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सालाना खर्चा लाखों का, फिर भी हजारों बच्चों काे नहीं लग पाते टीके

भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़ टीकाकरण पर लाखाें रुपए खर्च होने के बावजूद भी हर साल हजारों की संख्या में बच्चे...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 08, 2018, 04:55 AM IST

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    भास्कर न्यूज| मदनगंज-किशनगढ़

    टीकाकरण पर लाखाें रुपए खर्च होने के बावजूद भी हर साल हजारों की संख्या में बच्चे वंचित रह जाते है। इनमें अधिकांश बच्चे शहरी इलाकों के है। ग्रामीण इलाके टीकाकरण के मामले में आगे है। बच्चों के पूर्ण टीकाकरण की जिम्मेदारी संबंधित आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यरत आशाओं को सौंपी गई है। किशनगढ़ में टीकाकरण पर हर साल दस से बीस लाख रुपए का खर्चा आता है। बावजूद इसके हर साल एक से दो हजार बच्चे वंचित रह जाते है। चिकित्सा विभाग की माने तो ग्रामीण इलाकों में तकरीबन हर बच्चे का टीकाकरण हाे जाता है। आशा सहयोगिनी पर 100 रुपए बतौर प्रोत्साहन दिए जाते हैं। लेकिन शहरी इलाकों में कई बच्चे वंचित रह जाते हैं। हालांकि फरवरी 2017 में लक्ष्य के करीब दवाइयां पिलाई गई। लेकिन फिर भी एक हजार के आसपास बच्चे छूट ही जाते हैं।

    सात जानलेवा बीमारियां व उनसे बचाव के टीके

    जानलेवा बीमारियों में टीबी से बचाव के लिए बीसीजी का टीका बच्चे के जन्म के तुरंत बाद लगाया जाता है। साथ ही पोलियो निरोधक खुराक भी दी जाती है। गलघोटू, कालीखांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी से बचाव के लिए पेंटावेलेंट का टीका क्रमश: डेढ़, ढाई व साढ़े तीन महीने पर लगाए जाते हैं। खसरे से बचाव के लिए बच्चे को 9 महीने पर मीजल्स का टीका और इसके साथ ही विटामिन-ए की खुराक भी दी जाती है। इसी तरह बच्चे के 18 महीने का होने पर डीपीटी, पोलियो, मीजल्स की बूस्टर खुराक दी जाती है।

    टीकाकरण कहां और कब!

    एक हजार की आबादी पर एक आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया है जहां महीने में एक बार टीकाकरण किया जाता है। इसी तरह पीएचसी और सब सेंटर्स पर प्रत्येक महीने का चौथा गुरुवार टीकाकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। अस्पताल एवं सीएचसी पर रोजाना टीकाकरण किया जाता है। आमजन आशा सहयोगिनी एवं एएनएम से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    इनका कहना है

    सभी बीसीएमओ एवं आरसीएचओ को टीकाकरण से वंचित बच्चों को ट्रेस आउट कराने के निर्देश दिए हैं। यह कार्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं आशा सहयोगिनियों की मदद से किया जाएगा। टीकाकरण में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। डॉ. के. के. सोनी, सीएमएचओ, अजमेर

    शहरी क्षेत्राें में टीकाकरण के आंकड़े ग्रामीण इलाकों से कम, आशा सहयोगिनियों की कमी को कारण बता रहे हैं चिकित्सा विभाग के अधिकारी

    इस तरह समझें टीकाकरण पर खर्च का गणित

    उपखंड में 278 आंगनबाड़ी केंद्र है। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में 177 व शहरी क्षेत्र में 101 शहरी क्षेत्र में है। केंद्रों तक वैक्सीन पहुुंचाने के लिए प्रति सेंटर 75 रुपए दिए जाते है। डिपो से सेंटर तक वैक्सीन पहुंचाने पर एक दिन का खर्च 20 हजार 850 रुपए आता है। तो एक साल में लाखों रुपए खर्च हो जाते है। इसी तरह महीने में एक दिन मातृ एवं शिशु दिवस (एमसीएच-डे) भी मनाया जाता है। इस दिन टीकाकरण के लिए बच्चों को केंद्र तक लाने पर प्रत्येक आशा को 150 रुपए बतौर प्रोत्साहन दिए जाते हैे। इस हिसाब से एक एमसीएच-डे पर प्राेत्साहन राशि के रूप में लाखों रुपए खर्च हो जाते है। पूर्ण टीकाकरण पर प्रति बच्चा 100 रुपए भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दिए जाते है। इस तरह साल में दस से बीस लाख रुपए का खर्च बैठ जाता है। इसके अलावा वर्ष में दाे बार विशेष टीकाकरण शिविर, जिन इलाकों में आंगनबाड़ी केंद्र/सब सेंटर नहीं है या दूर है वहां 3-4 महीने में एक बार टीकाकरण शिविर लगाए जाते है। टीकाकरण के प्रचार-प्रसार, वैक्सीन के डिपो तक पहुंचने सहित कईं और खर्चे भी हैं। टीकाकरण को सफल बनाने में जुटे स्टाफ का वेतन तथा प्रचार प्रसार पर होने वाला खर्च एवं टीकाकरण वैक्सीन का खर्च अलग है।

    आंकड़ोें की जुबानी

    वर्ष लक्ष्य पूरा हुआ छूटा

    फरवरी 2015 61 हजार 263 60 हजार 101 1 हजार 162

    जनवरी 2015 61 हजार 263 60 हजार 501 762

    जनवरी 2016 60 हजार 201 59 हजार 80 1 हजार 121

    फरवरी 2017 61 हजार 263 60 हजार 25 1 हजार 238

    फरवरी 2018 61 हजार 263 60 हजार 500 763

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