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31 से पहले फाइल करें इनकम टैक्स रिटर्न, देरी पर लगेगा विलंब शुल्क

मदनगंज-किशनगढ़ | ऐसे करदाता जिनकी आय 2 लाख 50 हजार से अधिक है और जिन्हें अंकेक्षण (ऑडिट) नहीं करवाना है उनके लिए आयकर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 12, 2018, 04:55 AM IST

मदनगंज-किशनगढ़ | ऐसे करदाता जिनकी आय 2 लाख 50 हजार से अधिक है और जिन्हें अंकेक्षण (ऑडिट) नहीं करवाना है उनके लिए आयकर रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। सरकार ने इस अधिनियम में इस वर्ष से धारा 234 एफ जोड़ी है। इस धारा के अनुसार यदि करदाता अंतिम तिथि 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फाइल नहीं करता है तो 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल करने पर 5 हजार का विलंब शुल्क एवं 31 दिसंबर के बाद 10 हजार रुपए का विलंब शुल्क का भुगतान करना होगा। हालांकि छोटे करदाता जिनकी आय 5 लाख से कम है उनके लिए विलंब शुल्क एक हजार रुपए देना होगा। यह विलंब शुल्क करदाता को स्व निर्धारित कर के साथ भुगतान करना होगा। कई नौकरीपेशा व्यक्ति यह मानकर अपनी आयकर विवरणी दाखिल नहीं करते हैं कि उनका टीडीएस तो पूरा काटा जा चुका है यह गलत है। उनको भी देय तिथि से पूर्व आईटीआर फाइल करनी होगी अन्यथा उन्हें भी जुर्माना लगेगा।

अंतिम तिथि के आसपास हो सकती है परेशानी

रिटर्न फाइल करने के बाद एक कॉपी प्रिंट लेकर हस्ताक्षर करके सीपीसी बंगलौर भेजना होता है, इससे रिफंड आने में समय लगता है। तीव्र रिफंड/प्रोसेस के लिए अपनी आईटीआर को आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग या डीमेट से वेरिफाई कर सकते हैं। सामान्यत: रिटर्न की अंतिम तिथि के आसपास साइट पर अधिक दबाव के कारण इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की साइट का सर्वर डाउन हो जाता है, जिसके कारण करदाता की रिटर्न फाइल नहीं हो पाती और आखिर में इस देरी का खामियाजा उसे विलंब शुल्क का भुगतान कर उठाना पड़ता है। एकाउंटेंट के अनुसार सभी करदाताओं से अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते अपनी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का आग्रह किया है ताकि विलंब शुल्क की नौबत से बचा जा सके।

इस साल रिटर्न फार्म में महत्वपूर्ण बदलाव

चार्टर्ड एकाउंटेंट अभिषेक, क्षितिज के मुताबिक इस वर्ष रिटर्न फॉर्म में भी कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। इनमें वेतनभोगी करदाता जो आईटीआर-1 (सहज फॉर्म) भरते हैं उन्हें अब वेतन में मूल वेतन, भत्तों, कर योग्य अनु लाभों व कर मुक्त अनु लाभों को अलग अलग बताना होगा। व्यवसायी/पेशेवर जो धारा 44एडी/44एडीए में अपनी रिटर्न फॉर्म आईटीआर-4 (सुगम फॉर्म) में देंगे, उन्हें जीएसटी नंबर व जीएसटी में रिपोर्टेड टर्नओवर के साथ अपनी चिट्ठे की सभी मदों की राशि बतानी होगी। किराये की आय प्राप्त करने वाले करदाताओं को अब मकान संपत्ति से आय के संबंध में अधिक जानकारी रिटर्न फॉर्म में देनी होगी।

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