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30 से ज्यादा इमारतों में लिफ्ट, हादसे से बचाने के लिए रेस्क्यू वाहन तक नहीं

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़ शहर में तीन दिन पहले प्रोविजन स्टोर की दूसरी मंजिल पर लिफ्ट में गर्दन टूटने से...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 23, 2018, 04:50 AM IST

30 से ज्यादा इमारतों में लिफ्ट, हादसे से बचाने के लिए रेस्क्यू वाहन तक नहीं
भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़

शहर में तीन दिन पहले प्रोविजन स्टोर की दूसरी मंजिल पर लिफ्ट में गर्दन टूटने से गुड्‌डू सामरिया (30) की दर्दनाक मौत की घटना ने सभी को हिलाकर रख दिया। जवान मौत से पूरा परिवार सदमे में चला गया।

उपखंड में लिफ्ट में मौत का इस तरह का पहला मामला है। लेकिन युवक की मौत के बाद सवाल उठने लगे है कि शहर में लिफ्ट में ऐसी घटनाएं हो जाएं तो सुरक्षा के लिए हमारे पास पर्याप्त इंतजाम तक नहीं है। शहर में शहर में करीब 30 से ज्यादा इमारतें ऐसी हैं जिनमें लिफ्ट की सुविधा है, लेकिन रेस्क्यू व्हीकल ना तो अग्निशमन विभाग के पास है, और ना ही नागरिक सुरक्षा व होमगार्ड के पास। अधिकांश मॉल में खुली लिफ्ट चल रही हैं जो महज लोहे की एंगल पर टिकी है और उससे सामान ऊपर लाया ले जाया जाता है। उसी लिफ्ट में तीन दिन पूर्व युवक मौत का शिकार हुआ है। इसके अलावा मॉल व अन्य ऊंची इमारतों में यदि आगजनी या लिफ्ट में फंसने जैसा कोई बड़ा हादसा होेता है तो लोगों के बचाव के लिए रेस्क्यू व्हीकल की अावश्यकता रहती है। लेकिन यह व्हीकल अब तक यहां संबंधित महकमों के पास नहीं है, ऐसे में यदि कोई घटना होती है तो सरकारी महकमें लचर नजर आएंगे।

30 से ज्यादा लिफ्ट

शहर में पिछले दस सालों में लिफ्ट का मार्केट तेजी से बढ़ा है। भास्कर ने जानकारी जुटाई तो सामने आया कि शहर में मॉल्स, प्राइवेट अस्पताल, होटल, निजी व सरकारी दफ्तर सहित अन्य करीब 30 ऊंची इमारतों में लिफ्ट लगी है। इनमें कई जगह गोदाम हैं जहां सामान रखने के लिए लिफ्ट बनाई गई है।

हादसों को नियंत्रित करने के लिए रेस्क्यू व्हीकल जरूरी : शहर की आबादी के हिसाब से कम से कम एक रेस्क्यू वाहनों की आवश्यकता है, लेकिन हमारे पास एक भी नहीं है। रेस्क्यू वाहन में लिफ्ट में फंसे लोगों और ऊंची इमारतों पर फंसे लोगों को बचाव कार्य के लिए अत्याधुनिक उपकरण लैस होते हैं।

लिफ्ट में इन बातों का रखें ध्यान

सामान लाने ले जानी की लिफ्ट में कभी यात्रा ना करें। काम करने वाले व्यक्ति खुली लिफ्ट में चढ़ने के बाद भीतर रहें और गर्दन या शरीर का कोई भी हिस्सा तब तक बाहर ना निकालें जब तक लिफ्ट निर्धारित मंजिल पर रुक ना जाएं।

लिफ्ट फंस गई है तो उसमें लगा अलार्म बटन दबाएं। जल्दबाजी और घबराहट में बहुत सारे बटन एक साथ नहीं दबाएं।

बगैर जानकारी के लिए कोई कमांड नहीं दें। ऐसा करने से लिफ्ट का सॉफ्टवेयर हैंग हो जाता है।

लिफ्ट यदि दो फ्लोर के बीच अटक गई है तो दरवाजा खोलने की कोशिश नहीं करें। यदि गेट खोल दिया तो लिफ्ट वहीं लॉक हो जाएगी, फिर ऊपर और नीचे नहीं आ जा सकेगी।

रेस्क्यू वाहन होना चाहिए। किशनगढ़ क्या अजमेर में भी यह उपलब्ध नहीं है। जबकि लिफ्ट में हादसे होने पर रेस्क्यू वाहन के जरिये नियंत्रित कर सकें। वैसे आजकल लिफ्ट के लिए एनओसी लेनी होती है। फिर भी रेस्क्यू वाहन अपनी जगह जरूरी है। मनोहर हाड़ा, फायर अधिकारी, अग्निशमन विभाग किशनगढ़

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