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तीस सितंबर के बाद लूम लगाना होगा महंगा, 18% होगा जीएसटी

Kishangarh News - श्याम मनोहर पाठक| मदनगंज-किशनगढ़ एक्सपोर्ट प्रमोशन केपिटल गुड्स (ईपीसीजी) स्कीम की समयावधि 30 सितंबर को समाप्त हो...

Dainik Bhaskar

Jul 22, 2018, 04:50 AM IST
तीस सितंबर के बाद लूम लगाना होगा महंगा, 18% होगा जीएसटी
श्याम मनोहर पाठक| मदनगंज-किशनगढ़

एक्सपोर्ट प्रमोशन केपिटल गुड्स (ईपीसीजी) स्कीम की समयावधि 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। इसके बाद लूम इंपोर्ट करने पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। इसका असर किशनगढ़ पावरलूम उद्योग पर अभी से पड़ने लगा है। वर्तमान में एक्सपोर्ट प्रमोशन केपिटल गुड्स योजना में लूम मंगाने पर 18 प्रतिशत जीएसटी नहीं लगती है। इसके बदले इंपोर्टेड लूम पर जितनी ड्यूटी चुकाई जा रही है उसके छह गुणा माल छह साल में एक्सपोर्ट करना होगा। दरअसल, यह योजना एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी। इंपोर्टेड माल में ड्यूटी की छूट मिलने के कारण उद्यमियों को इसके बराबर एक्सपोर्ट करना पड़ता है।

किशनगढ़ पावरलूम एसोसिएशन के महासचिव दीपक शर्मा का कहना है कि लूम इंपोर्ट करने का टाइम पीरियड छह से 10 महीने होता है। ईपीसीजी की अंतिम तिथि 30 सितंबर होने के कारण पिछले करीब 6 महीने में नए लूमों के ऑर्डर नहीं दिए गए हैं। उद्यमियों को चिंता है कि यदि अवधि नहीं बढ़ी तो उन्हें इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी चुकानी होगी। मालूम हो कि किशनगढ़ में 150 लूम इंपोर्ट प्रोसेस में चल रही है। अधिकाधिक व्यापारी इंपोर्ट प्रोसेस में लूम लगाना चाहते है पर टाइम पीरियड नहीं होने के कारण रुचि नहीं ले रहे हैं। किशानगढ़ से पचास से अधिक उद्यमी कतार में हैं। शर्मा ने बताया कि इंपोर्टेड लूम पर जितनी ड्यूटी चुकाई जा रही है उसका 6 गुणा माल 6 साल में एक्सपोर्ट करना होता है इसलिए लूमें इंपोर्ट करने पर नहीं लगती है ड्यूटी। शर्मा ने कहा कि राजस्थान के कपड़ा उद्योगपतियों को भी गुजरात, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश एवं तमिलनाडु की तर्ज पर कपड़ा उद्योग विकसित करने के लिए राजस्थान में सुविधाएं नहीं मिल रही जो मिलनी चाहिए।

किशनगढ़ में उद्योगों के सामने समस्याएं








यह हुआ आसान







अभी तक है जीरो प्रतिशत ड्यूटी

महासचिव शर्मा ने बताया कि किशनगढ़ में उद्योगों के विस्तार की गति रुक गई है क्योंकि ईपीसीजी में मशीनरी का इंपोर्ट होता था वह सुविधा जीरो प्रतिशत ड्यूटी पर थी। ईपीसीजी बंद होने पर किशनगढ़ कपड़ा मंडी के लिए यह सबसे बड़ा झटका होगा। 30 सितंबर से पहले तक इसकी अवधि नहीं बढ़ाई गई तो आगे के एक साल के प्रोजेक्ट रुक सकते हैं। अभी कई उद्यमियों ने लूमें इंपोर्ट करने की प्लानिंग कर रखी हैं लेकिन वे ईपीसीजी की समयावधि बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। अगर समयावधि नहीं बढ़ी तो लूम इंपोर्ट करना उद्यमियों को महंगा पड़ेगा।

पावरलूम उद्योग की वर्तमान स्थिति पर एक नजर

किशनगढ़, दाता, गेगल व खोड़ा गणेश रोड पर पावरलूम कारखाने संचालित हो रहें है।







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