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आधार से सुलझा ब्लाइंड मर्डर, अब सभी थानों में लगेगी मशीन, फिंगर प्रिंट से होगी पहचान

विकास टिंकर| मदनगंज-किशनगढ़ हाइटेक होने की दिशा में पुलिस लगातार आगे बढ़ रही है। अब पुलिस थानों में फिंगर प्रिंट...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 05, 2018, 04:50 AM IST

आधार से सुलझा ब्लाइंड मर्डर, अब सभी थानों में लगेगी मशीन, फिंगर प्रिंट से होगी पहचान
विकास टिंकर| मदनगंज-किशनगढ़

हाइटेक होने की दिशा में पुलिस लगातार आगे बढ़ रही है। अब पुलिस थानों में फिंगर प्रिंट आधार लिंक मशीन लगाने की तैयारी है। मशीन पर अंगूठा या फिंगर लगने से मृतकों की पहचान होने के साथ ही अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। विदेशों की तर्ज पर पुलिस फिंगर प्रिंट आधार लिंक मशीन गुमनाम लोगों का पता लगाकर उनके अपनों तक पहुंचा सकेगी।

जानकारी के अनुसार उपखंड में तीन साल में 27 शवों की पहचान नहीं हो पाई है। इस मशीन के जरिये पुलिस मृतकों की पहचान कर सकेगी। राज्य के सभी पुलिस थानों में जल्द फिंगर प्रिंट आधार लिंक मशीनें लगेंगी। इसके लिए स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से पुलिस मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है।

संभवत: नवंबर-दिसंबर तक सभी थानों में मशीनें लगा दी जाएंगी। इसके आधार पर पुलिस थानों में आधार बॉयोमेट्रिक मशीनें नजर आएंगी। यह कदम उन केसों की संख्या बढ़ने के बाद उठाया गया है जब अपराधियों, मृतकों की पहचान में आसानी से नहीं हो पा रही है। गंभीर केसों में भी पुलिस पुराने तरीकों से ही जांच कर रही है।

अज्ञात मृतकों की पहचान करने में पुलिस को मिलेगी मदद

उपखंड में 3 साल में 27 लावारिस मृतकों की नहीं हो पाई पहचान

सैकड़ों जिंदगियां हो चुकी हैं गुमनाम, परिजनों से मिलाने में मिलेगी मदद

एससीआरबी के प्रभारी पंकज चौधरी का कहना है कि मेड़ता में एक मृतका की पहचान करना मुश्किल हो गया था। ऐसे अनेक केस पुलिस के पास लंबित है। मेड़ता में मृतका की पहचान आधार से होने पर पुलिस काे काफी मदद मिली थी। इसी आधार पर गुमशुदा बच्चों के मामलों में भी पुलिस थाने में बैठे बैठे ही किसी भी व्यक्ति और उसके परिजनों का पता लगा सकेगी। हर साल सैकड़ों जिंदगियाें की पहचान नहीं हो पाने के कारण लावारिस में अंतिम संस्कार कराया जाता है।

इनका कहना है

बायोमेट्रिक मशीन से नागौर के मेड़ता में हत्या का मामला सुलझाया गया है। फिंगर प्रिंट मशीन से लापता लोगों की पहचान, मृतकों की पहचान करने में आसानी होगी। साथ ही अपराधियों तक पहुंचने में भी पुलिस को मदद मिलेगी। बॉयोमेट्रिक मशीनें खरीदने व थानों को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। पंकज चौधरी, प्रभारी, स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो

नागौर में सुलझा था ब्लाइंड मर्डर, वहां से मिला आइडिया

राज्य के पुलिस थानों में आधार बायोमेट्रिक मशीनें लगाने का आइडिया पुलिस को नागौर से मिला। नागौर के मेड़ता सिटी में गुरु देवनगर में 27 अ€ क्टूबर 2017 को पुलिस को एक युवती का आधा जला शव मिला था। मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को मर्डर केस लग रहा था। मृतका की पहचान नहीं हो पा रही थी। नागौर पुलिस ने राज्य के सभी थानों से पड़ताल की तो पता चला कि अजमेर के पुष्कर, पाली व मेड़ता से उस दिन 3 महिलाएं लापता हुई थी। मेड़तासिटी में परिजनों की ओर से शिनाख्त कराई तो परिजन शिनाख्त नहीं कर सके। बाद में पुलिस ने आधार कार्ड की परिजनों की जानकारी ली। मृतक का फिंगर प्रिंट आधार लिंक मशीन पर थंब इंप्रेशन से मिलान करवाया तो मृतका की शिनाख्त हो गई। पुलिस ने आरोपी को पकड़कर मामला सुलझा लिया।

इस साल सभी थानों के साथ एसपी ऑफिस में भी लगेंगी मशीन

स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने पुलिस हैड क्वार्टर को 1 हजार बॉयोमेट्रिक मशीनें खरीदने व थानों को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। इसी के आधार पर हजार मशीनें लगाई जाएगी। सब कुछ ठीक रहा तो जिले और किशनगढ़ सीओ सर्किल के 7 थानों में मशीन लगाई जाएगी। यह मशीनों थानों के साथ साथ एसपी कार्यालय में भी लगेगी। एससीआरबी के अनुसार भारत में राजस्थान पहला ऐसा राज्य होगा। वर्तमान में देश में करीब सौ करोड़ लोगों के पास आधार है।

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