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डिस्कॉम मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर शॉर्ट सर्किट से आग, बजट और टेक्सेशन की फाइलें जलीं, डाटा सुरक्षित

अजमेर डिस्कॉम के मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर शनिवार सुबह करीब 6 बजे भीषण आग लग गई। आग से लेखा शाखा, परिवेदना शाखा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 01, 2018, 04:55 AM IST

  • डिस्कॉम मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर शॉर्ट सर्किट से आग, बजट और टेक्सेशन की फाइलें जलीं, डाटा सुरक्षित
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    अजमेर डिस्कॉम के मुख्यालय की तीसरी मंजिल पर शनिवार सुबह करीब 6 बजे भीषण आग लग गई। आग से लेखा शाखा, परिवेदना शाखा पूरी तरह जलकर खाक हो गई। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग काबू पाया गया। सुबह का समय और शनिवार का अवकाश होने के कारण मुख्यालय में कर्मचारियों की मौजूदगी नहीं थी, इसीलिए कोई जनहानि नहीं हुई। आग लगने का कारण प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जांच के लिए कमेटी गठित की गई है, जो 24 घंटे में रिपोर्ट देगी। करीब 20 लाख के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

    शनिवार सुबह 6 बजे डिस्कॉम के सिक्योरिटी गार्डों को तीसरी मंजिल पर धुआं उठता दिखा। उन्होंने तुरंत बिजली बंद की और एमडी बीएम भामू और टीए मुकेश बाल्दी को सूचना दी। भामू सहित कई इंजीनियर तथा कर्मचारी साढ़े 6 बजे तक मुख्यालय में जमा हो गए। जब तक नगर निगम की दमकलें भी पहुंच गईं। दमकल कर्मचारियों के साथ एमडी बीएम भामू सहित मौके पर मौजूद कई इंजीनियर एवं कर्मचारी आग बुझाने में जुट गए। चूंकि आग से धुआं काफी हद तक फैल चुका था, इसलिए दम घुटने जैसी स्थिति होने लगी। आग बुझाने में नगर निगम की दमकल टीम, स्टेट डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स, अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने टीम वर्क के साथ काम किया। मौके पर सूचना पाकर कलेक्टर आरती डोगरा, एसपी राजेंद्र सिंह चौधरी, एडीएम सिटी अरविंद सेंगवा सहित अन्य कई अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

    घोर लापरवाही... बताए 60, गिनती में 38 ही निकले अग्निशमन यंत्र

    हादसे के दौरान सिविल इंजीनियरों की लापरवाही भी सामने आई। निगम के फायर ऑफिसर हबीब खान ने बताया कि डिस्कॉम भवन में अग्निशमन यंत्र काम कर रहे थे, मगर उनकी रफ्तार कम पाई गई। भास्कर ने जब एसई सिविल एमएस रावत, एक्सईएन वाईके बोलिया सहित अन्य इंजीनियरों से भवन में लगे अग्निशमन यंत्र की संख्या पूछी तो वे जवाब नहीं दे पाए। यहां तक कि एक्सईएन बोलिया को गिनकर इनकी संख्या बतानी पड़ी। पहले उन्होंने 60 बताया और बाद गिनकर इनकी संख्या 38 बताई। डिस्कॉम मुख्यालय में लगे स्प्रिंक्लर भी आग से फटकर फुहारों की तरह चलने लगे, मगर वे नाकाफी रहे। करंट की आशंका के चलते बिजली बंद कर दी गई, जिससे स्प्रिंक्लर भी बंद हो गए।

    दम घुटने की स्थिति, एमडी बेहोश होते बचे

    आग के धुएं से दम घुटने जैसी स्थिति हो गई। धुएं के कारण दमकल कर्मचारी भी आगे नहीं जा पा रहे थे। अंत में डिस्कॉम मुख्यालय के बाहर की तरफ लगे शीशों को तोड़कर धुआं बाहर निकाला गया। इधर, एमडी भामू सहित कई इंजीनियर तीसरी मंजिल पर आग बुझाने के लिए मदद करने पहुंच गए। धुएं से एमडी भामू बेहोश होते एवं गिरते-गिरते बचे। दमकल कर्मचारी बृजकिशोर शर्मा बेहोश हो गए। डिस्कॉम पीआरओ नरेश शर्मा का हाथ झुलस गया।

