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आई टेस्ट वाली बी-स्कैन मशीन की आड़ में लिंग परीक्षण चिकित्सा विभाग ने अब रजिस्ट्रेशन कराना किया अनिवार्य

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़ भ्रूण जांच रोकने के लिए चिकित्सा विभाग की नजर अब अस्पतालों में लगी आंखों की जांच...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 28, 2018, 05:05 AM IST

आई टेस्ट वाली बी-स्कैन मशीन की आड़ में लिंग परीक्षण चिकित्सा विभाग ने अब रजिस्ट्रेशन कराना किया अनिवार्य
भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़

भ्रूण जांच रोकने के लिए चिकित्सा विभाग की नजर अब अस्पतालों में लगी आंखों की जांच करने वाली ‘बी-स्कैन मशीन’ पर भी रहेगी। विभाग को लंबे समय से सूचनाएं मिल रही थी कि इस मशीन का इस्तेमाल चोरी-छिपे लिंग परीक्षण में किया जा रहा था। प्रदेश के बीकानेर और महाराष्ट्र के पुणे में ऐसे मामले पकड़े जाने के बाद विभाग ने विशेषज्ञों से इसकी जांच-पड़ताल कराई तो साफ हो गया कि इस मशीन में प्रॉब बदलकर भ्रूण लिंग की जांच संभव है। इसी रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ने स्टेट पीसीपीएनडीटी सेल में सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों में इस्तेमाल की जाने वाली ‘बी-स्कैन मशीन’ को पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेते हुए इस मशीन का भी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पशु चिकित्सालय की सोनोग्राफी पर भी विभाग की मॉनिटरिंग की जाएगी। किशनगढ़ उपखंड में आई हॉस्पिटल, आई क्लीनिक की संख्या 4 है। वहीं पूरे जिले की बात करें तो 30 से ज्यादा आई हॉस्पिटल, क्लीनिक है। इन सभी सेंटरों की जांच की जाएगी।

सीएमएचओ डाॅ. के.के. सोनी ने बताया कि जिले के सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों को 7 दिन में पंजीयन कराने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण नहीं करवाने वाले संस्थानों पर पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत नियमानुसार कार्रवाई होगी। इसके अलावा इको कार्डियोलोजी व यूरोलोजी विभाग की मशीनें, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत अन्य भ्रूण जांच कर सकने वाली मशीनों को भी पंजीकृत किया जाएगा।

पशु चिकित्सालय की सोनोग्राफी मशीन पर भी रहेगी नजर

पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत पशु चिकित्सालय में लगी सोनोग्राफी मशीनों पर भी चिकित्सा विभाग की पूरी नजर रहेगी। इन मशीनों का पंजीयन जरूरी होगा। पीसीपीएनडीटी में पंजीयन नहीं होने की वजह से कोटा में पशु चिकित्सालय की सोनोग्राफी मशीन सीज कर दी गई थी। असल में यह मशीन जैसे ही आई तो चिकित्सा विभाग को सूचना मिली और बिना पंजीयन संचालित किए जाने पर इसे सीज कर दिया गया।

विशेषज्ञों से राय लेने के बाद किया फैसला : बी-स्कैन मशीन को एक्ट में लेने से पहले पीसीपीएनडीटी सेल ने जिलों में टीम भेजकर 65 आई सेंटरों पर जांच करवाई। जांच में इस मशीन से भ्रूण लिंग जांच की संभावनाओं को सही पाया गया। रिपोर्ट के बाद सरकार ने रेडियोलॉजी विशेषज्ञों से भी राय जानी तो यह बात साफ हो गई कि इस मशीन से भी लिंग परीक्षण संभव है।

प्रॉब बदलने से गलत इस्तेमाल संभव : डॉक्टरों के मुताबिक आंखें जांचने की बी-स्कैन मशीन का एक प्रॉब बदलने से भ्रूण परीक्षण जैसा गलत काम हो सकता है। प्रॉब मशीन का वह हिस्सा होता है जिससे जांच होती है। इसका साइज बदलने से भ्रूण का लिंग परीक्षण भी हो सकता है।

बी स्कैन मशीनों के रजिस्ट्रेशन लिए आदेश आए हैं। पीसीएनडीटी प्रभारी को निर्देश दे दिए है। वे जांच कर मॉनिटरिंग करेंगे। सभी सरकारी, निजी आई हॉस्पिटल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे मशीनों का रजिस्ट्रेशन कराएं। डॉ. के. के. सोनी, सीएमएचओ, अजमेर

सेंट्रल सुपरवाइजरी बोर्ड (सीआरबी) की मीटिंग में आंखों के जांच में इस्तेमाल की जाने वाली बी-स्कैन मशीन को पीसीपीएनडीटी एक्ट के दायरे में लेने का निर्णय लिया है। जिसके तहत अस्पतालों को बी-स्कैन मशीन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। नवीन जैन, शासन सचिव (परिवार कल्याण) एवं मिशन निदेशक

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