। अभिभावकों ने सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को भी अन्नपूर्णा दुग्ध योजना में शामिल करने की मांग की हैं। सरकारी स्कूलों में कक्षा 8वीं में पढ़ाई करने वाले बच्चों को तंदुरूस्त बनाने के लिए 2 जुलाई से सप्ताह में तीन दिन दूध पिलाने का अभियान शुरू कर दिया, लेकिन इस योजना में आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल नहीं करने से यहां पढ़ने वाले नौनिहाल दूध के लिए तरस रहे है। अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र वर्तमान में सरकारी स्कूल परिसर में ही चल रहे है। आंगनबाड़ी बच्चे स्कूली बच्चों के साथ ही प्रार्थना में शामिल होते है। सरकारी नियम के मुताबिक प्रार्थना सभा के दौरान ही बच्चों को दूध पिलाया जाता है। सबसे ज्यादा विकट स्थिति पैदा हो जाती है जब बच्चों को दूध पिलाया जाता है और आंगनबाड़ी के बच्चों को नहीं। ऐसे में आंगनबाड़ी के बच्चे अपने बड़े भाइयों को दूध पीते ताकतेे हंै।

अन्नपूर्णा दुग्ध योजना में अनदेखी से बड़ी समस्या, उपखंड के 278 में से 150 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी स्कूलों में चल रहे हैं, केंद्रों पर 6 साल के तीन हजार से ज्यादा बच्चे नामांकित

किशनगढ़- आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल नहीं करने से दूध के लिए मुंह ताकते है नोनिहाल। सरकारी स्कूल के बच्चे पी रहे है दूध। (फाइल फोटो)

आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को भी शामिल करें

अभिभावकों ने बताया कि बच्चों की आंगनबाड़ी केंद्र पहली सीढ़ी है। यहां से ही बच्चे अक्षर ज्ञान सीखकर स्कूल जाने के लिए तैयार होते हैं। ऐसे में सरकार ने अन्नपूर्णा दुग्ध योजना में आंगनबाड़ी केंद्रों को शामिल नहीं कर इनमें पढ़ने वाले बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार किया है। जबकि सबसे ज्यादा दूध की जरूरत आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले बच्चों को है। 3 साल की उम्र से ही बच्चों का शारीरिक व मानसिक विकास होता है। ऐसे में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण उम्र यही होती है। उन्होंने सरकार से आंगनबाड़ी केंद्रों को भी दूध योजना में शामिल कर नन्हे बच्चों को लाभान्वित करने की मांग की है।

0 ये 6 साल तक के बच्चों के लिए दूध सबसे महत्वपूर्ण होता है। वैसे दूध प्रत्येक व्यक्ति के लिए फायदेमंद है। बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए दूध बेहद जरूरी है। दूध से कैल्शियम, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता सहित हड्डियां मजबूत होती है। दूध सबसे गुणकारी माना जाता है। डॉ. मनमोहन शर्मा, शिशु रोग विशेषज्ञ

एक ओर जहां कक्षा एक से 8 तक बच्चों के लिए दूध की व्यवस्था की गई है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को दूध के लिए कोई दिशा निर्देश प्रदान नहीं किए गए। आंगनबाड़ी केन्द्रों का समायोजन विद्यालय परिसर में ही किया जा चुका है। आंगनबाड़ी बच्चों के लिए भी दूध की व्यवस्था करनी चाहिए। अनुराधा सेठ, सीडीपीओ, किशनगढ़

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