    आग की लपटें देख सहमे क्षेत्रवासी

    कमेटी 24 घंटे में देगी रिपोर्ट

    आग से रिकॉर्ड, कंप्यूटर, फर्नीचर, एसी, पंखे, फाेर सिलिंग, दरवाजे, बिजली केबल आदि जल गए। बजट और टैक्सेशन से संबंधित फाइलें भी जल गईं, लेकिन उनका डाटा कंप्यूटर में सुरक्षित है। प्रारंभिक तौर पर करीब 20 लाख का नुकसान बताया जा रहा है। एमडी बीएम भामू ने चीफ इंजीनियर वीएस भाटी, एडिशनल चीफ इंजीनियर एनएस निर्वाण तथा एसई सिविल एमके रावत की टीम गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

    मीटिंग का स्थान बदला | मुख्यालय में सुबह 10 बजे से सीनियर ऑफिसर्स की मीटिंग होनी थी। इसमें शामिल हाेने के लिए 12 जिलों से इंजीनियर भी अजमेर आ चुके थे। अंत में मीटिंग हाथीभाटा पावर हाउस में शिफ्ट की गई।

    टीम वर्क से पाया आग पर काबू

    आग लगने के कारण और नुकसान के आकलन के लिए कमेटी गठित की है, जो 24 घंटे में प्रारंभिक रिपोर्ट देगी। जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और डिस्कॉम परिवार के सभी सदस्यों के टीम वर्क से बड़े हादसे को टाला जा सका। लेखा शाखा का रिकॉर्ड एक लेपटॉप में सुरक्षित है। हालांकि कंपनी के खाते तैयार हो रहे थे, करीब दो महीने की मेहनत के बाद हमारी लेखा टीम सब कुछ सामान्य कर देगी। -बीएम भामू, एमडी, अजमेर डिस्कॉम

    भास्कर तत्काल

    300 से अधिक ऊंची इमारतें,पर एक भी हाइड्रोलिक लैडर नहीं

    अजमेर | शहर में करीब 300 से अधिक ऊंची इमारतें हैं लेकिन आग लगने की स्थिति में यदि इन इमारतों में लोग फंसे हैं तो उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं हैं। डिस्कॉम भवन में आग के दौरान एक के बाद एक दमकल तो मौके पर पहुंच गई लेकिन ऊंची इमारतों में आग बुझाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला हाइड्रोलिक लैडर प्लेटफार्म मौजूद नहीं होने के कारण जहां आग लगी ठीक उसी जगह पर पानी की बौछारें नहीं पहुंच सकीं। बाद में टाटा पॉवर ने स्ट्रीट लाइटें ठीक करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला लैडर प्लेटफार्म मुहैया करवाया। बतौर फॉयर ऑफिसर 5.50 करोड़ रुपए कीमत एरियल हाइड्रोलिक लैडर प्लेटफार्म की खरीद के लिए राज्य सरकार पैसे दिया गया था, लेकिन पैसा वापस मंगवा लिया गया।

    16 दमकलों ने 3 घंटे में पाया आग पर काबू

    सरकार ने खरीद का पैसा देकर ले लिया वापस

    बड़ा सवाल...क्यों नहीं बजा फॉयर अलार्म?

    विद्युत भवन का फॉयर फाइटिंग सिस्टम कितना दुरूस्त है, इसका अंदाजा आप उसके फॉयर अलार्म नहीं बजने से लगा सकते हैं। आग लगने आैर धुआं उठते ही सबसे पहले फॉयर अलार्म बजता है, लेकिन विद्युत भवन में यह अलार्म नहीं बजा। दमकल विभाग अब इसकी भी जांच कर रहा है कि आखिर फॉयर अलार्म क्यों नहीं बजा। आग लगने का प्रारंभिक करण शार्ट सर्किट माना जा रहा है। शार्ट सर्किट कैसे हुआ यह भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    आग पर काबू पाते दमकलकर्मी।

    देरी होती तो डिस्कॉम का 60 फीसदी हिस्सा होता चपेट में

    फॉयर ऑफिसर हबीब खान के मुताबिक निगम के अग्निशमन विभाग से 13 दमकल, किशनगढ़ से 2 आैर गेल इंडिया से 1 दमकल मंगवाई गई। अस्सिटेंट फॉयर आफिसर सहित 10 दमकलकर्मियों ने 3 घंटे मशक्कत कर आग पर काबू पाया। यदि आग बुझाने में देरी होती, तो भवन का करीब 60 फीसदी हिस्सा जल जाता।

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