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शिशु मृत्यु की सूचना देने पर एएनएम आशा व टीम को मिलेगी प्रोत्साहन राशि

भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़ सरकार शिशु मृत्यु दर में होने वाली गिरावट को रोकने के लिए अब धरातल पर मौत के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 24, 2018, 05:10 AM IST

शिशु मृत्यु की सूचना देने पर एएनएम आशा व टीम को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
भास्कर न्यूज|मदनगंज-किशनगढ़

सरकार शिशु मृत्यु दर में होने वाली गिरावट को रोकने के लिए अब धरातल पर मौत के कारणों को खोजेगी। महकमा अब बच्चों की मौत की सूचना देने पर आशा सहयोगिनी को 50 रुपए, 14 दिन में रिपोर्ट तैयार कर भेजने पर एएनएम को 100 रुपए और ब्लॉक स्तर पर सोशल ऑडिट करने वाली टीम को सरकार 500 रुपए प्रोत्साहन राशि देगी। इस सूचना के बाद सरकार जिला और ब्लॉक स्तर पर 6 सैंपल चिह्नित कर शिशुओं की मौत के कारणों का पता लगाएगी। इससे शिशुओं को बचाया जा सके। ब्लॉक और जिला स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी जाएगी।

वर्तमान में एक साल तक के 1000 में से 46 शिशुओं की मौत हो रही है। इसको 30 पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार शिशु की मौत की जानकारी मिलने पर सोशल ऑडिट और जिला स्तरीय अधिकारियों के जरिए मौत के कारणों का पता लगाएगी। प्रोत्साहन राशि को देने का उद्देश्य शिशुओं की मौत का पता लगाना है। अभी तक मौत के सही आंकड़े नहीं मिल पा रहे हैं। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आरसीएचओ को दो दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सूचना देने पर प्रोत्साहन राशि देगी प्रदेश सरकार, ब्लॉक में छह सैंपल चिन्हित कर मौत के कारणों का पता लगाएंगे

शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सरकार नया प्रयास कर रही है। इसमें आशा, एएनएम और सोशल ऑडिट में समीक्षा करने वाली टीम को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस बार विशेष जोर शिशु मृत्यु का समय पर पता लगने पर उसके कारणों का पता लगाने पर रहेगा, जिससे कमियों को समय पर पूरा किया जा सके। डॉ. के.के. सोनी, सीएमएचओ, अजमेर

उपखंड में भी होती है हर महीने 10 शिशुओं की मौत

सूत्रों की मानें तो राजकीय यज्ञनारायण अस्पताल में प्रत्येक दिन 10 से 20 प्रसव होते हैं। इस तरह प्रत्येक माह करीब 500 प्रसव होते हैं। इसी तरह प्रत्येक दिन 6 निजी अस्पताल व नर्सिंग होम में औसत पांच से दस डिलिवरी होती है। इनमें से प्रत्येक माह करीब दस शिशु के मौत के मामले सामने आते है। इनमें अधिकांश में मौत के सही कारणों का भी पता नहीं लगाया जाता।

इन कारणों पर रहेगा फोकस

शिशु की बीमारी के बारे में माता-पिता को पता ही नहीं था।

बीमार शिशु का इलाज नीमहकीम से कराया गया।

माता-पिता ने उसे अस्पताल ले जाने में देरी की।

बीमार शिशुओं को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिली।

शिशु को अस्पताल ले तो गए, लेकिन डॉक्टर ने अटेंड नहीं किया।

डॉक्टर ने परामर्श तो दिया, लेकिन उसकी समय पर जांच नहीं कराई।

जांच भी कराई लेकिन उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका।

गंभीर स्थिति होने पर उसे उच्च चिकित्सा संस्थान में समय पर नहीं भेजा गया।

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